छत्तीसगढ़ के सिलगेर में चौथी मौत: पुलिस फायरिंग से मची भगदड़ में घायल गर्भवती ने भी दम तोड़ा, ग्रामीण और भड़के; 22 गांवों के लोग पुलिस कैंप बंद करवाने पर अड़े


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रायपुर7 मिनट पहले

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तस्वीर गर्भवती महिला पूनेम सोमली की है।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर-सुकमा के बार्डर पर स्थित सिलगेर, पुलिस की फायरिंग के बाद से सुलग रहा है। सिलगेर में 13 मई से ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शनिवार को आई एक खबर ने ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। खबर यह है कि पुलिस की फायरिंग की वजह से मची भगदड़ में घायल हुई गर्भवती महिला पूनेम सोमली की मौत हो गई है। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया है। 22 गांवों के हजारों लोग कैंप के सामने डटे हुए हैं और कैंप बंद करने की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि भीड़ पूनम को रौंद कर आगे बढ़ने को मजबूर थी। घायल होने के बाद पूनम घर पर ही रही लेकिन अब उसकी मौत हो गई है। वो तीन महीने से गर्भवती थी। इससे पहले उसका एक बच्चा बीमारी की वजह से मर चुका था।

13 मई को हुई पुलिस फायरिंग में तीन लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने इन्हें नक्सली बताया था लेकिन आदिवासियों के मुताबिक ये आम लोग थे। इसलिए हजारों लोग पिछले 17 दिनों से इस इलाके में खुले पुलिस कैंप का विरोध कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने पुलिस फायरिंग में मारे गए 3 लोगों और भगदड़ में जान गंवाने वाली गर्भवती महिला की याद में स्मारक बना दिया है।

ग्रामीणों ने पुलिस फायरिंग में मारे गए 3 लोगों और भगदड़ में जान गंवाने वाली गर्भवती महिला की याद में स्मारक बना दिया है।

4 लोगों की मौत, इसलिए स्मारक पर 4 पत्थर
सिलगेर की सड़क के किनारे जंगल के हिस्से में बैठकर ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे हैं। गर्भवती महिला की मौत के बाद यहां कुछ ही घंटों में स्मारक बना दिया गया। इस स्मारक के ऊपर चार पत्थर रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये पत्थर पुलिस की गोली से मारे गए तीन ग्रामीणों और भगदड़ में मारी गई गर्भवती महिला की याद में रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये स्मारक हमें इस आंदोलन को और मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

ग्रामीणों ने सड़क पर पेड़ बिछाकर रास्ता जाम कर दिया है। यहां 3 दिन से आवाजाही पूरी तरह बंद है।

ग्रामीणों ने सड़क पर पेड़ बिछाकर रास्ता जाम कर दिया है। यहां 3 दिन से आवाजाही पूरी तरह बंद है।

स्टेट हाईवे पर बिछा दिए पेड़
तर्रेम थाने के पास से जो सड़क सिलगेर को जोड़ती है उसे प्रदर्शनकारियों ने बंद कर दिया है। गुस्साए लोगों ने इस सड़क पर पास के जंगल से दर्जनों पेड़ काटकर डाल दिए हैं। पिछले 3 दिनों से ये सड़क बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक फोर्स का कैंप नहीं हटेगा तब तक ये सड़क नहीं खुलेगी।

प्रदर्शन में हर रोज हजारों लोग पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं।

प्रदर्शन में हर रोज हजारों लोग पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं।

न जांच टीम पहुंच पाई, न भाजपा नेता
शनिवार को सिलगेर फायरिंग मामले की जांच के लिए गई टीम घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाई। जांच अधिकारी डिप्टी कलेक्टर रुपेंद्र पटेल के नेतृत्व में जांच टीम बीजापुर होते हुए तर्रेम पहुंची थी। अफसरों ने ग्रामीणों से कहा है कि वे बयान देने के इच्छुक लोग और दिन तय कर लें तो उनकी सुकमा तक आने-जाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। ये बताकर जांच टीम सुकमा लौट गई।

पूर्व मंत्री महेश गागड़ा समेत बस्तर के 6 भाजपा नेता ग्रामीणों से मिलने नहीं जा सके।

पूर्व मंत्री महेश गागड़ा समेत बस्तर के 6 भाजपा नेता ग्रामीणों से मिलने नहीं जा सके।

भाजपा नेताओं का जांच दल भी तर्रेम से ही लौट आया। जांच टीम के सदस्य पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने बताया कि तर्रेम के आगे सड़क पर पेड़ गिरे होने से रास्ता बंद था। अधिकारियों ने बताया कि सिलगेर को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। भाजपा नेताओं ने ग्रामीणों से अपील की है कि इस मामले में कोई सूचना या जानकारी देनी हो तो वे भाजपा सदस्यों को फोन पर बता सकते हैं। इस दल में गागड़ा के अलावा किरणदेव, लता उसेंडी, पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, सुभाऊ कश्यप और राजाराम तोड़ेम शामिल हैं।

हर रोज ग्रामीण ऐसे ही बैनर पोस्टर लेकर पहुंच रहे हैं।

हर रोज ग्रामीण ऐसे ही बैनर पोस्टर लेकर पहुंच रहे हैं।

ऐसे शुरू हुआ विवाद
12 मई को सिलगेर में पुलिस का कैंप बना था। ग्रामीणों ने कहा कि इस जमीन पर अवैध तरीक से कैंप बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ ऐसे कैंप से ग्रामीणों को जबरिया पुलिस कार्रवाई और दूसरी तरफ नक्सलियों की हिंसा का डर होता है। लिहाजा 13 मई को बड़ी संख्या में आदिवासी जमा हो गए विरोध चलता रहा। 13 मई को पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प में पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इसमें मारे गए 3 लोगों को पुलिस ने नक्सली बता दिया।

एक कैंप से इतना बवाल, सरकार बोली- 6 और खोलेंगे
तीन हफ्ते से चल रहा सिलगेर विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। शनिवार को सरकार के प्रवक्ता मंत्री रविंद्र चौबे ने साफ कर दिया है कि बस्तर में चल रहे आंदोलन पर राजधानी रायपुर में बैठी सरकार क्या सोचती है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नक्सलियों की घेराबंदी के लिए आने वाले समय में और कैंप बनाए जाएंगे।

मंत्री चौबे ने सिलगेर को लेकर कहा है कि वहां कौन लोग विरोध कर रहे हैं, यह साफ है। यह केवल सिलगेर का मामला नहीं है। आने वाले दिनों में हम उसके आगे के रास्ते में 6 और कैंप बनाने जा रहे हैं। उधर सिलगेर के लोग भी साफ कह चुके हैं जब तक कैंप नहीं हटेगा विरोध जारी रहेगा।

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