करगिल युद्ध का रिक्रिएशन: लगातार फायरिंग के बीच हमारे जवान 17 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़े; काउंटर अटैक करते हुए खदेड़ दिया पाकिस्तानी फौज को


झूंझनू3 घंटे पहले

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वीर चक्र विजेता जयरामसिंह और एनडीए की तैयारी कर रहे युवाओं की मदद से उस युद्ध के यादगार लम्हाें काे रिक्रिएट किया है। ये दृश्य 3100 फीट ऊंचे हर्ष पर्वत पर रिक्रिएट किए।

  • पहली बार ऐसा प्रयाेग; विजय दिवस के अवसर पर वीर चक्र विजेता जयरामसिंह और एनडीए की तैयारी कर रहे युवाओं ने 3100 फीट ऊंचे हर्ष पर्वत पर रिक्रिएट किया युद्ध के यादगार लम्हों को

करगिल युद्ध काे 22 साल पूरे हाे चुके हैं। उस वक्त 17 हजार फीट की ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को मार गिराते हुए हमारे वीर जवानों ने तोलोलिंग और टाइगर हिल की चौकियों पर कब्जा जमाया था। इस युद्ध में 527 जवान शहीद हुए थे। इनमें झुंझुनूं के 19, सीकर व चूरू जिले के 7-7 जवान शामिल थे।

भास्कर ने इन्हीं वीराें काे श्रद्धांजलि देने के लिए करगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष प्रयाेग किया है। वीर चक्र विजेता जयरामसिंह और एनडीए की तैयारी कर रहे युवाओं की मदद से उस युद्ध के यादगार लम्हाें काे रिक्रिएट किया है। ये दृश्य 3100 फीट ऊंचे हर्ष पर्वत पर रिक्रिएट किए।

ये प्रयोग इसलिए

ताकि आज के युवा जान सकें कि करगिल में हमारे जवानों ने कई परेशानियों के बावजूद जमकर मोर्चा संभाला और पाकिस्तान को हराया था। भास्कर चाहता है कि ऐसे यादगार किस्सों से युवाओं में देश सेवा का जज्बा बढ़े।

इन दृश्यों से समझें 1999 के युद्ध में कैसे हावी हो गई थी भारतीय सेना

17 हजार फीट ऊंची तोलोलिंग पहाड़ी पर कब्जा जमाए बैठे दुश्मन हाईवे पर गोलीबारी कर रहे थे। आशंका थी कि आतंकी होंगे, लेकिन आर्टिलरी फायर से साबित हो रहा था कि वहां पाक सेना कब्जा कर चुकी है। हालात ऐसे थे कि हम दुश्मन का एक आदमी मारते तो हमें 10 जवानों का नुकसान होना तय था।

इसे हमारे जवानों ने स्वीकारा और खड़ी पहाड़ियाें पर चढ़ाई करते हुए दुश्मन को मार गिराया। 2-राजपूताना राइफल्स की टुकड़ी 26 मई को सोनामार्ग पहुंची। यहां चार दिन ट्रेनिंग के बाद सूचना मिली कि दुश्मनों ने हमारे दो लड़ाकू विमान गिरा दिए हैं। टू-राजपूताना राइफल्स को तोलोलिंग जाने का टास्क मिलते ही उसने पहाड़ी पर चढ़ाई शुरू कर दी।

12 जून 1999 को भारतीय फौज तोलोलिंग की पहाड़ियों पर 16 हजार फीट ऊंचाई तक पहुंच चुकी थी। भारतीय फौज की चार में से दो कंपनियां रिजर्व फायर दे रही थी। इसी दौरान पाकिस्तानी आर्मी ने हमला तेज कर दिया। इसी संघर्ष में कंपनी कमांडर मेजर विवेक गुप्ता सहित 10 जवान शहीद हो गए।

हमारे जवान आर्टिलरी फायर की मदद से दौड़ते हुए दुश्मन के बहुत नजदीक पहुंच गए। यहां 5-10 मीटर दूरी के फासले पर दोनों तरफ से आमने-सामने जमकर गोलाबारी हुई। हमारे जवानों ने दुश्मन को मार गिराया। आखिरकार 13 जून को कंपनी टूआईसी कैप्टन बीएस ताेमर की मौजूदगी में तोलोलिंग की चोटी पर सुबह चार बजे तिरंगा फहरा दिया।

28 जून को राजपूताना राइफल्स को थ्री पिंपल रिज को कैप्चर करने का दूसरा टास्क मिला। डेल्टा कंपनी का दूसरी टुकड़ियाें से संपर्क टूट गया। दुर्गम पहाड़ों पर यह असाधारण और सबसे बड़ी चुनौती थी। एक-एक मिनट कीमती थी।

बिना समय गंवाए नाले में उतरकर वीर चक्र विजेता जयराम रेडियो सेट वापस लेकर आए और कमांडिंग ऑफिसर से संपर्क साधा। तब तक तीन अफसरों सहित 14 जवान शहीद हो चुके थे। बचे हुए जवानों ने जमकर मुकाबला किया। 26 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। कुछ मैदान छोड़कर भाग गए। सुबह 4 बजे भारतीय फौज ने 17 हजार फीट ऊंचाई पर थ्री पिंपल रिज पर तिरंगा फहरा दिया।

स्क्रिप्ट और आइडिएशन : टीम दैनिक भास्कर।

फोटो : विशाल सैनी

युद्ध का विवरण : डाबला निवासी नायक जयराम ( करगिल युद्ध में वीर चक्र विजेता)

क्रिएशन टीम : प्रिंस एजुकेशन हब के डाॅ. पीयूष सुंडा और वहां एनडीए की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स।

ऐसे तैयार हुआ शेखावाटी की माटी से मास्टहेड

स्काउट गाइड कार्यालय में मिट्‌टी को तराश कर दैनिक भास्कर का मास्ट हेड तैयार करते स्काउट गाइड।

स्काउट गाइड कार्यालय में मिट्‌टी को तराश कर दैनिक भास्कर का मास्ट हेड तैयार करते स्काउट गाइड।

शेखावाटी की माटी में साहस पलता है। इस माटी में खेलते खेलते युवाओं का शरीर तपता है और वज्र सा बनता है। जिसके सामने दुश्मन कभी नहीं टिक पाया। कारगिल दिवस पर दैनिक भास्कर ने इसी माटी से अपना मास्टहेड बनाया है।

नंगली गुजरान के शहीद खड़गसिंह के घर से कलश में मिट्‌टी भरती शहीद की मां व वीरांगना।

नंगली गुजरान के शहीद खड़गसिंह के घर से कलश में मिट्‌टी भरती शहीद की मां व वीरांगना।

भास्कर के 8 संवादादाता करगिल के सभी शहीदों के घर पहुंचे और उनके परिजनों से घर आंगन की मिट्‌टी का कलश लिया। इसके बाद यह मिट्‌टी झुंझुनूं लाई गई।

मिट्‌टी काे स्काउट गाइड कार्यालय में एक जगह एकत्रित किया गया और इस धरती की माटी के साथ मिलाया गया। इसके बाद स्काउट सीओ महेश कलावत और गाइड सीओ सुभिता महला के सहयोग से साढ़े चार फीट चौड़ाई और 27 फीट लंबाई में आधा फीट ऊंची मिट्‌टी की परत बनाई गई। जिस पर यह मास्टहेड तैयार हुआ।

यह मिट्‌टी शहीद सूबेदार हरफूल सिंह, सिपाही विजयपाल, लांस नायक दशरथ कुमार यादव, हवलदार शिशपाल गिल, नायक रामस्वरुप, हवलदार मनीराम महला, सिपाही रणवीर सिंह, सूबेदार श्रीपाल सिंह शेखावत, सिपाही हवासिंह, लांस नायक जगदीश सिंह, लांस लायक खड्ग सिह, रायफल मैन कंवरपाल सिंह, लांस नायक बस्तीराम, सिपाही नरेश कुमार, गर्नर राजकुमार, सिपाही कृष्ण कुमार, सिपाही भगवान सिंह, सिपाही शीशराम और सिपाही सुरेश सिंह।

इस माटी से तैयार होगी करगिल क्यारी

दैनिक भास्कर की प्रेरणा से स्काउट गाइड कार्यालय में इस माटी से करगिल क्यारी तैयार की जाएगी। जिसमें विभिन्न पौधे लगाएं जाएंगे।

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