एंटीलिया केस में नया खुलासा: सचिन वझे ही स्कॉर्पियो को एस्कॉर्ट करके एंटीलिया के बाहर तक ले गया था, PPE किट में नजर आने वाला शख्स भी वझे ही था


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मुंबई21 मिनट पहले

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25 मार्च की यह CCTV फुटेज एंटीलिया से कुछ दूरी पर लगे CCTV कैमरे की है। दावा किया जा रहा है कि इसमें नजर आने वाला शख्स सचिन वझे ही है।

निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे ने विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो को एस्कॉर्ट करने के लिए अपने ही सरकारी इनोवा गाड़ी का इस्तेमाल किया था और खुद 25 फरवरी को ‘क्राइम सीन’ तक गए थे। इस बात का खुलासा हिरासत की मांग वाली याचिका में नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी(एनआईए) ने किया है।

सूत्रों के मुताबिक, NIA की पूछताछ में यह सामने आया है कि सीसीटीवी फुटेज में PPE किट पहने नजर आने वाला शख्स सचिन वझे है। केंद्रीय जांच एजेंसी को यह सबूत मिला है कि PPE किट को वझे ने नष्ट कर दिया था। किट के भीतर वझे ने जो कपड़े पहने थे, उसे एक मर्सडीज कार से बरामद कर लिया गया है।

वझे का करीबी चला रहा था इनोवा कार

एनआईए सूत्रों ने बताया कि वह सचिन वझे ही था जो इनोवा को ड्राइव करके स्कॉर्पियो के पीछे-पीछे उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास तक गए थे। इनोवा के सरकारी ड्राइवर ने NIA को बताया कि 24 फरवरी को उसकी ड्यूटी खत्म होने के बाद उसने इनोवा को पुलिस मुख्यालय के अंदर खड़ा किया और घर चला गया। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि वहां से कार को लेकर कौन गया था। रजिस्टरों पर वाहन की आवाजाही की कोई एंट्री नहीं की गई थी। आधिकारिक मानदंडों के अनुसार, सरकारी वाहन के निकास और प्रवेश को एक रजिस्टर में लॉग इन करना होता है, जब भी यह कार्यालय के अंदर और बाहर जाता है। एनआईए को संदेह है कि स्कॉर्पियो को वझे का एक करीबी कॉन्स्टेबल ही चला रहा था।

PPE किट में सचिन वझे के होने का संदेह
सूत्रों के मुताबिक, एनआईए को यह सबूत मिले हैं कि PPE किट पहने स्कॉर्पियो के पास नजर आने वाला शख्स सचिन वझे ही था। CIU में कार्यरत एक सरकारी ड्राइवर ने इसकी पुष्टि भी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी फ़ॉरेंसिक पोडियाट्री तकनीक का इस्तेमाल करके अपने दावे को पुख्ता कर रहे है। इसमें संदिग्ध की पहचान करने के लिए एक पैरों के निशान और चलने के पैटर्न का अध्ययन किया जाता है। यदि यह परीक्षण मौके पर वाजे की उपस्थिति की पुष्टि करता है, तो इस मामले की तह खुलने में मदद मिलेगी।

NIA की जांच में सामने आया है इसी कार में आखिरी बार मनसुख हिरेन और सचिन वझे मिले थे।

NIA की जांच में सामने आया है इसी कार में आखिरी बार मनसुख हिरेन और सचिन वझे मिले थे।

केस में मर्सिडीज की हुई एंट्री, कई सबूत हाथ लगे
इस बीच मंगलवार रात एनआईए ने वझे द्वारा इस्तेमाल की जा रही मर्सिडीज कार को जब्त कर उसमें से 5 लाख कैश, नोट गिनने वाली मशीन, कुछ दस्तावेज, कपड़े, एंटीलिया के बाहर से बरामद स्कॉर्पियों कार की असली नंबर प्लेट, केरोसिन और बीयर की बोतलें जब्त की है। माना जा रहा है कि केरोसिन इस इस्तेमाल PPE किट को जलाने के लिए किया गया था।

कार में फर्जी नंबर प्लेट लगा था, जैसा कि स्कॉर्पियो और इनोवा के साथ हुआ था। एनआईए के आईजी अनिल शुक्ला ने इस बात की पुष्टि की है कि सचिन वझे ही मर्सिडीज कार का इस्तेमाल कर रहे थे। फिलहाल कार की फॉरेंसिक जांच जारी है।

वझे के आईपैड और फोन से डिलीट डाटा को रिकवर किया जा रहा
NIA के अधिकारियों ने सोमवार रात पुलिस मुख्यालय में स्थित क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट ऑफिस की तलाशी ली और एक सीपीयू, वझे का आई-पैड, फोन और कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। NIA की टीम फोन और आईपैड को क्लोन कर इसका डिलीट डाटा रिकवर करने का काम कर रही है। सूत्रों ने कहा कि API रियाजुद्दीन काजी द्वारा 27 फरवरी को वझे की हाउसिंग सोसायटी से बाहर किए गए डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर की जब्ती का कोई रिकॉर्ड CIU के पास नहीं है। यह तलाशी सोमवार शाम करीब आठ बजे शुरू हुई और मंगलवार सुबह चार बजे तक चलती रही।

गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली अर्जी हुई खारिज

इस बीच मंगलवार को मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट ने सचिन वझे की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने एजेंसी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया था। सचिन वझे के वकीलों सजल यादव और सनी पुनमिया ने दलील दी कि नियमानुसार वाजे को गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर अदालत में पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 45(1) के तहत राज्य सरकार से कोई अनुमति नहीं ली गई। धारा 45(1) के तहत अगर किसी सरकारी अधिकारी को उसके ड्यूटी के तहत किए गए कार्य के लिए गिरफ्तार करना हो तो सरकार की मंजूरी लेनी होती है।

अदालत में सुनवाई के दौरान यह हुआ

विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वाजे को शनिवार की रात 11 बजकर 50 मिनट पर गिरफ्तार किया गया और अगले दिन दोपहर 2:45 पर अदालत में पेश किया गया। अभियोजक ने दावा किया कि वाजे को जांच से जुड़े स्पष्टीकरण के लिए सुबह बुलाया गया था लेकिन वह देर रात आये। वहीं वाजे के वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्हें शनिवार की सुबह 11 बजे गिरफ्तार किया गया। एनआईए के वकील ने बताया कि सरकार से अनुमति की जरुरत नहीं थी क्योंकि वाजे ने अपनी आधिकारिक ड्यूटी के तहत यह काम नहीं किया था।

न्यायाधीश पी. आर. सित्रे ने वाजे की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी होने के नाते उन्हें अपने अधिकार पता थे। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘थाने के रोजनामचे में की गई एंट्री से स्पष्ट है कि आरोपी और संबंधित थाने को सूचना दी गई थी और उनकी गिरफ्तारी की सूचना भी थी, इसका तात्पर्य है कि गिरफ्तारी का आधार बताया गया था।’’ अदालत ने कहा कि उन्होंने ड्यूटी के तहत ऐसा किया है या नहीं यह सुनवाई के दौरान तय किया जा सकता है।

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