कोवीशील्ड पर बड़ा फैसला: भारत अब एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन दूसरे देशों को नहीं देगा, घरेलू टीकाकरण पर फोकस करेगा


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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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भारत में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों में बीच बड़ी खबर आ रही है। केंद्र सरकार अब एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन दूसरे देशों को नहीं देगा। सूत्रों के मुताबिक, घरेलू टीकाकरण पर फोकस करने के लिए यह फैसला किया गया है। देश में एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) कोवीशील्ड के नाम से कर रही है।

डोमेस्टिक डिमांड पूरी करने बाद ही निर्यात
मामले से जुड़े लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वैक्सीन के निर्यात पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन दूसरे देशों को वैक्सीन की सप्लाई घरेलू सप्लाई के आकलन के बाद ही की जाएगी। विदेशों में वैक्सीन एक्सपोर्ट डोमेस्टिक प्रोडक्शन पर भी निर्भर करेगा।

रिव्यू के बाद लिया जाएगा फैसला
उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता देश के लोगों का टीकाकरण है। देश में वैक्सीन प्रोडक्शन की क्षमता बढ़ी है और दो वैक्सीन (कोवीशील्ड और कोवैक्सिन) को इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल भी दिया गया है। ऐसे में सरकार दो महीने बाद रिव्यू करने के बाद ही देश से बाहर वैक्सीन सप्लाई पर फैसला करेगी।

राज्यों ने ज्यादा वैक्सीन मांगी
हाल ही में राजस्थान-पंजाब समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार से भारी मात्रा में वैक्सीन की मांग की थी। फिलहाल देश में रोजाना कई राज्यों में तेजी से मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में वैक्सीन मांग में और इजाफा हो सकता है।

कोवीशील्ड के दोनों डोज के बीच का अंतर बढ़ाया
इससे पहले केंद्र सरकार ने 22 मार्च को कोवीशील्ड को लेकर अब नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक कोवीशील्ड के दो डोज के बीच का समय पहले से दो हफ्ते ज्यादा रहेगा। अब तक कोवीशील्ड के दोनों डोज के बीच 4 से 6 हफ्ते, यानी 28 से 42 दिन का अंतर रखा जाता था। नए निर्देश के मुताबिक अब यह अंतर 6 से 8 हफ्ते यानी 42 से 56 दिन का होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि ट्रायल्स डेटा के अनुसार अगर 6-8 हफ्ते के अंतर से कोवीशील्ड के दो डोज दिए जाते हैं तो प्रोटेक्शन बढ़ जाता है, पर यह अंतर 8 हफ्ते से अधिक नहीं होना चाहिए।

भारत ने 76 देशों को कोरोना वैक्सीन भेजी
भारत ने अब तक 76 देशों को कोरोना वैक्सीन भेजी हैं। कई देशों को वैक्सीन फ्री दी गई है, जबकि कुछ देशों को इसे बेचा गया है। पड़ोसी देशों श्रीलंका, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स को करीब 56 लाख वैक्सीन फ्री में दी गई हैं। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) कोवीशील्ड और भारत बायोटेक कोवैक्सिन का प्रोडक्शन कर रही हैं।

16 जनवरी से शुरू हुआ टीकाकरण

  • देश में 16 जनवरी को हेल्थकेयर वर्कर्स को टीका लगाने के साथ कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। 2 फरवरी से फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी वैक्सीन लगने लगी थी। 13 फरवरी से हेल्थकेयर वर्कर्स को दूसरा डोज दिया जा रहा है। फ्रंटलाइन वर्कर्स को दूसरा डोज देने की शुरुआत 2 मार्च को हुई।
  • देश में कोरोना वैक्सीनेशन का दूसरा फेज 1 मार्च से शुरू हुआ था। इस फेज के तहत 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके साथ ही 45 से 60 की उम्र के ऐसे लोगों को भी वैक्सीन लग रही है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
  • एक अप्रैल से 45 साल और इससे ज्यादा उम्र के सभी लोग कोरोना वैक्सीन लगवा सकेंगे। केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार (23 मार्च) को इसका फैसला किया था।

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