एंटीलिया केस के बहाने शिवसेना का केंद्र पर निशाना: सामना में लिखा- महाराष्ट्र सरकार को बदनाम करने के लिए उरी और पठानकोट छोड़ सिर्फ 20 जिलेटिन छड़ों की जांच कर रही NIA


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मुंबई15 मिनट पहले

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इस मामले में जांच करते हुए NIA ने क्राइम ब्रांच के सस्पेंडेड अधिकारी सचिन वझे को अरेस्ट किया है।

एंटीलिया के बाहर से विस्फोटक मिलने के मामले में शिवसेना ने ‘सामना’ के जरिए NIA और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। सामना में लिखा गया है कि लिखा है कि जब इस मामले की जांच ATS कर रही थी, तो महाराष्ट्र सरकार को बदनाम करने के लिए केंद्र ने इसे आनन-फानन में NIA को दे दिया। संपादकीय में शिवसेना ने मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह का बचाव भी किया है।

NIA पर शिवसेना का सवाल
सामना की शुक्रवार की संपादकीय में लिखा है कि आतंकवाद का मामला नहीं ना होना और फिर भी NIA का जांच करना आखिर ये क्या मामला है? आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने वाली NIA जिलेटिन की छड़ों की जांच कर रही है पर उरी, पुलवामा, पठानकोट हमलों की जांच का क्या?

BJP को मनसुख हिरेन की मौत का ज्यादा दुख
मनसुख हिरेन की मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शिवसेना ने लिखा है,’इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय राज्य का विपक्ष ले रहा है। मनसुख हिरेन की मौत का दुख सभी को है, मगर BJP को थोड़ा ज्यादा है। मगर सुशांत सिंह, मोहन डेलकर और तमाम मुद्दों पर विपक्ष चुप है।’

परमबीर सिंह का बचाव किया
शिवसेना ने मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर का बचाव करते हुए लिखा है,’परमबीर सिंह को हटाना ये साबित नहीं करता कि वो गुनाहगार हैं। बेहद कठिन परिस्थिति में उन्होंने ये पद संभाला था। दिल्ली में बैठी एक विशिष्ट लॉबी का परमबीर पर गुस्सा था क्यूंकि वो महत्वपूर्ण काम कर रहे थे। नए पुलिस कमिश्नर को साहस और सावधानी से काम करना होगा।’ संपादकीय में परमबीर सिंह द्वारा कोरोना संकट काल में किए कामों की सराहना भी की गई है।

सामना की पूरी संपादकीय

  • मुंबई के कारमाइकल रोड पर एक कार मिली थी, जिसमें जिलेटिन की 20 छड़ें रखी हुई थीं। उन छड़ों में विस्फोट नहीं हुआ परंतु राजनीति और प्रशासन में बीते कुछ दिनों से ये छड़ें धमाके कर रही हैं। इस पूरे मामले में अब मुंबई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह को उनके पद से जाना पड़ा है। राज्य के पुलिस महासंचालक रहे हेमंत नगराले अब मुंबई पुलिस के नए आयुक्त बन गए हैं, तो वहीं रजनीश सेठ को पुलिस महासंचालक नियुक्त किया गया है। जिसे हम सामान्य बदली कहते हैं ये वैसी बदली नहीं है। एक विशिष्ट परिस्थिति में सरकार को ये उथल-पुथल करनी पड़ी है। नए पुलिस आयुक्त नगराले ने तुरंत कहा है कि ‘पुलिस ने पहले जो गलतियां हुई हैं वो दोबारा नहीं होंगी। पुलिस की छवि को संभाला जाएगा।’ नगराले का बयान महत्वपूर्ण है।
  • मुकेश अंबानी के घर के आसपास मिली संदेहास्पद कार व उसके बाद कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मिली लाश का मामला निश्चित तौर पर चिंताजनक है। विपक्ष ने इस मामले में कुछ सवाल खड़े किए हैं ये सच है। परंतु राज्य का आतंक निरोधी दस्ता इस मामले में हत्या का मामला दर्ज करके जांच कर रहा था। इसी दौरान NIA ने आनन-फानन में जांच की कमान अपने हाथ में ले ली। महाराष्ट्र सरकार को किसी तरह से बदनाम कर सकें तो देखें, इसके अलावा कोई और ‘नेक मकसद’ इसके पीछे नहीं हो सकता है।
  • क्राइम ब्रांच के एक सहायक पुलिस निरीक्षक के इर्द-गिर्द यह मामला घूम रहा है और इसके पीछे का मकसद जल्द ही सामने आएगा। किसी भी हाल में इसके पीछे आतंकवाद के तार न जुड़ने के बावजूद इस अपराध की जांच में ‘NIA’ का घुसना, ये क्या मामला है? आतंकवाद से संबंधित प्रकरणों की जांच ‘NIA’ करती है। परंतु जिलेटिन की छड़ों की जांच करनेवाली ‘NIA’ ने उरी हमला, पठानकोट हमला व पुलवामा हमले में क्या जांच की, कौन-सा सत्यशोधन किया, कितने गुनहगारों को गिरफ्तार किया? ये भी रहस्य ही है। लेकिन मुंबई में 20 जिलेटिन की छड़ें ‘NIA’ के लिए बड़ी चुनौती ही सिद्ध होती नजर आ रही है।
  • इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय राज्य का विपक्ष ले रहा है। हिरासत में आए पुलिस अधिकारी वाझे के पीछे वास्तविक सूत्रधार कौन है? आदि सवाल उन्होंने पूछा है। मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत हो गई और इसके लिए सभी को दुख है। भारतीय जनता पार्टी को थोड़ा ज्यादा ही दुख हुआ है। परंतु इसी पार्टी के एक सांसद रामस्वरूप शर्मा की संसद का अधिवेशन शुरू रहने के दौरान दिल्ली में संदिग्ध मौत हो गई। शर्मा प्रखर हिंदुत्ववादी विचारों वाले थे। उनकी संदिग्ध मौत के बारे में भाजपा वाले छाती पीटते नजर नहीं आ रहे हैं।
  • मोहन डेलकर की खुदकुशी के मामले में तो कोई ‘एक शब्द’ भी बोलने को तैयार नहीं है। सुशांत सिंह राजपूत और उसके परिजनों को तो सभी भूल गए हैं। किसी की मौत का निवेश कैसे किया जाए, यह वर्तमान विपक्ष से सीखना चाहिए। मुंबई पुलिस का मनोबल गिराने का प्रयास इस दौर में चल रहा है। विपक्ष को कम-से-कम इतना पाप तो नहीं करना चाहिए। विपक्ष ने महाराष्ट्र की सत्ता में काबिज होने का सपना पाला होगा तो यह उनकी समस्या है। परंतु ऐसी शरारत करने से उन्हें सत्ता की कुर्सी मिल जाएगी ये भ्रम है।
  • पुलिस जैसी संस्था राज्य की रीढ़ होती है। उसकी प्रतिष्ठा का सभी को जतन करना चाहिए। विपक्ष महाराष्ट्र के प्रति निष्ठावान होगा तो वह पुलिस की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर राजनीति नहीं करेगा। मनसुख प्रकरण के पीछे का पॉलिटिकल बॉस कौन? यह उनका सवाल है। इसका जवाब उन्हें ही ढूंढ़ना चाहिए। परंतु ऐसे प्रकरणों में कोई भी पॉलिटिकल बॉस नहीं होता है। महाराष्ट्र की यह परंपरा नहीं है। मनसुख की हत्या हुई होगी तो अपराधी बचेंगे नहीं। उन्होंने आत्महत्या की होगी तो उसके पीछे का कारण ढूंढ़ा जाएगा और उसी के लिए मुंबई सहित राज्य के पुलिस बल में भारी फेरबदल किया गया है। विपक्ष को इसका विश्वास रखना चाहिए।
  • मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से परमवीर सिंह को बदल दिया गया इसका मतलब वे गुनहगार सिद्ध नहीं होते। मुंबई पुलिस आयुक्त पद की कमान उन्होंने अत्यंत कठिन समय में संभाली थी। कोरोना संकट से लड़ने के लिए उन्होंने पुलिस में जोश निर्माण किया था। धारावी जैसे क्षेत्र में वे खुद जाते रहे। सुशांत, कंगना जैसे प्रकरणों में उन्होंने पुलिस का मनोबल टूटने नहीं दिया। इसलिए आगे इस प्रकरण में CBI आई तो भी मुंबई पुलिस की जांच CBI के पास नहीं जा सकी। TRP घोटाले की फाइल उन्हीं के समय में खोली गई। परमवीर सिंह पर दिल्ली की एक विशिष्ट लॉबी का गुस्सा था, जो कि इसी वजह से था। उनके हाथ में जिलेटिन की २० छड़ें पड़ गईं। उन छड़ों में धमाका हुए बगैर ही पुलिस दल में दहशत फैल गई। नए आयुक्त हेमंत नगराले को साहस व सावधानी से काम करना होगा।

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