किसान आंदोलन के साइड इफेक्ट: कर्मी फैक्ट्री पहुंच नहीं पा रहे, उत्पादन भी ठप, फुटवियर इंडस्ट्री हो रही फेल, बहादुरगढ़ इंडस्ट्री को हो चुका 4 हजार करोड़ का नुकसान


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बहादुरगढ़14 घंटे पहले

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बहादुरगढ़ फुटवियर फैक्ट्री के सामने वाशिंग मशीन से कपड़े धाेने के लिए लगी किसानों की कतार।

  • हालात : अब तक 40% कर्मियों की छंटनी तक विभिन्न फैक्ट्रियों में हुई
  • वजह : निर्यात बंद रहने से उत्पादन भी 30% से आगे नहीं बढ़ पा रहा

अभी से क्यों पूछते हो बहादुरगढ़ की फैक्ट्री कैसे बर्बाद हुई। अभी तो नुकसान के आलम का मीटर दौड़ रहा है। 75 दिनों से बंद पड़ी देश की जानी मानी फैक्ट्रियों के गेट पर इन दिनों आंदोलनकारियों का डेरा है। अब फैक्ट्रियों से ही पानी लेकर फैक्ट्रियों के गेट पर ही कपड़े धोने की मशीनें लगाई जा रही है।

कर्मचारियों के पास फैक्ट्रियों में जाने का कोई स्थान नहीं होने के कारण बहादुरगढ़ की फैक्ट्रियों में चालीस फीसदी कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है या फिर वे खुद ही काम छोड़ चुके हैं। अब साठ फीसदी कर्मचारियों के भरोसे देश भर में नाम कमा चुकी फैक्ट्रियों के सामने फैक्ट्री चलाए रखने की भी चिंता सताने लगी है।

वहीं केवल एमआई औद्योगिक क्षेत्र में ही स्थित करीब चार हजार फैक्ट्रियों में पांच सौ से अधिक फैक्ट्रियों को किसान आंदोलन के चलते बंद करने का फैसला करना पड़ा है व फैक्ट्रियों के संचालकों ने किसान आंदोलन समाप्त होने के बाद ही फैक्ट्रियों में आने तो कह दिया है। फैक्ट्रियों के संचालकों की माने को केवल बहादुरगढ़ में सात से आठ हजार श्रमिक व छोटे करीगरों को काम की तलाश में दिल्ली व अन्य स्थानों की तरफ जाने को मजबूर होना पड़ा है। जो फैक्ट्रियों के पुराने कर्मचारी है वे घर पर बैठकर फैक्ट्री शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

टिकरी बाॅर्डर के पास देश की बड़ी फैक्ट्री रिलेक्सों के मुख्य गेट 75 दिनों से बंद पड़े है। अब किसानों ने इसके गेट के सामने कपड़े धोने की मशीनें लगा दी है। इस कारण फैक्ट्री संचालक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि किसान आंदोलन के बाद ही अब फैक्ट्री का गेट खुलेगा।

किसान फैक्ट्री के सामने वाॅशिंग मशीन से कपड़े धाेते हुए

तीन शिफ्ट की जगह एक शिफ्ट में चल रहा काम

टिकरी व झाड़ौदा बॉर्डर बंद होने से बहादुरगढ़ की फुटवियर इंडस्ट्री में उत्पादन इन दिनों जूते के सीजन में तीन शिफ्टों में होता था उत्पादन। अब एक शिफ्ट पर आकर सिमट गया है यह तो बड़ी फैक्ट्रियों का हाल है। छोटी फैक्ट्रियों की हालत इससे भी बुरी है।

सबसे ज्यादा एमआईई पार्ट बी प्रभावित, यहां की करीब 1600 फैक्ट्रियों में बंद है उत्पादन पर इसका कोई हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा। किसान आंदोलन के कारण टिकरी बाॅर्डर के बाद झाड़ौदा बॉर्डर पर भी कभी बंद तो कभी लाइन शुरू हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा और व्यापक असर बहादुरगढ़ में फुटवियर इंडस्ट्री को हो रहा है यह कब तक होगा इसके बारे में फैक्ट्री संचालकों के पास कोई जवाब नहीं है।

बहादुरगढ़ नॉन लैदर फुटवियर का हब है होने के कारण चीन के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर पार्क बहादुरगढ़ में हैं जो अब किसान आंदोलन के कारण बर्बाद होने के साथ साथ जूतों के कम्पीटिशन से बाहर होता जा रहा है।

फैक्ट्री संचालक बाेले-माल तैयार करके क्या करें, बाहर कैसे जाएगा कोई नहीं जानता

फैक्ट्रियों के संचालकों का कहना है कि तैयार माल और कच्चा माल लाने ले जाने में इंडस्ट्री को करोड़ों का अधिक भार पड़ा है। बहादुरगढ़ में देश का 50 फीसदी नॉन लैदर फुटवियर बनता है। बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क एसोसिएशन के वरिष्ठ उप्रपधान नरेंद्र छिकारा ने बताया कि ठंड के मौसम में जो फैक्ट्रियां तीन शिफ्टों में चलती थीं वो अब एक ही शिफ्ट में रह गई है। रोजगार भी करीब 40 फीसदी कम हो गया।

कर्मचारी घरों में बैठे हैं, उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा जो उत्पादन हो रहा है, वो इमरजेंसी के ऑर्डर पूरे करने के लिए भारी नुकसान उठा रहे हैं। रिलेक्सों के संचालक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पहले दिल्ली जाने के लिए जो टैंपाें तीन से चार हजार किराया लेता था वह भी अब 8 से 10 हजार रुपए किराया मांगता है। क्योंकि वाहन को गुरुग्राम की तरफ से दिल्ली में जाना पड़ता है। इसी तरह से फैक्ट्रियों को कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा है।

काेराेना व धरने के चलते करीब पांच साै फैक्ट्री हाे चुकी बंद: पहले काेराेना का कारण फरवरी से सीजन पीट गया था। जबकि ठंड होने की वजह से जूते का सीजन होता है, मगर यह सीजन किसान आंदोलन के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो चूक है। पहले नोटबंदी फिर कोरोना ने जूता इंडस्ट्री में तीन शिफ्टों को एक शिफ्ट में ला दिया है। आने-जाने के रास्ते किसानों की ओर से बंद किए जाने से यहां की करीब पांच सौ फैक्ट्री पूरी तरह से बंद व 1600 इकाइयों में गिनती के कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।

बहादुरगढ़ फुटवियर उद्योग से ही पहचाना जाने लगा: बहादुरगढ़ अब फुटवियर हब के रूप में जाना जाता है। बहादुरगढ़ में छोटी-बड़ी दो हजार इंडस्ट्री हैं जो दिन रात चलती है। यहां देश भर के लिए जॉब वर्क यानी जूते का अपर व सोल बनाया जाता है जिसका सालाना टर्न ओवर बीस हजार हजार करोड़ से अधिक है। फिलहाल आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र पार्ट ए व बी, रोहद, फुटवियर पार्क सेक्टर 17, एचएसआइआइडीसी सेक्टर 16 व 4बी और पुराना औद्योगिक क्षेत्र में जूते बनाए जाते हैं।

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