कृषि कानूनों पर हिमाचल से बड़ी खबर: किसान ने बेटे को किया बेदखल; कहा- मुफ्त की रोटियां तोड़ता है और जा बैठा आंदोलन में, हडि्डयां तोड़ दो देशद्रोही की


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हमीरपुर8 मिनट पहले

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किसान अजमेर सिंह, जो किसान आंदोलन के धुर विरोधी हैं और बेटे को उसमें शामिल होने की सजा दे चुके हैं।

  • अजमेर सिंह ने किसान आंदोलन को गलत बताया और कहा कि वहां लोग मुफ्त का खा रहे हैं

हिमाचल प्रदेश से कृषि कानूनों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। हमीरपुर जिले के उपमंडल बड़सर के जमली गांव के किसान और पूर्व सैनिक अजमेर सिंह ने अपने बेटे को संपत्ति से बेदखल कर दिया है, क्योंकि वह किसान आंदोलन का हिस्सा है और इन दिनों आंदोलनकारियों के साथ ही रह रहा है। देश में इस तरह का यह पहला मामला है।

अजमेर सिंह का कहना है कि परमजीत सिंह उसका इकलौता बेटा है। वह घर में बैठकर मुफ्त की रोटियां तोड़ता है। उसे यह तक नहीं पता कि कौन-सी फसल कब बीजते हैं और वह किसान आंदोलन में शामिल होने चल गया। पूर्व सैनिक ने किसान आंदोलन को गलत बताते हुए दिल्ली पुलिस से गुहार लगाई कि उनके देशद्रोही बेटे की मार-मार कर हड्डियां तोड़ दी जाएं।

अजमेर सिंह ने बताया कि वह भारतीय सेना से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने गांव में ही एक दुकान चलाते हैं और साथ में खेतीबाड़ी करते हैं। परमजीत की शादी हो चुकी है। बहू और पोती घर पर हैं, जबकि बेटा दिल्ली में किसान आंदोलन में भाग लेने गया है। एक चैनल पर बेटे को इंटरव्यू देते हुए अजमेर सिंह ने पहचान लिया। इंटरव्यू में परमजीत ने किसान आंदोलन को सही बताया।

इंटरव्यू में परमजीत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। यह देखकर अजमेर सिंह भड़क गया और अब उसने अपने बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है। अजमेर सिंह ने कहा कि दिल्ली में चल रहा किसान आंदोलन सही नहीं है। वहां पर लोग मुफ्त का खाना और अन्य सुविधाएं हासिल कर रहे हैं। वह एक पूर्व सैनिक है और किसानों का हित नए कृषि कानून में हैं। बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल करने के इस मामले से लोग हैरान हैं।

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