घुसपैठियों के दुश्मन ‘टायसन’ को नई जिंदगी: गडवासू के डॉक्टरों ने किया इलाज; डायलिसिस पर चला गया था, 170वीं बटालियन का हिस्सा था, 58वीं के साथ गश्त कर रहा था


लुधियाना5 मिनट पहले

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डॉक्टरों के साथ डॉग टायसन।

बॉर्डर के रास्ते देश में चुपके से घुसने वाले घुसपैठियों के दुश्मन टायसन को नई जिंदगी मिल गई है। उसे कुछ दिन पहले गुरु अंगददेव वेटरनरी यूनिवर्सिटी गडवासू में दाखिल करवाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत देखते हुए उसे डायलिसिस पर लिया और अब वह खतरे से बाहर है। टायसन लैबराडोर डॉग है। जिसे 3 सितंबर की रात को गंभीर हालत में अस्पताल में दाखिल करवाया गया था।

डिपार्टमेंट ऑफ टीचिंग वेटरनरी क्लीनिकल कॉम्पलेक्स के सहायक प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह के अनुसार, 4 साल के लैबराडोर डॉग ‘टायसन’ की जांच में पता चला कि उसे एक्यूट किडनी इंजरी है। इसकी वजह से उसके शरीर में यूरिया एकदम से बढ़ गया। इससे उसकी किडनी पर अटैक हुआ और उनके काम करना बंद कर देने का खतरा पैदा हो गया। टायसन की नाजुक हालत को देखते हुए तुरंत डायलिसिस पर लिया गया। अब वह खतरे से बाहर है और दवाओं की मदद से रिकवरी कर रहा है। हालांकि यूनिवर्सिटी में लाने से पहले BSF के डॉक्टरों ने 4 दिन तक उसका इलाज किया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और कुछ दिनों बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी।

कई घुसपैठियों को पकड़ने में मदद कर चुका टायसन
BSF अधिकारियों के अनुसार, टायसन ‌BSF का विभिन्न अंग है। वह गुरदासपुर में भारत-पाक सीमा पर होने वाली नशा तस्करी और हथियारों की तस्करी रोकने में अहम रोल निभा रहा है। वह बॉर्डर पर गश्त करने वाले दल का हिस्सा हैं और कई तस्करों को पकड़वा चुका है। इसके लिए उसे सम्मान भी मिले हैं। टायसन BSF की 170वीं बटालियन में सरहद पर ड्यूटी निभाता था। दिसंबर 2019 से वह 58वीं बटालियन के साथ गश्त कर रहा है।

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