अंबानी से ज्यादा तेजी से बढ़े अदाणी: इंफ्रा किंग बनकर उभरे गौतम अदाणी, केंद्र सरकार की नीतियों से कारोबार बढ़ाने में मदद मिली


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मुंबई27 मिनट पहले

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कोयला कारोबार का साम्राज्य खड़ा करने के 20 साल बाद अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी अब ग्रुप को भविष्य के लिहाज से तैयार कर रहे हैं। वे जीवाश्म ईंधन यानी फॉसिल फ्यूल में भविष्य तलाश रहे हैं। केंद्र सरकार की पॉलिसी भी इनके सपने के लिए मददगार साबित हो रही है।

पिछले एक साल की बात करें तो गौतम अदाणी की नेटवर्थ मुकेश अंबानी से ज्यादा तेजी से बढ़ी है। एक साल में मुकेश अंबानी की कंपनियों की नेटवर्थ 3.26 लाख करोड़ बढ़ी, जबकि अदाणी ग्रुप कंपनियों की नेटवर्थ में 3.63 लाख करोड़ का इजाफा देखा गया।

6 लिस्टेड कंपनियों की वैल्यू में उछाल
अदाणी ग्रुप की शेयर बाजार में लिस्टेड 6 कंपनियों की वैल्यू तेजी से बढ़ी है। एक साल में इन कंपनी की वैल्यू 5.73 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई है। बाजार में लिस्टेड कंपनियों की वैल्यू के मोर्चे पर अदाणी ग्रुप की रफ्तार टाटा ग्रुप और मुकेश अंबानी की कंपनियों से तेज रही है।
अदाणी ग्रुप की कंपनियों में बड़ी ग्लोबल कंपनियों का पैसा लगा है। इनमें फ्रांसीसी तेल कंपनी टोटल SE और वारबर्ग पिनकस LLC भी शामिल हैं।

इंफ्रा सेक्टर के किंग बने गौतम अदाणी
अदाणी भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर किंग के रूप में उभरे हैं। वे खदानों, बंदरगाहों और बिजली प्लांट से लेकर हवाई अड्डों, डेटा सेंटर और डिफेंस सेक्टर में विस्तार करने वाले हैं। भारत के आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मोदी सरकार भी इन्हीं सेक्टर्स को अहम मानती है।

2 साल से भी कम समय में अदाणी ने 7 हवाई अड्डों और भारत के लगभग एक चौथाई एयर ट्रैफिक पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। उन्होंने 2025 तक अपनी रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता को 8 गुना बढ़ाने की योजना बनाई है।

श्रीलंका में टर्मिनल डेवलप करने का करार मिला
पिछले हफ्ते अदाणी ग्रुप ने श्रीलंका में पोर्ट टर्मिनल को डेवलप करने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। ग्रुप की कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने देशभर में डेटा सेंटर डेवलप और ऑपरेट करने के लिए EdgeConneX के साथ पिछले महीने ही समझौता किया।

इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से बने मजबूत
IEEFA में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के डायरेक्टर टिम बकले ने कहा कि अदाणी समझदार कारोबारी हैं और लंबे समय से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करते आ रहे हैं। जब तक भारत मजबूत विकास की गति को बनाए रखता है, तब तक इस ग्रुप के उनकी लीडरशिप में बहुत आगे जाने की संभावना है।

अदाणी ने सितंबर में जेपी मॉर्गन इंडिया समिट में कहा था कि भारत के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना हमारे राष्ट्र निर्माण के दर्शन का मोटो है। हमारे ग्रुप ने हजारों नौकरियां पैदा की हैं। अपने शेयरधारकों को अच्छा रिटर्न दिया है।

कमोडिटी व्यापारी के रूप में की थी शुरुआत
1980 में कमोडिटी कारोबारी के रूप में गौतम अदाणी ने शुरुआत की। अब वो चीन की कंपनी अलीबाबा के मालिक जैक मा से भी ज्यादा अमीर हो चुके हैं। ब्लूमबर्ग अरबपतियों के सूचकांक के अनुसार, पिछले एक साल में अदाणी अपनी नेटवर्थ में 50 अरब डॉलर जोड़ चुके हैं। इस दौरान मुकेश अंबानी ने 45 अरब डॉलर जोड़े हैं। अदाणी की नेटवर्थ इस साल किसी भी दूसरे अरबपति की तुलना में ज्यादा बढ़ी।

2010 में अदाणी सुर्खियों में आए
अदाणी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने 2010 में ऑस्ट्रेलिया में एक कोयला परियोजना खरीदने में कामयाबी पाई। तब से वह ग्रेटा थुनबर्ग सहित जलवायु कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गए हैं। 2019 में एक इंटरव्यू में अदाणी ने कहा कि परियोजना का मकसद भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियां थीं। अपने देश भारत में भी अदाणी विवाद के केंद्र में रहे हैं। ऐसा तब से हुआ, जब से 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुने गए। उन्हें PM मोदी का करीबी माना जाता है। इस समय अदाणी का कोयला कारोबार सबसे ज्यादा खतरे में है। दुनिया भर के वित्तीय संस्थानतेजी से सबसे गंदे जीवाश्म ईंधन (dirtiest fossil fuel) का उपयोग कर रहे हैं। इससे ऊर्जा परियोजनाओं के पास फाइनेंसिंग की समस्या आ गई है। वह सालाना 101 मिलियन टन के लिए कॉन्ट्रैक्ट माइनिंग करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का उनका निवेश चुनौतियों से भरा है।

नए वेंचर्स के सामने कम चुनौतियां
अदाणी के नए वेंचर्स को अभी कम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके पास डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की प्लानिंग के बारे में मोदी सरकार कह चुकी है कि हमें विदेशी कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी और आत्मनिर्भर बनना होगा। वह मोदी की मेक इन इंडिया अपील के तहत फिर से सौर पैनलों और मॉड्यूल के उत्पादन को भी बढ़ा रहे हैं।

मोदी प्रशासन की प्राथमिकताओं से मेल
विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए अदाणी की दिलचस्पी भी मोदी प्रशासन की प्राथमिकताओं के साथ मिलती है। वारबर्ग ने इस महीने अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन में 110 करोड़ डॉलर का निवेश किया। फ्रांस के टोटल ने अदाणी ग्रीन में अपना कुल निवेश 2.5 अरब डॉलर कर लिया। आने वाले वक्त में अदाणी ग्रुप इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर जनरेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी अच्छी खासी पैठ बना चुका होगा।

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