एंटीलिया विस्फोटक केस: सचिन वझे गिरफ्तारी के विरोध में हाईकोर्ट पहुंचे, सामना में शिवसेना का केंद्र पर निशाना, कहा-पिछला हिसाब किया चुकता


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मुंबई4 मिनट पहले

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सचिन वझे की यह तस्वीर रविवार की है, जब उन्हें अदालत से एनआईए ऑफिस ले जाया जा रहा था।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर से बरामद जिलेटिन की छड़ों से भरी स्कॉर्पियो मामले में गिरफ्तार हुए मुंबई पुलिस के अस्सिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। वझे के वकील सनी पुनमिया द्वारा दायर इस याचिका में वझे की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए कहा गया है कि उनके खिलाफ बिना सबूत के कार्रवाई की गई है।

याचिका में कहा गया है, “उनकी गिरफ्तारी अवैध हैं। सिर्फ शक के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। NIA ने गिरफ्तार करते वक्त नियमों का पालन नहीं किया।” हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मामले में सुनवाई कब होगी।

सचिन के बहाने शिवसेना का केंद्र पर निशाना
इस बीच शिवसेना ने सचिन वझे की गिरफ्तारी के बहाने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र सामना में शिवसेना ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है।

सामना में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार ने वझे का ट्रांसफर करके पूरे मामले की जांच राज्य आतंकवादी निरोधी दस्ते (ATS) को सौंपी थी। इस मामले की जांच चल ही रही थी कि केंद्र सरकार ने NIA को जांच के लिए भेज दिया। इतनी जल्दी इसकी आवश्यकता नहीं थी। महाराष्ट्र के किसी मामले में टांग अड़ाने का मौका मिले तो केंद्र की जांच एजेंसियां भला पीछे क्यों रहें?

भाजपा ने अर्नब का लिया बदला
संपादकीय में आगे कहा गया है कि जांच NIA ने अपने हाथ में लेकर तुरंत वझे को गिरफ्तार कर अपना कर्तव्य पूरा कर दिखाया है। वाजे की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी को जो आनंद मिला है, उसका वर्णन करने में शब्द कम पड़ जाएंगे। कुछ महीने पहले वाजे ने रायगढ़ पुलिस की मदद से बीजेपी के महंत अर्नब गोस्वामी को अन्वय नाईक आत्महत्या मामले में हथकड़ियां लगाई थीं। उस समय ये लोग गोस्वामी का नाम लेकर रो रहे थे और वझे को श्राप दे रहे थे और कह रहे थे ‘रुकिये, देख लेंगे, केंद्र में हमारी ही सत्ता है।’ वो मौका अब साध लिया गया है। बीस जिलेटिन छड़ों के मामले में वझे को केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है।

40 जवानों की बलि किसने ली?
अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार कर उसे जेल भेजने से वझे भाजपा और केंद्र की हिटलिस्ट पर थे। मुंबई पुलिस की जांच पूरी होने तक केंद्रीय दस्ता रुकने को तैयार नहीं था। कश्मीर घाटी में आज भी विस्फोटकों का जखीरा मिल रहा है, लेकिन यह एनआईए का दस्ता वहां गया क्या? पुलवामा में विस्फोटकों का जखीरा कहां से अंदर घुसाया गया और उस विस्फोट में हमारे 40 जवानों की बलि कैसे गई? ये आज भी रहस्य ही है!

सीबीआई पर भी उठाए सवाल
सामना में आगे लिखा गया है कि केंद्र ओर से विपक्ष की सरकारों को अस्थिर या बदनाम करने के लिए किसी भी स्तर पर जाना, फर्जी मामले बनाना, राज्य सरकार के अधिकारों पर अतिक्रमण करना बेझिझक चल रहे है। सुशांत मामले में मुंबई पुलिस ने बेहतरीन जांच की, फिर भी केंद्र ने सीबीआई को इस मामले में घुसाया। सीबीआई ने भी कौन से दीये जलाए? वो भी हाथ मलते रह गए। कंगना रनोट ने गैरकानूनी काम किए फिर भी केंद्र सरकार और बीजेपी उसके समर्थन में खड़े रहे।

पिछला-हिसाब किया चुकता
बिहार-नेपाल सीमा पर हथियार, विस्फोटकों की आवाजाही जारी ही रहती है। मणिपुर-म्यांमार सीमा पर स्थिति इस मामले में गंभीर ही रहती है। नक्सली क्षेत्रों में तो बंदूक, विस्फोटकों के कारखाने ही बन गए हैं, वहां देशविरोधी षड्यंत्र शुरू हैं, लेकिन NIA सिर्फ महाराष्ट्र में ही आती है। इससे ये स्पष्ट हो गया है कि NIA का इस तरह से आना, ये पिछला-हिसाब चुकता करने के लिए ही था।

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