उड़नतश्तरियों पर शोध करने वाले जेरेमी ने किए बड़े खुलासे: उड़नतश्तरियां अमेरिका के किसी खुफिया सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, इनके दूसरे लोक के होने का भी सबूत नहीं


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नई दिल्ली16 मिनट पहलेलेखक: दलजीत अमी

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(फाइल फोटो- जेरेमी कोर्बेल)

  • अमेरिका का मिलिट्री टास्क फोर्स 25 जून को उड़नतश्तरियों पर संसद में रिपोर्ट पेश करेगा

अमेरिका में मिलिट्री टास्क फोर्स 25 जून को अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट (यूएफओ) पर संसद में रिपोर्ट पेश करेगा। यही कारण है कि उड़नतश्तरियों में अचानक लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। उड़नतश्तरियों के बारे में सवाल रहा है कि क्या ये किसी दूसरे लोक के जीव हैं या उनके विमान हैं। कहीं ये दुश्मन देश के जासूसी तंत्र के ड्रोन जैसे औजार तो नहीं हैं।

यह दलील भी रही है कि ये अमेरिका के खुफिया सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा हैं। अब सूत्राें का कहना है कि अमेरिकी मिलिट्री टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में इन दावों को खारिज कर दिया है। उसने कहा है कि उड़नतश्तरियां अमेरिका के किसी खुफिया सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। इस बात के भी सबूत नहीं हैं कि ये किसी दूसरे लोक के जीवों के विमान हैं। हालांकि, अमेरिका कहता रहा है कि ये उड़नतश्तरियां चीनी या रूसी जासूसी विमान हो सकते हैं।

उड़नतश्तरियों पर शोध करने वाले फिल्मकार जेरेमी कोर्बेल मानते हैं कि अमेरिकी मिलिट्री टास्क फोर्स की रिपोर्ट में हर सवाल का जवाब तो नहीं मिलेगा। लेकिन कई बातें स्पष्ट हो जाएंगी। पिछले दिनों कोर्बेल ने कुछ वीडियो जारी किए थे। उनका दावा है कि ये अमेरिकी नौसेना के हाईडेफिनेशन कैमरे से रिकॉर्ड की गईं उड़नतश्तरियों की तस्वीरें हैं।

इसके बाद पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर तीन वीडियो जारी किए थे। ये 2018-2019 में रडार से रिकॉर्ड किए गए बताए गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इन अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनामिना (यूएपी) की बात कबूल की थी। कोर्बेल कहते हैं, ‘उड़नतश्तरियों की रफ्तार मौजूदा विमानों से बहुत ज्यादा है।

इनके रफ्तार पकड़ने और मुड़ने की चुस्ती बताती है कि इन पर गुरुत्वाकर्षण का असर नहीं होता। नए सबूत मिलने से उड़नतश्तरियों पर ज्यादा गंभीरता से बात की जा सकती है। अगर सभी देश इस मामले पर ध्यान दें तो ब्रह्माण्ड के बारे में लोगों को बेहतर समझ बनाने में मदद मिलेगी।’

‘कांस्पिरेसी थ्योरी’ मानने वालों ने झूठ बोलने का आरोप भी लगाया

कोर्बेल जॉर्ज नैप को गुरु मानते हैं। नैप ने 1989 में अमेरिकी खुफिया कार्यक्रम में काम करने वाले एक शख्स का इंटरव्यू किया था। जिसे बाद में बॉब लजार के नाम से पहचाना गया। ये कोर्बेल की फिल्म ‘बॉब लजार एरिया 51 एंड फ्लाइंग सॉसरज’ में मुख्य किरदार के तौर पर आया। तब भी उड़नतश्तरियों को ‘कांस्पिरेसी थ्योरी’ का हिस्सा मानने वाले लोग बॉब लजार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते थे।

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