आज का इतिहास: 1981 में पहली बार 5 लोगों के AIDS से संक्रमित होने का पता चला, 1999 तक दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण था AIDS


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3 मिनट पहले

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1981 में आज ही के दिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने एक आर्टिकल छापा था। आर्टिकल मोर्बिडिटी एंड मोर्टालिटी वीकली में छपा था। इसमें नए तरह के न्यूमोसिस्टिस निमोनिया होने के बारे में बताया गया। ये 5 समलैंगिक लोगों के अंदर मिला था। इन मरीजों की इम्युनिटी अचानक कम हो गई थी। कुछ महीने बाद पांचों की मौत हो गई। इसी बीमारी को आगे चलकर वैज्ञानिकों ने AIDS नाम दिया।

आर्टिकल छपने के कुछ दिन बाद ही अमेरिका में इस तरह के कई मामले सामने आए। CDC ने जांच के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया। उसी साल जून में ही 35 साल के एक समलैंगिक व्यक्ति को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। ये हॉस्पिटल में भर्ती होने वाला AIDS का पहला मरीज था।

शुरुआत में ये बीमारी केवल समलैंगिक लोगों में ही होती थी, इस वजह से इसे गे-रिलेटेड इम्यून डेफिशिएंसी, गे कैंसर या गे मेंस निमोनिया नाम दिया गया। अगस्त 1981 तक पूरे अमेरिका में इस बीमारी के 108 मामले सामने आए, इनमें से केवल एक महिला थी। इन 108 मरीजों में 94% समलैंगिक थे और कुछ ही महीनों में इनमें से 40% मरीजों की मौत हो गई।

10 दिसंबर 1981 को बॉबी कैंपबेल ने सार्वजनिक तौर पर खुद को इस बीमारी से संक्रमित होने की पुष्टि की। ऐसा करने वाले वे पहले शख्स थे। इसी के साथ वे इस बीमारी से लड़ने के लिए पोस्टर बॉय बन गए।

धीरे-धीरे ये बीमारी महामारी का रूप लेती जा रही थी। डॉक्टरों, वैज्ञानिकों के साथ-साथ लोगों में भी डर था। लिहाजा अलग-अलग अवेयरनेस प्रोग्राम होने लगे, बीमारी पर रिसर्च के लिए फंड दिए जाने लगे। सितंबर 1982 में CDC ने इस बीमारी को पहली बार परिभाषित किया और इसे “AIDS” (Acquired Immune Deficiency Syndrome) नाम दिया गया।

अगले ही साल AIDS के लिए जिम्मेदार वायरस का पता लगा लिया गया और वायरस की पहचान के लिए एक स्क्रीनिंग टेस्ट भी तैयार कर लिया गया। 1984 में AIDS कैंपेन के पोस्टर बॉय बॉबी कैंपबेल की 32 साल की उम्र में मौत हो गई।

AIDS के प्रति एक जागरूकता कार्यक्रम में बॉबी कैंपबेल।

AIDS के प्रति एक जागरूकता कार्यक्रम में बॉबी कैंपबेल।

दिसंबर 1985 में पेंसिल्वेनिया में 20 महीने के ड्वाइट बर्क की AIDS से मौत हो गई। उसे अपने संक्रमित माता या पिता से AIDS हुआ था। जन्म से ही किसी को AIDS होने का ये पहला मामला था। मार्च 1987 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने AIDS की पहली दवा विकसित की।

इसी साल FDA ने AIDS को संक्रामक बीमारी घोषित करते हुए दूसरे देशों से आने वाले सभी लोगों के लिए AIDS की टेस्टिंग अनिवार्य कर दी। ये नियम जनवरी 2010 तक रहा। पूरी दुनिया में इसके बाद एड्स के बारे में लोगों को जागरूक करने के अभियान शुरू हो गए और 1988 से हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे के रूप में मनाया जाने लगा।

90 के दशक में इस बीमारी से जुड़े बड़े-बड़े अपडेट आए। 1991 में पहली बार लाल रिबन को AIDS बीमारी के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया। अगले ही साल अमेरिका में 25 से 44 साल के लोगों की मौतों का सबसे बड़ा कारण AIDS बन गया। हालांकि 1995 में एंटीरेट्रोवियल थेरेपी और दूसरी विकसित दवाओं की मदद से मौतों का आंकड़ा कुछ कम हुआ। इसके बाद भी 1999 तक AIDS दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण था।

2004 में AIDS से दुनियाभर में 18 लाख मौतें हुईं। ये एक साल में AIDS से हुई मौतों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके बाद AIDS से होने वाली मौतों में 61% की कमी आई है। 2020 में AIDS की वजह से दुनियाभर में 6 लाख 90 हजार लोगों की मौत हुई।

1975: आठ साल बाद खुली स्वेज नहर

भूमध्यसागर और लाल सागर को आपस में जोड़ने वाली स्वेज नहर को आज ही के दिन दोबारा खोला गया था। ये नहर 1869 में बनकर तैयार हुई थी और अगले 88 सालों तक इस पर ब्रिटिशर्स का कब्जा था, लेकिन जुलाई 1956 में मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया और यहां से निकलने वाले जहाजों पर टैक्स लगा दिया। इसके बाद इजराइल ने मिस्र पर हमला कर नहर अपने कब्जे में ले ली।

स्वेज नहर को दोबारा खोले जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका के लिटिल रॉक जहाज पर खड़े बैंड के सदस्य।

स्वेज नहर को दोबारा खोले जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका के लिटिल रॉक जहाज पर खड़े बैंड के सदस्य।

यूनाइटेड नेशन और ब्रिटेन के दबाव के बीच इजराइल ने 1957 में नहर दोबारा मिस्र को सौंप दी। इसके बाद अगले 10 साल इस नहर पर मिस्र का कब्जा रहा और इससे जहाजों की आवाजाही होती रही। 1967 में मिस्र ने नहर को बंद कर दिया जिसके बाद अरब देशों और इजराइल के बीच 6 दिन का भीषण युद्ध हुआ। इजराइल के साथ शांति समझौता होने के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादत ने आज ही के दिन 1975 में इस नहर को यातायात के लिए खोला था।

आज विश्व पर्यावरण दिवस

साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुए इस आयोजन में करीब 110 देशों ने हिस्सा लिया। इसमें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का गठन हुआ। इस सम्मेलन की शुरुआत 5 जून को हुई थी। इसी की याद में 1974 में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इसके बाद से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 1987 से दुनियाभर के अलग-अलग देशों को इस दिन की मेजबानी सौंपने की शुरुआत की गई। 2018 में इसका मेजबान भारत था। इस साल की मेजबानी पाकिस्तान को दी गई है।

5 जून को देश दुनिया में हुईं कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं…

2017: भारत ने जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट की मदद से जीसैट-19 सेटेलाइट को लॉन्च किया।

2015: मैगी में लेड की ज्यादा मात्रा मिलने के बाद भारत ने मैगी पर बैन लगा दिया।

2011: योगगुरु बाबा रामदेव को पुलिस ने जबरदस्ती हिरासत में लिया। रामदेव भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।

1989: भारत ने ‘त्रिशूल’ मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

1968: अमेरिका के शहर लॉस एंजिल्स के एक होटल में अमेरिकी सांसद रॉबर्ट कैनेडी के ऊपर जानलेवा हमला हुआ।

1924: अर्नेस्ट एलेक्जेंडरसन ने अटलांटिक महासागर के पार पहला फैक्स भेजा।

1752: बेंजामिन फ्रैंकलिन ने बिजली विद्युत का एक स्रोत है, यह दर्शाने के लिए पतंग उड़ाई।

1661: महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन ने कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला लिया।

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