अयोध्या में राम मंदिर का कथित भूमि घोटाला: ट्रस्ट ने जो जमीनें ली उनके मालिकों को उसकी कीमत भी दी और दूसरी जगह जमीन भी, मतलब डबल मुआवजा दिया


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अयोध्याएक मिनट पहले

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कौशल्या भवन मंदिर के महंत यशोदानंदन त्रिपाठी ने कहा कि, ट्रस्ट ने मंदिर को पाने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की थी।

अयोध्या में राम मंदिर के लिए ली जा रही जमीनों को लेकर हर रोज नए आरोप लग रहे हैं। अब सामने आया है कि मंदिर के आस-पास के लोगों को घर और मंदिर खाली कराने के लिए ट्रस्ट ने अच्छी कीमत भी दी और दूसरी जगह घर या मंदिर बनाने के लिए जमीन भी दी जा रही है। इससे ट्रस्ट के खजाने पर दोहरी मार पड़ रही है।

उधर अयोध्या के कई मंदिर महंतों ने राम मंदिर ट्रस्ट पर ट्रस्ट (विश्वास) जताया है। ट्रस्ट पर लगे आरोपों को महंतों ने बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। कहा कि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर राम मंदिर के भूमि को लेकर लगे आरोप निराधार है। ट्रस्ट ने न केवल तय रकम पूरी पारदर्शिता के अदा की है बल्कि, वह दूसरी जगह मंदिर निर्माण के लिए भूमि व धन दोनों दे रहा है।

मंदिर बिक नहीं रहे, स्थानांतरित हो रहे
फकीरे राम मंदिर के महंत रघुवर शरण दास ने कहा- रामलला के आस-पास बने मंदिर को बेचा नहीं जा रहा है, बल्कि उसे दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने देव विग्रहों को नया मंदिर बनकर वहां स्थापित करेंगे।’ रघुवर शरण दास ने ट्रस्ट पर लगे आरोपों को भी बेबुनियाद बताया। मंदिर के वास्तुदोष को समाप्त करने के लिए ट्रस्ट पहले से मौजूद 70 एकड़ जमीन के अलावा 38 एकड़ जमीन खरीदी रहा है। इसी को लेकर ट्रस्ट पर महंगे दामों पर जमीनें खरीदने का आरोप लग रहा है।

कौशल्या भवन मंदिर के महंत यशोदानंदन त्रिपाठी ने कहा कि, ट्रस्ट ने मंदिर को पाने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की थी। राम मंदिर परकोटे में यह मंदिर आ रहा है। इसलिए यह मंदिर राम मंदिर के काम आ रहा है। उन्होंने जमीन के बदले जमीन व मंदिर निर्माण के लिए धन दिया है। मंदिर को बेचा नहीं गया है, विनिमय हुआ है। ट्रस्ट ने 4 करोड़ रुपए आरटीजीएस के तहत भुगतान किया है। ट्रस्ट ने पूरी पारदर्शिता बरती है।

रघुवर शरण दास, महंत फकीरे राम मंदिर

रघुवर शरण दास, महंत फकीरे राम मंदिर

किस मंदिर के बदले ट्रस्ट ने कितना चुकाया ?
1. फकीरे राम मंदिर :
250 साल प्राचीन इस मंदिर को दूसरी जगह विस्थापित करने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने महंत रघुवर शरण दास को करीब 13 बिस्सा जमीन दूसरी जगह खरीद कर दिया है। इसके अलावा मंदिर निर्माण के लिए 3 करोड़ 71 लाख रुपए भी दिए हैं। यह रकम बैंक एकाउंट में RTGS के तहत ट्रांसफर की गई है। दावा है कि यह मंदिर 10 महीने के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद पुराने मंदिर में विराजमान भगवान को नए मंदिर में विराजित कर किया जाएगा।

2. कौशल्या भवन मंदिर : पौराणिक महत्व रखने वाले कौशल्या भवन मंदिर को भी ट्रस्ट ने ट्रांसफर नामा के जरिए हासिल किया है। यह भवन 14 बिस्वा से ज्यादा में बना है। ट्रस्ट ने इसके लिए मंदिर प्रशासन को 4 करोड़ रुपए दिए हैं और मंदिर दूसरी जगह विस्थापित करने के लिए रामकोट मोहल्ले में ही जन्मभूमि के नजदीक 14 बिस्वा जमीन भी खरीदकर कौशल्या भवन मंदिर के महंत को दिया है। बताया जाता है कि इस जमीन के लिए भी ट्रस्ट ने मोटी रकम चुकाई है। 10 महीने के अंदर ये मंदिर भी दूसरी जगह बनकर तैयार हो जाएगा।

यशोदानंदन त्रिपाठी, महंत कौशल्या मंदिर

यशोदानंदन त्रिपाठी, महंत कौशल्या मंदिर

क्या है आरोप?
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पवन और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर जमीन खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। दोनों का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट जो जमीनें खरीद रहा है, उसके लिए तय रेट से कहीं ज्यादा की रकम चुका रहा है।
दोनों ने इसके लिए एक केस भी बताया। आरोप लगाया कि एक ही दिन जिस जमीन को दो करोड़ रुपए में बैनामा कराई गई उसे 10 मिनट के अंदर 18.50 करोड़ रुपए में ट्रस्ट के नाम रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया गया। पांडेय ने बताया कि यह जमीन सदर तहसील इलाके के बाग बिजैसी में स्थित है, जिसका क्षेत्रफल 12 हजार 80 वर्ग मीटर है। यह जमीन रवि मोहन तिवारी नाम के एक साधु और सुल्तान अंसारी के नाम बैनामा हुई थी। ठीक 10 मिनट बाद इसी भूमि का ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के नाम 18.50 करोड़ में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया जाता है। बैनामा और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट 18 मार्च, 2021 को किया गया था।

पांडेय ने आरटीजीएस की गई 17 करोड़ रुपए रकम की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यह धनराशि कहां-कहां गई, इसका पता लगाया जाए और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बैनामा और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र और नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं।

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