आज का इतिहास: 50 साल के संघर्ष के बाद तेलंगाना बना देश का नया राज्य; 7 साल बाद भी हैदराबाद तेलंगाना और आंध्र, दोनों की राजधानी


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4 मिनट पहले

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बात 1956 की है। 1 नवंबर को राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों को अमल में लाया गया। तब के हैदराबाद (तेलंगाना) प्रांत को भाषाई आधार पर आंध्रप्रदेश में मर्ज कर दिया गया। पर यह हिस्सा राज्य के अन्य हिस्से से आर्थिक, शैक्षणिक एवं अन्य सभी स्तरों पर पिछड़ा था। नुकसान यह हुआ कि इस हिस्से की अनदेखी हुई और कुछ ही समय बाद तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की मांग उठने लगी। पहला बड़ा आंदोलन हुआ 1969 में। यानी नया राज्य बनने के सिर्फ 13 साल बाद। तब से 2013 तक आंदोलन चलते रहे और 2 जून को 50 साल से अधिक समय तक चले संघर्ष का सुखद परिणाम सामने आया। 2009 में भूख हड़ताल करने वाले के चंद्रशेखर राव यानी केसीआर राज्य के पहले मुख्यमंत्री चुने गए और आज भी वे ही राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

आंदोलनों की बात करें तो 1969 में तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की मांग के अलावा 1972 और 2009 में भी बड़े आंदोलन हुए। 1969 में तो ‘जय तेलंगाना’ आंदोलन हिंसक हो उठा था और करीब 300 लोगों की मौत हो गई थी। तब तो वह जैसे-तैसे शांत हो गया, पर समझौता नहीं निकल सका। मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ती रही। 1972 में ‘जय आंध्र’ आंदोलन शुरू हुआ।

1998 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ‘एक मत, दो राज्य’ का नारा देकर अलग तेलंगाना राज्य की मांग का समर्थन किया। साल 2001 में के. चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की स्थापना की। नाम से ही साफ है कि अलग राज्य के लिए यह पार्टी सबसे मुखर थी। 2009 के लोकसभा चुनावों तक तेलंगाना को लेकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई थी। भाजपा ने तो घोषणा कर दी थी कि सत्ता में आए तो तेलंगाना को अलग राज्य बनाएंगे। सितंबर 2009 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया। इससे राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना। 29 नवंबर को केसीआर ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जैसे-जैसे केसीआर की भूख हड़ताल आगे बढ़ी, तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता गया। पॉलिटिकल पार्टियों के साथ-साथ स्टूडेंट्स, कर्मचारी और सामाजिक संगठन भी इस आंदोलन से जुड़ गए। तब 11 दिन बाद केंद्र सरकार ने तेलंगाना के लिए प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन देकर केसीआर की भूख हड़ताल खत्म करवाई।

18 फरवरी 2014 के दिन लोकसभा में तेंलगाना को अलग राज्य बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित होने के बाद खुशियां मनाते तेलंगाना समर्थक।

18 फरवरी 2014 के दिन लोकसभा में तेंलगाना को अलग राज्य बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित होने के बाद खुशियां मनाते तेलंगाना समर्थक।

फरवरी 2010 में केंद्र सरकार ने जस्टिस श्रीकृष्ण के नेतृत्व में 5 सदस्यों की एक कमेटी बनाई। दिसंबर 2010 में कमेटी ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इस दौरान तेलंगाना को लेकर प्रदर्शन होते रहे। 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस कमजोर हो चुकी थी। नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे थे। तब 3 अक्टूबर 2013 को केंद्र सरकार ने तेलंगाना के गठन को मंजूरी दी। 2014 में लोकसभा के चुनावों के साथ ही तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के लिए अलग-अलग चुनाव हुए। 2 जून को राज्य ने औपचारिक रूप से आकार लिया और के चंद्रशेखर राव राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। हैदराबाद को लेकर दोनों राज्यों में खींचतान चलती रही। पर केंद्र ने जस्टिस श्रीकृष्ण समिति की सिफारिश पर 10 साल के लिए हैदराबाद को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी घोषित किया।

1966: किसी अमेरिकी स्पेस व्हीकल की चांद पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग

जनवरी 1961 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ह्यूज एयरक्राफ्ट को कम वजन के 7 स्पेस व्हीकल बनाने का जिम्मा सौंपा। नासा का उद्देश्य था- चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाए। सतह का विश्लेषण कर जानकारी जुटाई जाए। ह्यूज एयरक्राफ्ट ने करीब 10 फीट ऊंचे व्हीकल बनाए जिन्हें लगभग 27 किलो के तिकोने स्टैंड पर फिट किया। चांद की सतह की फोटो क्लिक करने के लिए इस व्हीकल में टीवी कैमरा भी लगाया गया। इस सीरीज के व्हीकल्स को सर्वेयर नाम दिया गया। 30 मई 1966 को फ्लोरिडा से सर्वेयर-1 लॉन्च किया गया। करीब 63 घंटों बाद यानी आज ही के दिन ये चांद पर पहुंच गया।

लॉन्च से पहले नासा द्वारा जारी की गई सर्वेयर-1 की फोटो।

लॉन्च से पहले नासा द्वारा जारी की गई सर्वेयर-1 की फोटो।

सर्वेयर ने चांद के सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की। ये कारनामा करने वाला वह पहला स्पेस व्हीकल था। 7 महीने 7 दिन 9 घंटे और 18 मिनट के अपने मिशन में सर्वेयर-1 ने चांद से 11 हजार 240 फोटो भेजी। सर्वेयर द्वारा भेजी गई फोटो से वैज्ञानिकों ने ये पुष्टि की कि चांद की दानेदार सतह हजारों सालों तक उल्काओं के टकराने से बनी है और सतह पर मानव को भेजा जा सकता है।

क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का राज्याभिषेक हुआ

आज ही के दिन 1953 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का राज्याभिषेक हुआ था। करीब 7 दशकों के बाद आज भी वे ब्रिटेन की रियासत को संभाल रही हैं। साल 1947 में एलिजाबेथ की शादी प्रिंस फिलिप से हुई। शादी के बाद से ही एलिजाबेथ ने शाही परिवार की जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। उस समय किंग जॉर्ज की तबीयत खराब रहती थी। तय किया गया कि किंग जॉर्ज की जगह क्वीन एलिजाबेथ और किंग फिलिप अलग-अलग जगहों का दौरा करेंगे। 1952 में एलिजाबेथ अपने पति के साथ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर थीं, तभी खबर मिली कि किंग जॉर्ज का निधन हो गया है। उस समय एलिजाबेथ की उम्र 25 साल थीं। दौरा अधूरा छोड़कर ही लौटीं। उन्हें महारानी बनाया गया।

एलिजाबेथ को शाही परिवार की परंपराओं के मुताबिक महारानी का ताज पहनाया गया।

एलिजाबेथ को शाही परिवार की परंपराओं के मुताबिक महारानी का ताज पहनाया गया।

आज के दिन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन घटनाओं के लिए भी जाना जाता है-

2009: नवंबर 2008 के मुंबई हमला मामले में पाकिस्तानी कोर्ट ने आतंकी संगठन लश्कर के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद को रिहा किया।

1988: भारतीय अभिनेता राज कपूर का निधन हुआ।

1972: नेवादा में यूनाइटेड एयरलाइंस के विमान को एक व्यक्ति ने हाईजैक किया। बंधकों को छोड़ने के लिए अपहरणकर्ता ने 2 लाख डॉलर की फिरौती मांगी।

1962: फीफा वर्ल्ड कप के दौरान चिली और इटली के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। फुटबॉल इतिहास में इस घटना को बैटल ऑफ सेंटियागो नाम से जाना जाता है।

1962: फीफा वर्ल्ड कप के दौरान चिली और इटली के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। फुटबॉल इतिहास में इस घटना को बैटल ऑफ सेंटियागो नाम से जाना जाता है।

1898ः डॉ. पॉल-लुइस साइमंड ने पता लगाया कि बॉम्बे में फैले प्लेग का कारण चूहे, मक्खियां हैं।

1881: मारकोनी ने रेडियो के पेटेंट के लिए आवेदन दिया।

1818: ब्रिटिश सेना ने बॉम्बे में मराठा गठबंधन सेनाओं को परास्त किया।

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