इतिहास में आज: टोक्यो में खुद को बुद्ध का अवतार बताने वाले बाबा ने करवाया था सबवे पर जानलेवा सरीन गैस से हमला; 13 की हुई थी मौत


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29 मिनट पहले

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बात 1995 की है। 20 मार्च को शोको असहारा नाम के बाबा के कहने पर डूम्सडे पंथ के फॉलोअर्स ने टोक्यो के सबवे सिस्टम में जानलेवा सरीन गैस से हमला किया था। 5 अलग-अलग ट्रेन में उन्होंने गैस लीक करने वाले कंटेनर रखवाए थे। इससे 13 लोग मारे गए थे और हजारों घायल हुए थे।

नर्व एजेंट कहे जाने वाले पदार्थों में से एक सरीन रंगहीन, स्वादहीन तरल और साफ पदार्थ है। वाष्प के संपर्क में आते ही सरीन लोगों के लिए जानलेवा बन जाती है। मनुष्य का श्वसन तंत्र बंद हो जाता है। शरीर में ऐंठन और मरोड़ उठती है। इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों ने अपने दुश्मनों पर किया था।

दृष्टिहीन शोको ने 1980 में डूम्सडे पंथ बनाया। वह ऐसा करिश्माई नेता था, जो डॉक्टरों और वैज्ञानिकों जैसे पढ़े-लिखे लोगों तक को फॉलोअर बना लेता था। इस पंथ को लेकर शुरू से ही विवाद रहा। हमले के बाद कार्रवाई हुई और शोको समेत उसके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया था। शोको असहारा खुद को भगवान बुद्ध का अवतार बताता था।

शोको को 2004 में फांसी की सजा सुनाई गई। बाद में उसके 6 और समर्थकों को फांसी की सजा हुई। जुलाई 2018 में इन सभी को फांसी पर चढ़ाया गया। शोको कहता था कि उसने हिमालय में तपस्या की है। बुद्ध के बाद उसे ही ज्ञान की प्राप्ति हुई है। हिंदुओं को जोड़ने के लिए शोको खुद को शिव का अवतार बताता था। ईसाई धर्म के लोगों को प्रभावित करने के लिए खुद को ईसा मसीह भी कहता था। असहारा ने हिंदू-बौद्ध मान्यताओं को मिलाकर ‘ओम शिनरीक्यो’ संप्रदाय बनाया। शोको के संप्रदाय को 1989 में औपचारिक मान्यता मिली। 30 हजार से अधिक समर्थक तो अकेले रूस में थे। इस पंथ का दावा था कि एक विश्व युद्ध में समूची दुनिया खत्म हो जाएगी। केवल उनके संप्रदाय के लोग ही जीवित बचेंगे।

2020: निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा

निर्भया की मां आशा देवी ने दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए कानूनी तौर पर संघर्ष किया। साथ ही नाबालिग दुष्कर्मी के खिलाफ भी अभियान चलाया। नतीजा यह हुआ कि देश में कानून बदला और अब गंभीर अपराध पर नाबालिग को भी वयस्कों जैसी सजा दी जा सकती है।

निर्भया की मां आशा देवी ने दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए कानूनी तौर पर संघर्ष किया। साथ ही नाबालिग दुष्कर्मी के खिलाफ भी अभियान चलाया। नतीजा यह हुआ कि देश में कानून बदला और अब गंभीर अपराध पर नाबालिग को भी वयस्कों जैसी सजा दी जा सकती है।

2012 के निर्भया गैंगरेप के दोषियों को 20 मार्च को ही फांसी पर चढ़ाया गया था। इन्हें बचाने के लिए अंतिम पलों तक कानूनी लड़ाई लड़ी गई। 19 मार्च को आधी रात के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम याचिका को खारिज किया, तब जाकर 20 मार्च को तड़के 5 बजकर 15 मिनट पर चारों दोषियों को फांसी पर चढ़ाया गया था। इन चार दोषियों के नाम थे- अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और मुकेश सिंह। यह पहली बार था, जब आजाद भारत में चार दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया गया। मामला 2012 का है, जब 23 वर्षीय पैरामेडिकल स्टूडेंट के साथ दिल्ली में छह लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था। छह आरोपियों में से एक नाबालिग था और उसे जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत तीन साल जुवेनाइल होम में रहने की सजा दी गई थी। एक अन्य आरोपी राम सिंह ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल में सुसाइड कर लिया था।

1615: उपनिषदों का फारसी में अनुवाद करवाने वाले मुगल शहजादे का जन्म

दारा शिकोह शाहजहां का सबसे बड़ा बेटा था। उसका जन्म 20 मार्च 1615 को हुआ था। पिता के बाद सिंहासन का वही उत्तराधिकारी था। लेकिन शाहजहां की बीमारी के बाद औरंगज़ेब ने अपने पिता दारा शिकोह को सिंहासन से हटाकर उसे आगरा में कैद कर दिया। 1959 में औरंगजेब ने दारा शिकोह की हत्या कर दी। दारा को उदार चरित्र का माना जाता है। उसने बनारस से पंडितों को बुलाया और उनकी मदद से हिन्दू धर्म के ‘उपनिषदों’ का फ़ारसी भाषा में अनुवाद कराया। उपनिषदों का यह फ़ारसी अनुवाद यूरोप तक पहुंचा और वहां उनका अनुवाद लैटिन भाषा में हुआ जिसने उपनिषदों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बनाया।

20 मार्च को देश-दुनिया में इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है-

  • 2010ः गोरैया को बचाने के लिए पहली बार ‘विश्व गोरैया दिवस’ मनाया गया।
  • 2003: इराक पर अमेरिका ने हमला शुरू किया।
  • 1987: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एड्स के इलाज के लिए पहली दवा एंटी एड्स दवा (AZT) को मंजूरी दी।
  • 1966: लंदन वेस्टमिनिस्टर के सेंट्रल हॉल में प्रदर्शनी के लिए रखा गया फुटबॉल वर्ल्ड कप चोरी हो गया।
  • 1956: फ्रांस से ट्यूनीशिया को आजादी मिली।
  • 1920: लंदन से दक्षिण अफ्रीका के बीच पहली उड़ान शुरू हुई।
  • 1916ः अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन की किताब जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटिवली का प्रकाशन हुआ।
  • 1727: महान गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिर्विद एवं दार्शनिक आइज़ैक न्यूटन का निधन हुआ।

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