कामधेनु विवि: एजेंसी को टर्मिनेट किया, फिर बिना असेसमेंट किए पूरा भुगतान भी कर दिया


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भिलाई14 घंटे पहले

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  • विभागीय मंत्री रवींद्र चौबे से लेकर कुलपति डॉ. एनपी दक्षिणकर से शिकायत, नहीं हुई कोई कार्रवाई, तत्कालीन ईई ने पेनल्टी लगाया पर उसकी भी नहीं की वसूली

कामधेनु विवि अंजोरा एक बार फिर चर्चा में है। इस बार भी निर्माण कार्यों व उनके भुगतान में गड़बड़ी को लेकर यूनिवर्सिटी प्रबंधन चर्चा में आया है। यहां करीब 1.98 करोड़ रुपए की लागत से कुलपति बंगला और स्टाफ क्वार्टर का कार्य स्वीकृत किया गया। कार्य एजेंसी मनोज अग्रवाल तय की गई। एजेंसी ने बीच में ही काम छोड़ दिया। बावजूद इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा कार्य एजेंसी को हुए कार्य से अधिक का भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं जब अनियमितता सामने आई तो करीब 12.805 लाख रुपए की पेनल्टी भी लगाई गई, इसकी भी वसूली किए बिना एजेंसी द्वारा जमा की गई सुरक्षा निधि करीब साढ़े 6 लाख रुपए का भी भुगतान कर दिया गया। आरटीआई से मिले दस्तावेजों में इसका खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद मामले को लेकर विभागीय मंत्री रवींद्र चौबे, कुलपति डॉ. एनपी दक्षिणकर सहित अन्य को शिकायत भी हुई। अब तक मामले में जांच आगे नहीं बढ़ी।

9 साल पहले अस्तित्व में आया यह विश्वविद्यालय, तब से ही चर्चा में रहा
वर्ष 2012 में कामधेनु विवि की स्थापना हुई। इसके बाद से यहां के प्रबंधन की कार्यप्रणाली चर्चा में रही। अंजोरा में कुलपति बंगला और स्टाफ क्वार्टर बनाने के निविदा बुलाई गई। निविदा मेसर्स मनोज अग्रवाल के नाम से निकली। काम 9 दिसंबर 2017 को पूरा होना था, लेकिन 8 मई 2019 को काम अधूरा छोड़ दिया गया। एस व जी टाइप के स्टॉफ क्वार्टर का 95 % व बंगले में 20% काम ही हुआ।

अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं शिकायत के बाद भी जांच नहीं हुई
कार्य में करीब 73 सप्ताह की देरी की गई। इसी आधार पर ठेकेदार पर 12.80 लाख की पेनल्टी तत्कालीन ईई एसके अग्रवाल ने निकाली। एजेंसी ने इसका भुगतान नहीं किया। वह कोर्ट चला गया, जहां से कोर्ट ने नियमत: असेसमेंट बाद बिल भुगतान का आदेश कर दिया। यूनिवर्सिटी में अन्य अनियमितता भी सामने आईं, लेकिन उन मामलों में अब तक जांच आगे नहीं बढ़ पाई है।

कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर प्रबंधन ने कर दिया था भुगतान
कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर यूनिवर्सिटी ने कार्य एजेंसी को भुगतान कर दिया। जबकि एजेंसी से पेनल्टी की वसूली होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उल्टा जमा सुरक्षा निधि भी पिछले दिनों जारी कर दिया गया। इसके बाद मामले को लेकर शिकायत हुई। इधर कार्य छोड़कर भागने के बाद नए सिरे से करीब 1 करोड़ का टेंडर निकाला। अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए नई एजेंसी तय की गई।

हाईकोर्ट के आदेश व वीसी की अनुमति से किया पेमेंट
“भुगतान का विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था, कोर्ट के आदेश पर भुगतान हुआ। लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। सारा प्रकरण 4 जून 2019 का है और मैं आया हूं अक्टूबर 2019 में। कुलपति की अनुमति से ही भुगतान किया गया था। अनियमितता जैसी कोई भी बात नहीं है।”
-महेश कुमार शर्मा, कार्यपालन अभियंता, कामधेनु विवि अंजोरा

अनियमितता जैसी कोई बात मामले में नहीं है
“मामले में भुगतान को लेकर ठेकेदार हाईकोर्ट चला गया था। विवाद की वजह से भवन निर्माण में देरी हुई। बाद में कोर्ट ने पेमेंट करने का आदेश दिया। इसके बाद ठेकेदार को भुगतान किया गया। यही कारण है कि काम में डिले होने के बाद भी पेनल्टी की राशि नहीं काटी गई।”
-डॉ. एनपी दक्षिणकर, कुलपति कामधेनु विवि अंजोरा

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