काला हिरण शिकार प्रकरण: झूठा शपथ पत्र पेश कर फंसे सलमान, अब कहा भूलवश हो गया था, माफ कर किया जाए बरी


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जोधपुर6 मिनट पहले

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सलमान खान।

  • दोनों पक्षों की बहस हुई पूरी, अब 11 फरवरी को आएगा फैसला

कांकाणी हिरण शिकार प्रकरण में फिल्म अभिनेता सलमान खान की तरफ से कोर्ट में झूठा शपथ पत्र देने से जुड़े मामले की मंगलवार को जिला एवं सत्र जिला जोधपुर कोर्ट में सुनवाई हुई। सलमान की तरफ से कहा गया कि भूलवश शपथ पत्र पेश कर दिया गया। ऐसे में सलमान को माफ कर इस मामले से बरी कर दिया जाए। इस मामले में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। अब कोर्ट 11 फरवरी को अपना फैसला सुनाएगा।

यह है मामला

वर्ष 1998 में जोधपुर के निकट कांकाणी गांव की सरहद में दो काले हिरण का शिकार करने के मामले में सलमान को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से सलमान से उसके हथियारों का लाइसेंस मांगा गया था। इस पर सलमान ने कोर्ट में एक हलफनामा पेश करते हुए बताया कि उसका हथियारों का लाइसेंस कहीं खो गया है। इस बाबत उसने मुंबई के बांद्रा पुलिस थाने में दर्ज कराई गई एक एफआईआर की प्रतिलिपि भी पेश की थी। बाद में कोर्ट को यह जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि सलमान खान का लाइसेंस कहीं गुम नहीं हुआ था बल्कि उसने खुद लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए हथियार लाइसेंस नवीनीकरण शाखा में पेश किया हुआ था। जिसके बाद तत्कालीन लोक अभियोजक भवानी सिंह भाटी ने कोर्ट में एक अर्जी पेश कर कोर्ट से यह गुहार की कि सलमान खान ने कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास करने पर मुकदमा दर्ज किया जाए।

आज यह कहा गया सलमान की तरफ से

आज इस मामले में जिला एवं सत्र जिला जोधपुर में सुनवाई हुई सुनवाई के दौरान सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने बहस करते हुए यह दलील दी कि बहुत ज्यादा व्यस्तता होने के चलते सलमान खान यह बात भूल गया था कि उसका लाइसेंस नवीनीकरण के लिए पेश किया हुआ है। जिसके बाद भलमनसाहत के चलते उसने कोर्ट को यह सूचित किया तथा इस बाबत थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक नजीर पेश करते हुए बताया कि यदि किसी मामले में आरोपी को कोई फायदा ना हो और भूलवश झूठा शपथ पत्र पेश हो जाए तो ऐसे मामले में आरोपी को ऐसे आरोपों से बरी कर दिया जाना चाहिए। इसके आधार पर सलमान खान के अधिवक्ता ने उन्हें उक्त मामले में बरी करने की अपील की। आज मामले में दोनों पक्षों की ओर से बहस खत्म कर ली गई। अब आगामी 11 फरवरी को कोर्ट इस प्रार्थना पत्र पर अपना आदेश सुनाएगी।

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