कोरोना वैक्सीनेशन: देश में अब तक 4.2 करोड़ लोगों को टीके लगे; सरकार वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाएगी, 45 से ज्यादा उम्र के सभी लोग शामिल किए जा सकते हैं


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3 मिनट पहले

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अभी 60 साल से ज्यादा उम्र वालों और 45 से ज्यादा उम्र के गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को टीके लगाए जा रहे हैं। फोटो रांची की है, जहां विधानसभा स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने टीका लगवाया।

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत देश में अब तक 4.2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। बीते 24 घंटे में 27 लाख लोगों को टीके लगाए गए हैं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी शेयर की।

देश में एक मार्च से शुरू हुए कोरोना वैक्सीनेशन के दूसरे फेज में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और 45 साल से ऊपर वाले गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। सरकार आने वाले दिनों में वैक्सीनेशन का दायरा भी बढ़ाने वाली है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी थी। माना जा रहा है कि सरकार अब 45 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को वैक्सीनेशन में शामिल कर सकती है।

देश में वैक्सीन के 6.5% डोज खराब हुए
देश में अब तक कोरोना वैक्सीन के 6.5% डोज खराब हो चुके हैं। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में हालात बहुत ही खराब हैं जहां 9% से 18% तक डोज खराब हो रहे हैं। सरकार ने कोई आंकड़ा तो नहीं बताया, पर कैल्कुलेट करें तो यह करीब 20 लाख डोज तक होता है। ऐसे में जब कई देश वैक्सीन नहीं मिलने की वजह से वैक्सीनेशन शुरू नहीं कर पाए हैं, तब 20 लाख वैक्सीन डोज बेकार होना किसी भी लहजे से ठीक नहीं है। इन डोज को बचाने के लिए सरकार 45 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीनेशन ड्राइव में शामिल कर सकती है।

वैक्सीन के डोज खराब क्यों हो रहे हैं?

  • स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक वैक्सीन खराब होने की मुख्य वजह है- ओपन वायल पॉलिसी का न होना। यानी अगर वैक्सीन की शीशी खोल ली है तो उसे चार घंटे के भीतर इस्तेमाल करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो डोज बेकार हो जाएंगे।
  • भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का इस्तेमाल टीकाकरण कार्यक्रम में हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में तो वैक्सीनेशन साइट्स पर भीड़ आ रही है। पर गांवों में जानकारी के अभाव में वैक्सीन लगवाने कम लोग आ रहे हैं।
  • इसके अलावा एक बड़ा कारण है वैक्सीन में स्टेबलाइजर का न होना। इससे शीशी खुलने के कुछ दिन बाद भी डोज दिए जा सकते हैं। यहां महत्वपूर्ण है कि कोवैक्सिन के लिए ओपन वायल पॉलिसी लागू की जा सकती है। खुद कंपनी ने इसका दावा किया है, पर सरकार ने सख्ती के साथ इसे लागू नहीं किया है।
  • कोवैक्सिन की फैक्टशीट के अनुसार एक शीशी में 20 डोज है, जबकि कोवीशील्ड की एक शीशी में 10 डोज। यह भी एक बड़ी वजह है डोज खराब होन का। चूंकि, ओपन वायल पॉलिसी लागू नहीं है, इस वजह से चार घंटे में जितने डोज शीशी में रह जाते हैं, वह बेकार हो जाते हैं।
  • फैक्टशीट्स कहती हैं कि शीशी अगर धूप में रह जाए या 2 से 8 डिग्री तापमान से बाहर लंबे समय तक रह जाए तो शीशी में भरा लिक्विड धुंधला होने लगता है। ऐसी शीशी से किसी को डोज नहीं दिया जा सकता।

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