कारोबार को पंख: बचपन में बाजार की गलियों में कागज का हवाई जहाज उड़ाने वाले रांची के मुरारी लाल, जेट एयरवेज काे देंगे पंख


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रांची2 घंटे पहले

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मुरारी लाल जालान भाई नारायण जालान, विशाल जालान और बहन शालिनी जालान के साथ।

रांची के अपर बाजार में कागज के हवाई जहाज उड़ाने वाले मुरारी लाल जालान अब जेट एयरवेज काे पंख देंगे। नेशनल कंपनीज लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने कर्ज से जूझ रही जेट एयरवेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। योजना अमेरिका की एसेट मैनेजमेंट कंपनी कालरॉक कैपिटल और रांची निवासी यूएई के उद्यमी मुरारी लाल के कंसोर्टियम ने भेजी थी।

एनसीएलटी ने अब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और उड्डयन मंत्रालय को 90 दिन का वक्त दिया है। ताकि वे जेट एयरवेज की उड़ानों के लिए मार्ग और समय आवंटित कर सकें। कर्ज के चलते दो साल पहले बंद जेट एयरवेज का संचालन दोबारा चालू करने के लिए कालरॉक-जालान ने 1,375 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

बड़े भाई ने कहा-बचपन से ही क्रिएटिव थे, दुनियाभर में काराेबार फैलाना चाहते थे
बड़े भाई नारायण जालान ने कहा- मेरे और छाेटे भाई विशाल जालान के साथ मुरारी लाल अपर बाजार की गलियों में कागज का हवाई जहाज उड़ाया करते थे कागज का जहाज उड़ाते-उड़ाते आज मुरारी लाल ने जेट एयरवेज का अधिग्रहण कर लिया। पिता गणेश प्रसाद जालान कागज के कारोबारी थे और उनका यह पुश्तैनी कारोबार था। नारायण जालान ने कहा-मुरारी बचपन से ही क्रिएटिव था। उसकी सोच हमेशा समय से आगे रहती। जब 14-15 साल का था, उसी समय से नए-नए बिजनेस का आइडिया उसके दिमाग में घूमते रहता था। 1988 में चर्च कॉम्प्लेक्स में क्यूएसएस नाम से फोटो कलर लैब खोला। फिर बीआईटी मेसरा में कैमरे बनाने का प्लांट लगाया। 4-5 साल रांची में यह काम करने के बाद वह कुछ बड़ा करना चाहता था। इसलिए नए-नए कारोबार में वह प्रयोग करता रहा। दुनियाभर में कारोबार फैलाना उसका सपना था। जेट एयरवेज का मालिक बन उसने इसे साबित कर दिया।

रांची से निकलकर यूएई में बनाई पहचान
यूएई में मुरारी लाल जालान एमजे डेवलपर्स कंपनी के मालिक हैं। पुश्तैनी पेपर के कारोबार को वे काफी ऊपर ले गए। उन्होंने जेके पेपर और बल्लारपुर इंडस्ट्रीज के लिए भी काम किया था। उन्होंने रियल एस्टेट, माइनिंग, ट्रेडिंग, कंस्ट्रक्शन, एफएमसीजी, ट्रेवल एंड टूरिज्म और इंडस्ट्रियल वर्क्स जैसे सेक्टर्स में निवेश किया है। निवेश भारत, रूस, उज्बेकिस्तान समेत कई देशों में है।

जेट के पास 180 विमानों का बेड़ा, 3200 कर्मी थे
जेट के पास 700 मार्गों पर 180 विमानों का बेड़ा था। जबकि 3,200 कर्मचारी थे। इनमें 240 पायलट, 110 इंजीनियर और 650 चालक दल के सदस्य थे। कंसोर्टियम ने 30 विमानों के साथ जेट एयरवेज को पूरी तरह से सर्विस एयरलाइंस के तौर पर पुन: स्थापित करने की योजना दी है।

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