एक बार खड़ी हुई असमंजस की स्थिति: निकिता तोमर के हत्यारों को सजा सुनाने से 18 घंटे पहले जस्टिस बासवाना का तबादला


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चंडीगढ़/फरीदाबादएक मिनट पहले

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बल्ल्भगढ़ की B-Com की छात्रा निकिता की फाइल फोटो और उसकी हत्या के मामले से जुड़ी जानकारी।

फरीदाबाद के बहुचर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में शुक्रवार को दोषियों को सजा सुनाने वाले जज का फ़रीदाबाद रेवाड़ी तबादला कर दिया गया है। सरताज बासवाना के ट्रांसफर का फैसला ठीक उस वक्त सामने आया, जब साढ़े 3 महीने से भी ज्यादा लंबे समय तक तमाम गवाहों और सबूतों का मद्देनजर रखते हुए दोषियों को वह सजा सुनाने वाले थे। इसको लेकर एक बार तो असमंजस की स्थिति बन गई, लेकिन आखिर तय हुआ कि सुने गए केस पर फैसला बासवाना की कलम से दिया जाएगा। हालांकि ऐसा पहले जोधपुर में सलमान खान की जमानत याचिका के मामले में भी हो चुका है।

बता दें कि बीती 26 अक्टूबर 2020 को बल्लभगढ़ में पेपर देकर निकली अग्रवाल कॉलेज की B-Com की छात्रा निकिता तोमर की अपहरण की कोशिश में रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते मेवात जिले के रोजका मेव निवासी तौसीफ और उसके साथी रेहान ने हत्या कर दी थी। बुधवार 24 मार्च को आरोपियों तौसीफ, रेहान और अजहरुद्दीन को फास्ट ट्रैक कोर्ट में शाम 4 चार बजे पेश किया गया था। उस दिन सुने गए मामलों में इसे सबसे आखिर में रखा गया। फिर सबसे पहले आरोपियों को तमंचा उपलब्ध कराने वाले अजहरुदीन को बरी कर दिया गया। साथ ही उससे CRPC की धारा 346 के तहत बेल बॉन्ड भरवाया गया। इसके बाद 12 मिनट में ही जस्टिस सरताज बासवाना की कोर्ट ने फैसला सुना दिया था। सजा के लिए शुक्रवार 26 मार्च का दिन निर्धारित किया गया था, लेकिन इससे ठीक 18 घंटे पहले ग़ुरुवार को जस्टिस बासवाना का तबादला फरीदाबाद से रेवाड़ी कर दिया गया। जज का तबादला होने के बाद शुक्रवार को फैसला सुनाया जाएगा या नहीं इसपर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि यह घड़ी ज्यादा दूर नहीं है। इस मामले में करीब 55 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।

ट्रांसफर के बाद संबंधित जज के विवेक पर निर्भर करता है फैसला
अगर किसी जज का किसी मामले में सुनवाई पूरी हो जाने के बाद तबादला हो जाए और फैसला आना बाकी हो तो नियमों के मुताबिक ऐसी स्थिति में भी वह फैसल दे सकते हैं। हालांकि यह जज के अपने विवके पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में जज ट्रांसफर के बाद फैसला दे दते हैं तो कुछ में ऐसा नहीं भी होता। कानूनविद डॉ. जोगेंद्र मोर और अन्य का कहना है कि जज का कार्यक्षेेऋ सरकार नहीं, बल्कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर तय होता है।

सलमान खान के मामले में भी ऐसा ही हुआ था…
ऐसा चिंकारा शिकार मामले में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की जमानत पर सुनवाई करने वाले जोधपुर के डिस्ट्रक्ट जज रविंद्र कुमार जोशी का फैसले से कुछ ही वक्त पहले ताबदला हो गया।

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