आज का इतिहास: हांगकांग फ्लू के 41 साल बाद 2009 में दुनिया ने देखी थी एक और जानलेवा बीमारी, आज ही के दिन WHO ने स्वाइन फ्लू को घोषित किया था महामारी


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19 मिनट पहले

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दुनिया इस वक्त कोविड-19 महामारी से जूझ रही है, लेकिन आज के दिन को इतिहास में एक और महामारी के लिए याद किया जाता है। 2009 में आज ही के दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वाइन फ्लू (H1N1) को महामारी घोषित किया था। 1968 के हांगकांग फ्लू के करीब 41 साल बाद WHO ने किसी बीमारी को महामारी घोषित किया था।

स्वाइन फ्लू का पहला केस 15 अप्रैल 2009 को अमेरिका में सामने आया था। कैलिफोर्निया के 10 साल के एक बच्चे में वायरस से संक्रमण होने की पुष्टि हुई थी। दो दिन बाद कैलिफोर्निया में ही 8 साल के बच्चे में भी वायरस पाया गया। जिस तरह अभी कोरोना वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन सामने आ रहे हैं, इसी तरह इस बीमारी के पीछे वैज्ञानिकों ने इंफ्लूएंजा A (H1N1) pdm09 स्ट्रेन को जिम्मेदार बताया था। इस स्ट्रेन को इंसानों और जानवरों में पहले कभी नहीं देखा गया था। 18 अप्रैल 2009 को अमेरिका के हेल्थ डिपार्टमेंट ने इस नई बीमारी की जानकारी WHO को दी। अगले ही हफ्ते पूरे अमेरिका में नेशनल हेल्थ इमरजेंसी लगा दी गई।

धीरे-धीरे वायरस अमेरिका से बाहर निकलने लगा। अप्रैल खत्म होते-होते 70 देशों से वायरस के संक्रमित मरीज सामने आने लगे। विशेषज्ञों के मुताबिक अगले एक साल में ही स्वाइन फ्लू से दुनियाभर में डेढ़ लाख से ज्यादा मौतें हुईं। सिर्फ अमेरिका में इस वायरस से 12 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई।

मरने वालों में 80% लोगों की उम्र 65 साल से कम थी। यानी बुजुर्ग इस वायरस के कहर से बच गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि H1N1 वायरस पहले भी लोगों में फैला था, इसलिए वायरस के संपर्क में बुजुर्ग लोग पहले आ चुके थे और उनके शरीर में एंटीबॉडी बन गई थी।

कोरोना वायरस के मुकाबले देखा जाए तो ये वायरस इतना घातक नहीं था। इस वायरस की वजह से मौतें कम हुईं और वैक्सीन भी जल्दी बन गई। अक्टूबर 2009 तक दुनिया को इसकी वैक्सीन मिल गई थी। अभी की तरह वैक्सीन की मारामारी तब भी हुई थी। विकसित देशों ने वैक्सीन के ज्यादा डोज पर कब्जा कर लिया था। आखिरकार वैक्सीनेशन की बदौलत वायरस का फैलना कम हुआ और नए केस भी कम हुए। 10 अगस्त 2010 को WHO ने इस बीमारी को महामारी की श्रेणी से हटा दिया। ये वायरस एक सीजनल फ्लू की तरह आम लोगों में अभी भी फैलता है।

1987: मार्गरेट थैचर ने लगातार तीसरी बार जीता था चुनाव

ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने आज ही के दिन लगातार तीसरी बार चुनाव जीता था। लगातार तीन बार ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनने वाली वे एकमात्र महिला हैं। 3 मई 1979 को थैचर पहली बार यूके की प्रधानमंत्री बनी थीं। उसके बाद उन्होंने 1983 और 1987 का चुनाव भी जीता और लगातार 11 साल तक इस पद पर काबिज रहीं।

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के साथ मार्गरेट थैचर। कहा जाता है कि रोनाल्ड रीगन और मार्गरेट थैचर काफी अच्छे दोस्त थे। दुनियाभर के तमाम विषयों पर दोनों घंटों एक-दूसरे से बातें किया करते थे।

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के साथ मार्गरेट थैचर। कहा जाता है कि रोनाल्ड रीगन और मार्गरेट थैचर काफी अच्छे दोस्त थे। दुनियाभर के तमाम विषयों पर दोनों घंटों एक-दूसरे से बातें किया करते थे।

थैचर को अपने राजनीतिक करियर की पहली सफलता 1959 में मिली। कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से चुनाव जीतकर वे संसद पहुंच गईं। 1970 में कंजर्वेटिव पार्टी के टैड हीथ प्रधानमंत्री बने और थैचर को शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

बतौर शिक्षा मंत्री उन्होंने 7 से 11 साल के बच्चों को स्कूल में दूध दिए जाने की योजना पर रोक लगा दी। उनके इस फैसले की खूब आलोचना हुई। विपक्षी लेबर पार्टी ने उन्हें ‘दूध छीनने वाली’ करार दिया। वे पर्यावरण मंत्री भी बनाई गईं, लेकिन उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद के चुनाव में टैड हीथ के खिलाफ उतरने का फैसला लिया। हीथ को हराकर वे कंजर्वेटिव पार्टी की मुख्य नेता बन गईं।

1979 में ब्रिटेन में आम चुनाव हुए। इन चुनावों में जीतकर थैचर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास में कदम रखने वाली पहली महिला बन गईं। लगातार 11 सालों तक 10 डाउनिंग स्ट्रीट उनका ठिकाना रहा।

1959 : होवरक्राफ्ट का आविष्कार

पानी, कीचड़, बर्फ और उबड़-खाबड़ जगहों पर चल सकने वाले होवरक्राफ्ट का आज ही के दिन आविष्कार हुआ था। इसे एयर कुशन व्हीकल भी कहा जाता है। होवरक्राफ्ट को बनाने की कोशिशें अलग-अलग वैज्ञानिकों द्वारा पहले से की जा रही थीं, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर बनाने का श्रेय इंजीनियर क्रिस्टोफर कॉकरेल को जाता है। क्रिस्टोफर के पास ही होवरक्राफ्ट का पेटेंट भी है।

होवरक्राफ्ट को विशेष रूप से बनी मजबूत चपटे गुब्बारे जैसी आकृति पर फिट किया जाता है जिसे स्कर्ट कहते है। बड़े पंखों के जरिए इस स्कर्ट में हवा भरी जाती है जिससे होवरक्राफ्ट सतह से थोड़ा ऊपर उठ जाता है। इस वजह से फ्रिक्शन कम हो जाता है और होवरक्राफ्ट हवा में तैरने लगता है। होवरक्राफ्ट की तेज स्पीड के पीछे यही वजह है। आगे बढ़ने के लिए होवरक्राफ्ट के पीछे भी पंखे लगे होते हैं।

होवरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ क्रिस्टोफर कॉकरेल।

होवरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ क्रिस्टोफर कॉकरेल।

आज सेना में बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होता है। रेस्क्यू ऑपरेशन से लेकर सैनिकों को जल्दी एक-जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में भी होवरक्राफ्ट की मदद ली जाती है।

आज के दिन को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है…

1981: ईरान में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप से करीब 2000 लोगों की मौत हुई।

1971: अमेरिका ने चीन पर लगे व्यापार प्रतिबंधों को खत्म कर उसके साथ दोबारा व्यापार शुरू किया।

1963: वियतनाम युद्ध के दौरान एक बौद्ध भिक्षु ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली।

1991: माइक्रोसॉफ्ट ने MS-DOS 5.0 रिलीज किया।

1770: ब्रिटिश सेना के कमांडर कैप्टन जेम्स कुक ने ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ की खोज की। जेम्स अपने जहाज से जा रहे थे और गलती से उनका जहाज ग्रेट बैरियर रीफ पर ही चढ़ गया था।

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