कोरोनाकाल में प्रभावित हुआ बच्चों का नियमित टीकाकरण: 1.95 लाख बच्चों‌ को जन्म से लगने वाले बीसीजी, पोलियो व टीबी जैसी बीमारियों के टीके नहीं लगे


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रायपुरएक घंटा पहलेलेखक: अमिताभ अरुण दुबे

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फाइल फोटो।

बच्चों को हेपेटाइटिस बी, बीसीजी, पोलियो, डीपीटी टीबी, जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए जन्म के बाद दिए जाने वाले टीकों पर इस बार कोरोना का असर रहा है। प्रदेश में 2020-21 के लिए तय किए गए 6.32 लाख बच्चों के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य के मुकाबले केवल 69 प्रतिशत टारगेट ही पूरा हो पाया है।

यानी प्रदेश के 28 जिलों के 1,95,900 लाख बच्चों को पूरे टीके नहीं लग पाए। राजधानी रायपुर में भी बच्चो के टीकाकरण की स्थिति ठीक नहीं रही है। रायपुर में अप्रैल 2020 के बाद से फरवरी 2021 के बीच 6,465 बच्चे पूरे टीके नहीं लगवा पाए हैं।

इतना ही नहीं, रायपुर में 14,936 बच्चों को बीसीजी का टीका भी नहीं लग पाया है। दरअसल, बच्चों को लेकिन कोरोना के वक्त लॉकडाउन के कारण और बाद में कोरोना के डर से बहुत सारे माता पिता अपने बच्चों को टीका लगवाने नहीं पहुंचे। इसके चलते हेल्थ विभाग इस बार बच्चों को टीकाकरण में पिछड़ गया है। हर साल अप्रैल से मार्च के बीच वित्तीय वर्ष में टीकाकरण का लेखाजोखा तैयार किया जाता है। अभी मार्च तक छूटे हुए बच्चों को बचे हुए टीके लगाने के लिए हेल्थ विभाग कवायद कर रहा है।

कोरोना के वैक्सीनेशन के कारण इस काम में भी पूरा फोकस नहीं हो पा रहा है। राजधानी समेत सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को बचे हुए 1.95 लाख से ज्यादा बच्चों को टीके लगाने का टारगेट 31 मार्च तक पूरा करना है। रायपुर में 14 हजार से ज्यादा बच्चों को बीसीजी और 6 हजार से ज्यादा बच्चों को नियमित टीकाकरण में छूटे हुए टीके लगने है।

राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत टीकाकरण के लिए जो गाइडलाइन तय की गई है, उसके मुताबिक बीसीजी और ओपीवी जीरो बच्चों को जन्म के तुरंत बाद दिया जाना चाहिए। जबकि जन्म के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी का बर्थ डोज दिया जाता है। एक साल की उम्र के पहले ओपीवी की तीन खुराक, रोटावायरस की तीन खुराक, पेंटावेलेन्ट की तीन खुराक, आंशिक आईपीसी की तीन खुराक (जहां ये लागू होती है), मीजल्स और एमआर वैक्सीन की पहली खुराक और जेई यानी जापानीज बुखार की पहली खुराक (जहां ये लागू हो) अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए।

इतने डोज होने के बाद माना जाता है कि बच्चे का पूर्ण टीकाकरण हो गया है। इसके बाद दो साल की उम्र तक संपूर्ण टीकाकरण के लिए एमआर वैक्सीन का दूसरा डोज और डीपीटी, ओपीवी, पीसीवी बूस्टर के साथ जहां लागू हो वहां जेई के टीके की दूसरा डोज दिया जाता है।

बच्चो के नियमित टीकाकरण में शामिल टीके जन्म के 24 घंटे के भीतर – बीसीजी, पोलियो की जीरो खुराक। जन्म के 24 घंटे के भीतर – हेपेटाइटिस बी लगना जरूरी। डेढ़ माह पर – ओपीवी, रोटा, एफ-आईपीवी, पीसीवी व पेन्टावेलेन्ट टीका। पहले टीका के 28 दिन बाद – ओपीवी, रोटा वायरस व पेन्टावेलेन्ट दूसरा डोज। दूसरे के 28 दिन बाद – ओपीवी, रोटा, पीसीवी की दूसरी, पेन्टावेलेन्ट का तीसरा। 9 माह में – खसरा व विटामिन ’ए’ की पहली खुराक पीसीवी व बूस्टर खुराक। 16 से 24 माह के होने पर – बच्चे को खसरे एवं विटामिन ’ए’ की दूसरी खुराक तथा 5 साल पूर्ण होने तक 6 माह के अंतराल पर विटामिन ’ए’ की 9 खुराकें।

टीकाकरण की स्थिति
प्रदेश में

  • लक्ष्य : 6.32 लाख
  • टीके लग पाए: 4.36 लाख
  • टीके छूटे : 1,95,920

रायपुर में

  • लक्ष्य : 57867
  • संपूर्ण टीकाकरण: 51402
  • कमी : 6465

लॉकडाउन में सर्वाधिक पिछड़े टीके: चूंकि मार्च के अंत से मई तक पिछले साल लॉकडाउन की स्थिति रही। लिहाजा बहुत से मां बाप एक साल की मियाद के अंदर लगने वाले ये टीके नहीं लगवा पाए। बच्चों को जन्म के 24 घंटे के अंदर दी जाने वाले टीकाकरण के डोज के बाद लगने वाले टीकों के लिए माता-पिता अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं जा पाए।

राजधानी में 18 मार्च को पहला कोरोना मरीज मिला। इसके बाद से मई तक लॉकडाउन की स्थितियां रही। इसके चलते ऐसे बच्चे जिनका जन्म जनवरी फरवरी और मार्च के दौरान हुआ, उनके नियमित संपूर्ण टीकाकरण सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

भास्कर एक्सपर्ट – बीमारी का खतरा संभव
-डॉ. कनक रामनानी, पीडियाट्रिशियन, डॉक्टर अंबेडकर अस्पताल

वैसे अगर हम टीके रोकते हैं या देर से लगाते हैं तो बच्चों में बीमारी का खतरा हो सकता है। कोरोना लॉकडाउन के कारण जो लोग बच्चों को टीके नहीं लगवा पाए हैं वो जितना जल्दी इसे लगवा लें उतना ही अच्छा रहेगा। छूट गए टीकों में कौनसे टीके लगेंगे ये आपको डॉक्टर बच्चे के जन्म के समय बनाए गए टीकाकरण कार्ड के आधार पर बताएंगे। घबराने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर पोलियो और खसरे के टीके को बहुत जरूरी माना जाता है।

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