आगरा के अस्पताल में मौत की ड्रिल की कहानियां: ऑक्सीजन बंद होने से अपनों को खोने वाले बोले- डॉक्टर ने पहले कहा था सब ठीक है, फिर अचानक बताया कि मौत हो गई


आगराएक घंटा पहलेलेखक: अविनाश जायसवाल

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आगरा के पारस अस्पताल में 26 अप्रैल की सुबह 7 बजे हुई ऑक्सीजन की मॉक ड्रिल में कोरोना के 22 मरीजों की मौत हो गई थी। यह दावा- खुद अस्पताल के मालिक डॉक्टर अरिंजय जैन ने किया। इसका वीडियो भी वायरल हो गया।

42 दिन पहले हुए इस मामले की सच्चाई जानने के लिए हमने मरीजों के परिजन से बात की। आखिर कैसे ऑक्सीजन का मॉक ड्रिल, मौत ड्रिल में बदल गया? पढ़ें, 5 कहानियां…

पहली कहानी: ऑक्सीजन की कमी का दुखड़ा रो रहा था डॉक्टर, मेरे सामने 8 मरीजों की मौत हुई
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कार्यालय में तैनात सिपाही ने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि उनकी पत्नी की 26 अप्रैल की रात पारस अस्पताल में मौत हुई थी। डाॅक्टर अरिंजय से मैंने बात की थी और वो लगातार ऑक्सीजन की कमी का दुखड़ा रो रहे थे। इसी बीच रात 11 बजे मुझे पत्नी के दम तोड़ने की सूचना मिली। मैं अस्पताल पहुंचा तो अचानक वहां 8 मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल वालों ने एहतियातन पुलिस को भी बुला लिया था। थोड़ी देर बाद मृतकों के परिजन अस्पताल और कोरोना को कोस कर चले गए।

दूसरी कहानी: 6 सिलेंडर भी दिए, मगर पिता की नहीं बची जान
कृष्णा कॉलोनी जीवनी मंडी के रहने वाले अशोक चावला, उनकी भाभी और पिता तीनों पारस में एडमिट थे। अशोक कोरोना से उबर चुके थे। 26 अप्रैल को अचानक डाॅक्टर अरिंजय का फोन आया कि हम आपके पिता वासुदेव को बचा नहीं पाएंगे, क्योंकि हमारे पास ऑक्सीजन नहीं है।

डीएम के जरिए उन्होंने खुद छह सिलेंडर दिलवाए और जरूरत पड़ने पर और ऑक्सीजन लाने की बात कही थी। डाॅक्टर ने आराम से घर जाने को कहा और फिर निश्चिंत होकर घर पहुंचा ही था कि अचानक बेटे का फोन आया कि पापा जल्दी आ जाओ। बाबा की तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है। मैं जल्दी से अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर अरिंजय ने कहा- सॉरी, ही इज नो मोर।

अशोक के भाई अमित चावला की पत्नी मनीषा भी उसी हॉस्पिटल में भर्ती थीं। डाॅक्टर ने उनका सही इलाज नहीं किया और 26 अप्रैल को उनकी भी मौत हो गई।

तीसरी कहानी: एक बार फिर जख्म हरे हो गए
दयालबाग के पुष्पांजलि अपार्टमेंट के रहने वाले पुनीत की मौसी की 26 अप्रैल को पारस अस्पताल में मौत हो गई थी। ऑक्सीजन की कमी को पूरा परिवार मौत का कारण मान रहा था। अब वीडियो सामने आने के बाद पूरे परिवार के जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं।

चौथी कहानी: कानून पर भरोसा, हत्यारे को मिलेगी सजा
अशोक ट्रैफिक पुलिस में तैनात हैं, 26 अप्रैल के दिन इनके पिता की मौत भी इसी पारस अस्पताल में हुई थी। अशोक ने बताया कि वायरल वीडियो देखने के बाद हत्यारे डाॅक्टर अरिंजय पर गुस्सा आ रहा है। कानून पर भरोसा है, उसे सजा मिलेगी।

पांचवीं कहानी: इलाज में लापरवाही बरती गई थी
आगरा के एक वरिष्ठ पत्रकार की मां आशा शर्मा की भी मौत उसी दिन हुई थी। अस्पताल के स्टाफ ने इलाज में लापरवाही बरती थी। वीडियो वायरल होने के बाद हत्यारे डाॅक्टर के खिलाफ उनमें बहुत गुस्सा है।

26 अप्रैल को अस्पताल में 45 बेड थे, मरीज 97 भर्ती थे
आगरा प्रशासन की लिस्ट के अनुसार 26 अप्रैल को अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 45 बेड की व्यवस्था थी, जबकि यहां 97 मरीज भर्ती थे। आगरा के समाजसेवी नरेश पारस ने नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन में शिकायत की बात कही है। समाजसेवी गजेंद्र इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अशोक चावला और उनके भाई व कांग्रेस नेता अमित सिंह न्यू आगरा थाने पर तहरीर देंगे। सांसद एसपी सिंह बघेल मुख्यमंत्री को मामले की शिकायत करेंगे।

अस्पताल से 8 मरीज हुए शिफ्ट
पारस अस्पताल में मरीजों की मौत का मामला सामने आने के बाद यहां भर्ती कोरोना के 8 मरीज अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए हैं। तीमारदारों का कहना है कि वे अपने मरीज को इस अस्पताल में नहीं रखना चाहते। सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में हंगामे की आशंका से प्रशासन ने मरीजों को अस्पताल से शिफ्ट करवाया है।

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