चेन्नई में बंद है इंटीग्रेटेड वैक्सीन कॉम्प्लेक्स: यहां 200 वैज्ञानिकों की टीम, 100 करोड़ टीके हर साल बन सकते हैं; 600 करोड़ के इस कॉम्प्लेक्स में बना सिर्फ सैनिटाइजर


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चेन्नई5 मिनट पहलेलेखक: सुनील सिंह बघेल

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चेन्नई के पास चैंगलपट्टू में सालों से तैयार आधुनिक इंटीग्रेटेड वैक्सीन कॉम्प्लेक्स (आईवीसी) बंद पड़ा है।

वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए जहां ज्यादा कंपनियों से करार और नई उत्पादन इकाइयां लगाने की बात चल रही है वहीं चेन्नई के पास चैंगलपट्टू में सालों से तैयार आधुनिक इंटीग्रेटेड वैक्सीन कॉम्प्लेक्स (आईवीसी) बंद पड़ा है। आईवीसी प्रबंधन का कहना है कि यदि सरकार 300 करोड़ रुपए और लगा दे, तो यहां हर साल 100 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज तैयार हो सकते हैं। विडंबना यह है कि इस प्लांट में सिर्फ सैनिटाइजर बनाए गए। हाल ही में प्लांट का दौरा कर लौटे सीएम एमके स्टालिन ने कहा, ‘अगर केंद्र अनुमति दे तो हम पैसा लगाकर वैक्सीन बनाने को तैयार हैं।’

केंद्रीय कंपनी एचएलएल लाइफ केयर के 100 एकड़ में फैले वैक्सीन कॉम्प्लेक्स के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने 594 करोड़ स्वीकृत किए थे। एचएलएल बायोटेक लिमिटेड (एचबीएल) को ‘राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट’ का दर्जा दिया था। इसमें बीसीजी, हेपेटाइटिस, डायरिया, चेचक और रैबीज के टीके बनने थे। सरकार ने टीकाकरण के लिए जरूरी 75% टीके यहां से खरीदने की गारंटी दी थी।

रिवाइज प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादन शुरू करने के लिए 2017-18 में 300 करोड़ रुपए अतिरिक्त की जरूरत थी। नीति आयोग ने 2019 में प्रोजेक्ट को अलाभकारी बताया और इसके बाद केंद्र ने इसे हाशिए पर डाल दिया। यहां कोविड टेस्ट के लिए वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया किट बनाने की क्षमता भी है। बंद होने के बावजूद प्रबंधन को 200 से ज्यादा वैज्ञानिकों और स्टाफ को तनख्वाह देनी पड़ रही है। कंपनी 96 करोड़ के घाटे में भी है।

चेन्नई से डीएमके सांसद डॉ. कलानिधि वीरासामी ने कहा, ‘600 करोड़ की कंपनी में वैक्सीन की जगह सैनिटाइजर और डिसइन्फेक्टेंट बनाए जा रहे हैं।’ एचबीएल के सीईओ वी. विजयन कहते हैं कि थोड़े से निवेश से कंपनी एक साल में 100 करोड़ से ज्यादा डोज बना सकती है।

कड़ी शर्तों के चलते नहीं आ रहीं कंपनियां
जनवरी 2021 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन यहां आए थे। 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद केंद्र ने निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे। हालांकि 21 मई की आखिरी समयसीमा तक किसी ठोस प्रस्ताव की खबर नहीं है। एक अधिकारी ने बताया, टेंडर शर्तें इतनी अव्यावहारिक हैं कि कोई कंपनी आ ही नहीं सकती। सरकार समय पर कदम उठाती तो खुद उत्पादन कर सकती थी।

सरकार की राह में पेटेंट कानून रोड़ा नहीं
राज्यसभा सदस्य पी. विल्सन के मुताबिक, पेटेंट एक्ट 1970 की धारा 92, आपात स्थिति में केंद्र सरकार को किसी भी ड्रग का लाइसेंस का अधिकार देती है। आज से ज्यादा आपात स्थिति क्या होगी। राज्य के सांसदों का कहना है कि यदि जनवरी में प्लांट चालू हो जाता, तो 15-20 करोड़ वैक्सीन अतिरिक्त मिल जाती।

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