एंटीलिया केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होने पर परमबीर सिंह बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे; गृह मंत्री के खिलाफ वसूली के आरोपों की जांच की मांग


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मुंबई14 मिनट पहले

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महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर हर महीने 100 करोड़ रुपए वसूली करवाने के आरोप की CBI से जांच करवाने की मांग को लेकर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने गुरुवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है।

वर्तमान में होमगार्ड के DG परमबीर ने कोर्ट से मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से खुद को ट्रांसफर किए जाने की अधिसूचना पर भी रोक लगाए जाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने को कहा था
इससे पहले परमबीर सिंह ने बुधवार को दोनों मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए उनहें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे रहे हैं। कोर्ट ने परमबीर के वकील मुकुल रोहतगी से कहा था कि आप लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आ गए? अनिल देशमुख को पार्टी क्यों नहीं बनाया? रोहतगी ने इस पर संशोधित आवेदन दाखिल करने की बात कही। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की भी अपनी शक्तियां हैं आपको पहले वहां जाना चाहिए।

याचिका में परमबीर सिंह ने क्या आरोप लगाए?
परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक रखने के लिए गिरफ्तार पुलिस अधिकारी सचिन वझे सीधा गृहमंत्री देशमुख के संपर्क में था। देशमुख ने फरवरी में अपने घर पर वाजे से मीटिंग की थी। देशमुख ने वझे को हर महीने 100 करोड़ रुपए की उगाही करने को कहा था। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इस सच्चाई को सामने लाने के लिए अनिल देशमुख के घर का सीसीटीवी फुटेज जल्द जब्त किया जाए, वर्ना वो इस महत्वपूर्ण सबूत को मिटा सकते हैं।

परमबीर सिंह का कहना है कि उन्होंने अनिल देशमुख के जूनियर पुलिस अधिकारियों से सीधे मिलने और उनसे वसूली के लिए कहने की जानकारी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और दूसरे वरिष्ठ नेताओं को दी थी। इसके तुरंत बाद उन्हें पुलिस कमिश्नर पद से हटाकर डीजी होमगार्ड के पद पर भेज दिया गया।

स्टेट इंटेलिजेंस कमिश्नर ने ट्रांसफर-पोस्टिंग में लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप
इस याचिका में यह भी दावा किया गया था कि अनिल देशमुख गृह मंत्री के पद पर रहते लगातार गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे। अगस्त 2020 में एक फोन इंटरसेप्ट के जरिए स्टेट इंटेलिजेंस की कमिश्नर रश्मि शुक्ला को पता चला कि देशमुख ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार कर रहे हैं। उन्होंने इसकी जानकारी DGP और गृह विभाग के एडिशनल सेक्रेट्री को दी थी। हालांकि, बाद में उन्हें पद से अलग कर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया।

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