गड़बड़ी: करंट से मौत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी नहीं, बीमा कंपनी की टालमटोल गलत


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भागलपुर3 घंटे पहले

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जिला उपभोक्ता आयाेग ने कहा कि बिजली के करंट से हुई मौत मामले में बीमा राशि देने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट की जरूरत नहीं है। सिर्फ इन कागजात के इंतजार में नॉमिनी को पैसा नहीं देना बीमा कंपनी की सेवा में त्रुटि है। आयाेग ने नेशनल इंश्योरेंस लिमिटेड को 45 दिनों के अंदर नॉमिनी को बीमा का पैसा 9 प्रतिशत सूद के साथ देने काे कहा है।

शिकायतकर्ता को 7 हजार रुपए शारीरिक व मानसिक कष्ट और दो हजार रुपए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए देने काे कहा। मामला नाथनगर के प्रलय बनर्जी का है। उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से 50 हजार रुपए की जनता पर्सनल एक्सीडेंड पॉलिसी ली थी। यह 2019 तक वैध थी। बनर्जी की मौत 6 नवंबर 2008 को बिजली से करंट लगने से हो गई थी। उनकी पत्नी और नॉमिनी सविता बनर्जी बीमित राशि लेने के लिए पांच साल तक बीमा कंपनी दौड़ती रही लेकिन उसे रकम नहीं मिला। थक-हारकर उसने 2013 में आयोग के समक्ष शिकायत की।

मौत की सूचना पुलिस को दी थी
आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने कहा कि क्लेम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट अटैच नहीं होने पर पेमेंट नहीं किया गया। इस पर सविता की ओर से बताया गया कि प्रलय की मौत की जानकारी नाथनगर पुलिस को लिखित व मौखिक दी गई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम नहीं कराया।

बहस सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष अतुल कुमार श्रीवास्तव व सदस्य डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि बिजली के करंट या आगजनी से मौत एक्सीडेंट के दायरे में है। लेकिन ऐसी मौतों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी नहीं है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग भी है। इन तथ्यों से स्पष्ट है कि बीमा कंपनी ने सेवा में त्रुटि की है। इसलिए बीमा कंपनी सविता को बीमित राशि 9 प्रतिशत सूद के साथ पेमेंट करे।

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