क्लाइमेट चेंज: भविष्य में लग सकता है ‘हीट टैक्स’; सालाना एक डिग्री तापमान बढ़ने पर भारत जैसे देशों में दो फीसदी घट जाती है उत्पादकता


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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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अध्ययन में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हैदराबाद, सूरत, भिलाई, छिंदवाड़ा सहित देश के अनेक हिस्सों से श्रमिकों की उत्पादकता के 15 वर्षों की जानकारियों का इस्तेमाल किया गया है।

  • शिकागो यूनिवर्सिटी के अध्ययन में सामने आई चौकाने वाली बात

अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक ताजा अध्ययन के निष्कर्ष जारी किए हैं। इसमें कहा है कि सालाना एक डिग्री का तापमान बढ़ने पर भारत जैसे देशों के विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) में दो फीसदी तक उत्पादकता घट जाती है। इस स्थिति के मद्देनजर भविष्य में इन देशों के लोगों को ‘हीट टैक्स’ जैसे किसी कर का भुगतान भी करना पड़ सकता है।

यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया निदेशक डॉ. अनंत सुदर्शन कहते हैं, ‘फसलों की उपज पर ऊंचे तापमान का विपरीत असर पहले से प्रमाणित है। अब नए अध्ययन से पता चला है कि बढ़ता तापमान श्रम उत्पादकता को कम करके अन्य क्षेत्रों के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाता है।

यदि भारत को सस्ते श्रम का इस्तेमाल करके विनिर्माण के क्षेत्र में महाशक्ति बनना है, तो उसे इस दिशा में बेहद गंभीरता से सोचना होगा। श्रमिकों को गर्म वातावरण से बचाने के लिए कम लागत की तकनीकी विकसित करने पर जोर देने की जरूरत है। वहीं ‘हीट टैक्स’ जैसे कदम उठाए गए तो इससे विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा को धक्का लग सकता है। गरीब मजदूरों के वेतन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।’

अध्ययन में 58 हजार से अधिक मिलों और कारखानों को शामिल किया गया
डॉ. सुदर्शन इस अध्ययन के मुख्य लेखक हैं। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, दिल्ली के ई.सोमनाथन, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की रोहिणी सोमनाथन और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलीना की मीनू तिवारी सह-लेखक हैं। अध्ययन में दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हैदराबाद, सूरत, भिलाई, छिंदवाड़ा सहित देश के अनेक हिस्सों में 58 हजार से अधिक कपड़ा मिल, सिलाई कारखानों, स्टील मिल व हीरा वर्कशॉप के उत्पादन व श्रमिकों की उत्पादकता के 15 वर्षों की जानकारियों का इस्तेमाल किया गया है।

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