आज केरल पहुंचेगा मानसून: सभी मानक पूरे, कुछ देर में मौसम विभाग कर सकता है घोषणा; 27 मई से श्रीलंका में अटका था


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नई दिल्ली2 मिनट पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा

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मानसून आज केरल के तट से टकराएगा। इसके सभी मानक पूरे हो गए हैं। कुछ घंटों में इसकी घोषणा हो सकती है। इससे पहले दक्षिण पश्चिम मानसून के केरल में पहुंचने की स्थितियां कुछ दिन पहले ही बनना शुरू हो गई थीं। बारिश, हवा की दिशा, गति और गहराई अनुकूल है। मौसम विज्ञानी आरके जेनामनी ने बताया कि सैटेलाइट से आउटगोइंग लांगवेव रेडिएशन का आंकड़ा मिलते ही मानसून केरल पहुंचने की घोषणा हो सकती है।

इससे पहले मानसून ने अंडमान में 21 मई को दस्तक दी थी। 27 मई को आधे श्रीलंका और मालदीव को पार करने के बाद मजबूत हवाओं की कमी के चलते 7 दिन तक मानसून की उत्तरी सीमा कोमोरिन सागर में ही ठहर गई थी। लेकिन अब परिस्थितियां अनुकूल हैं।

हालांकि, इस बार मानसून समय से 2 दिन देरी से है। इधर, केरल में पिछले 4 दिन से प्री-मानसून बारिश जारी है। बुधवार को यहां सैटेलाइट इमेज में तटवर्ती इलाकों और उससे सटे दक्षिण पूर्व अरब सागर में बादल छाए नजर आए। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि केरल में बारिश वितरण में बढ़ोतरी हुई है। दक्षिण सागर के निचले स्तरों में पछुआ हवाएं चल रही हैं।

क्या होते हैं मानसून की घोषणा के मानक

  • केरल, लक्षद्वीप और कर्नाटक के 14 मौसम केंद्रों में से 60% केंद्रों में 10 मई के बाद लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी से अधिक बारिश होनी चाहिए।
  • जमीनी सतह से साढ़े चार किमी ऊंचाई तक पश्चिमी हवाएं चलने लगने लगें, जमीनी सतह के करीब हवा की गति 30-35 किमी प्रतिघंटा तक हो।
  • बादलों की मोटाई इतनी अधिक हो कि जमीन से आसमान की ओर लौटने वाला रेडिएशन 200 वॉट प्रति वर्गमीटर से भी कम हो जाए।

मध्यप्रदेश में 3-4 दिन प्री-मानसून बारिश का ऑरेंज अलर्ट
एमपी में हर साल 17 जून तो भोपाल में 20 जून के आसपास पहुंचता है। इस बार भी इसके समय पर पहुंचने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञ एके शुक्ला कहते हैं कि यदि इसकी प्रोग्रेस बरकरार रही और करंट मिलता रहा तो यह तय समय पर पहुंच सकता है।

मौसम केंद्र की तरफ से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक अगले तीन-चार दिन भोपाल सहित मध्यप्रदेश में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट भी दिया गया है।

राजस्थान: जून का सबसे सर्द आगाज, जयपुर में 20 साल का रिकॉर्ड टूटा
जयपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इस बार जून का सबसे सर्द आगाज हुआ है। जयपुर में तो जून की शुरुआत में सबसे कम तापमान का 20 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। यहां दिन का पारा 30.2 डिग्री रहा। इससे पहले 1 जून 2001 को 39.8 डिग्री था। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं। आने वाले दिनों में जयपुर समेत जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, दौसा, डूंगरपुर, झुंझुनूं, सीकर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जालोर और पाली जिलों में 6 जून तक बारिश हो सकती है।

हिमाचल में बारिश और ओले गिरने से सेब समेत नकदी फसलों को नुकसान
हिमाचल के शिमला में बुधवार दोपहर बाद आंधी और तेज गर्जना के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग के येलो अलर्ट के बीच शिमला से सटे ऊपरी इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से सेब और गुठलीधार फलों और नकदी फसलों को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग के अनुसार शिमला सहित राज्य के मध्यम ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में पांच जून और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में चार जून तक मौसम खराब रहेगा। जबकि मैदानी इलाकों में आगामी आठ जून तक मौसम के साफ बने रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से प्रदेश में मौसमी तंत्र में बदलाव आया है। इससे मैदानी भागों में गर्मी का असर लगभग खत्म हो गया है। अब एक सप्ताह तक मैदानी क्षेत्रों में मौसम साफ रहेगा।

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