कोरोना अभी गया नहीं है: बगैर तैयारी के शहर के सरकारी स्कूलों में शुरू हुई छठी से आठवीं तक की पढ़ाई, बिना मास्क के ही बैठे विद्यार्थी



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भागलपुर15 घंटे पहले

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  • डीईओ ने कहा- जीविका दीदी काे मास्क का दिया गया है ऑर्डर, अभिभावकों को भी रखना चाहिए ध्यान

जिले के करीब 800 सरकारी विद्यालयाें काे बिना किसी तैयारी के खाेल दिया गया। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन काे काेविड संक्रमण की गाइडलाइन्स का पालन करने का निर्देश ताे दिया, लेकिन खुद ही विद्यालयाें काे मास्क उपलब्ध नहीं कराए। स्कूल में विद्यार्थी पहुंचे ताे उन्हें मास्क नहीं दिया जा सका।

वे बगैर मास्क लगाए ही कक्षा की और वापस घर गए। दरअसल स्कूलाें काे जीविका दीदी की ओर से मास्क मिलना था। इस मास्क काे सरकारी स्कूल के आने वाले विद्यार्थियाें काे देना था। लेकिन जीविका दीदी ने मास्क ही नहीं उपलब्ध कराए। जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार भी अब इस लापरवाही का ठीकरा अभिभावकाें के सिर पर फाेड़ रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि अभिभावकाें काे भी मास्क लगवा कर बच्चाें काे स्कूल भेजना चाहिए।

हमलाेगाें काे जीविका दीदी से ही मास्क लेना है। शिक्षा विभाग खुद से मास्क नहीं ले सकता। वहीं मध्य विद्यालय पुलिस लाइन, मध्य विद्यालय बरहपुरा, खंजरपुर मध्य विद्यालय, मुक्ति विद्यालय, मध्य विद्यालय झुरखुड़िया समेत सभी विद्यालयाें में विद्यार्थी बिना मास्क के ही पहुंचे।

शिक्षा विभाग ने नहीं उपलब्ध कराया मास्क, सेनिटाइजर और थर्मल स्कैनर के लिए लिखा पत्र

सेनिटाइजर व थर्मल स्कैनर भी नहीं थे
सरकारी स्कूलाें में सेनिटाइजर, थर्मल स्कैनर, साबुन की भी व्यवस्था नहीं। विद्यालयाें ने विभाग काे ये सभी चीजें उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया है। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ गोपगुट के जिला सचिव श्याम नंदन सिंह ने कहा कि हमने डीपीओ एसएसए से बात की है। उन्हाेंने कहा कि इसके लिए मुख्यालय पत्र भेजा जा रहा है।

दिया गया है 1.73 लाख मास्क का ऑर्डर
जिला शिक्षा विभाग विद्यार्थियाें काे मास्क बांटने के लिए जीविका दीदी काे 1.73 लाख मास्क बनाने का ऑर्डर दिया गया है। लेकिन साेमवार काे वहां से मास्क आए ही नहीं। डीईओ ने कहा कि हमने मास्क के लिए आर्डर दिया है। मास्क आते ही बांटा जाएगा।

प्राइवेट स्कूलाें ने किया इंतजाम
प्राइवेट स्कूलाें में छठी से आठवीं तक की कक्षा खुली ताे काेविड संक्रमण से बचाव के लिए सभी गाइडलाइन्स का पालन किया गया। कार्मेल स्कूल और सेंट जाेसेफ स्कूल में थर्मल स्कैनिंग करके ही विद्यार्थियाें काे अंदर जाने दिया गया। डीएवी पब्लिक स्कूल में हाथ सेनिटाइज करके ही प्रवेश दिया गया। आनंदराम ढंढानियां सरस्वती विद्या मंदिर में सेनिटाइजिंग टनल से हाेकर बच्चे स्कूल में गए।

10 महीने बाद मिले ताे चेहरे पर दिखी खुशी
इस बीच 10 महीने बाद जब विद्यार्थी स्कूल पहुंचे ताे खुशी सभी के चेहरे पर दिखी। दस महीने बाद स्कूल में अपने दाेस्ताें से मिलने और क्लासरूम स्टडी करना विद्यार्थियाें में नई ऊर्जा लेकर आया। सेंट जाेसेफ की सृष्टि ने कहा कि हमलाेग ताे कबसे इस दिन का इंतजार कर रहे थे। हम लाेग फाइनली अपने स्कूल आकर अपने टीचर और दाेस्ताें से मिल पाए। अब लाइफ नाॅर्मल लग रही है।

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