आत्मनिर्भर उद्योग: खुद पर भरोसा कर बना दिए स्वदेशी उत्पाद, अब चीन से नहीं मंगाने पड़ेंगे बैटरी जिग, यहां रोजगार भी बढ़ाया


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भिवाड़ी41 मिनट पहलेलेखक: प्रवीण शर्मा

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भिवाड़ी की दाे बड़ी कंपनियां इलेक्ट्रिक टू व्हीकल की ओकीनावा और इलेक्ट्राेनिक्स की भगवती ऑटाेमाेबाइल ने पूरी तरह स्वदेशी रूप में ढाल लिया है।

  • काेराेनाकाल में भिवाड़ी की ओकीनावा, भगवती प्राेडक्ट और एमएसएमई सेंटर ने बदली हवा, दोगुना हुआ कारोबार

काेराेना ने भारतीयाें काे काफी कुछ सिखा दिया। सबसे बड़ी सीख ताे उद्यमियों काे मिली। जनता ने इन उत्पादाें पर भराेसा किया। यही कारण है कि भारतीय कंपनियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। भिवाड़ी की दाे बड़ी कंपनियां इलेक्ट्रिक टू व्हीकल की ओकीनावा और इलेक्ट्राेनिक्स की भगवती ऑटाेमाेबाइल ने पूरी तरह स्वदेशी रूप में ढाल लिया है। इन दाेनाें ही कंपनियाें में काेराेना के बाद काम में बढ़ाेतरी हुई है। वहीं दूसरी ओर पथरेड़ी में बने प्रदेश के एकमात्र एमएसएमई सेंटर पर अब बैटरी के जिग बनने लगे हैं। पहले ये जिग चीन से आयात किए जाते थे।

ओकीनावा : 150 स्कूटर बना रही, जरुरत 200 की
खुश्खेड़ा में इलेक्ट्रिक स्कूटर की ओकीनावा कंपनी ने 2016 में काम शुरु किया। बढ़ते डीजल-पेट्राेल की कीमताें के बाद यह स्कूटर कंपनी अहम भूमिका निभा रही है। एचआर हैड जितेंद्र यादव के अनुसार वर्तमान में देशभर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी बाजार में उतर गई हैं। कंपनी मालिक जितेंद्र शर्मा ने 6 साल पहले काम शुरू किया। पहले प्रतिदिन 100 स्कूटर बनते थे, जाे अब बढ़कर 150 तक हाे गए हैं। मार्केट में आवश्यकता प्रतिदिन 200 स्कूटर की है। कंपनी में करीब 200 लाेग काम करते हैं। फिलहाल कंपनी के देशभर में 350 डीलर हैं।

एमएसएमई : बैटरी का जिग बना दिया, यह केवल देश में यहीं बना
गत वर्ष शुरु हुए प्रदेश के एकमात्र एमएसएमई सेंटर के शिक्षकाें ने वह कर दिया जिस पर आज सभी इन पर नाज कर रहे हैं। एमएसएमई के डीजीएम सुमित जैन ने बताया कि अक्टूबर माह में दिल्ली की इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी पैक बनाने वाली कंपनी इन्वर्टेज टेक्नाॅलाेजी के निदेशक आदित्य गाेयल सेंटर पर आए थे। उन्हाेंने बताया कि बैटरी बनाने के काम आने वाला जिग चीन से खरीदना पड़ रहा है।

कंपनी चाहती है कि यह टूल हम हमारे देश में ही तैयार कराएं। सेंटर के शिक्षकाें ने करीब 15 दिन तक इस पर गहन जांच की। इसके बाद सेंटर पर नई तकनीक बदाैलत इस जिग काे तैयार कर दिया। जैन के अनुसार यह जिग देश में पहली बार पथरेड़ी के एमएसएमई सेंटर पर ही बना है। इसके लिए सेंटर के चार शिक्षकाें की टीम ने मेहनत की। अभी तक सेंटर पर इन्वर्टेड कंपनी के लिए 20 जिग बनाकर भेजे जा चुके हैं।

भगवती प्राेडक्ट : 1000 कराेड़ तक पहुंचा टर्नओवर, तीगुने बढ़ाए मजदूर
काेराेना के बाद इलेक्ट्राेनिक आइटम में बहुत बड़ा बदलाव आया है। केंद्र सरकार की ओर से कंपनियाें काे दी गई छूट का नतीजा है कि इलेक्ट्राेनिक कंपनियां आज बड़ी मात्रा में उत्पादन कर रही हैं। खुश्खेड़ा में भगवती प्राेडक्ट के यूनिट हैड गजेंद्र सिंह के अनुसार कंपनी का का टर्नओवर 1000 कराेड़ तक पहुंच चुका है। कंपनी में पूरी तरह स्वदेशी टीवी, माेबाइल और एसी बन रहे हैं।

गत वर्ष काेराेना से पहले मार्च तक कंपनी में कंपनी में 400 मजदूर काम करते थे। आज सामान की बढ़ती डिमांड के बाद मजदूराें की संखया 1300 से अधिक हाे गई है। हमें कंपनी काे दाे से तीन शिफ्टाें में भी चलाना पड़ रहा है। गजेंद्र के अनुसार आने वाले दिनाें में कंपनी इलेक्ट्राेनिक के कई अन्य उत्पाद भी बनाने जा रही है।

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