जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का खात्मा !: 70 से अधिक अलगाववादियों की आर्थिक ताकत तोड़ी तो पत्थरबाजी 85% तक घटी


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श्रीनगर10 मिनट पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू

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अनुच्छेद-370 हटाए जाने के दो साल पूरे होने पर घाटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • सरकार ने अलगाववादी नेताओं को जेल में डाला, उनके बैंक खाते और संपत्तियां भी जब्त कीं

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाए जाने के दो साल पूरे हो चुके हैं। इन दो साल में अलगाववाद का लगभग खात्मा हो चुका है। साथ ही, पथराव की घटनाओं में भारी कमी आई है। अगस्त 2019 से पहले कश्मीर में पत्थरबाजी संस्कृति बन गई थी। हर रोज पत्थरबाजी की घटनाएं होती थीं। जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2019 में 1990 से अधिक पथराव की घटनाएं हुई थीं। 2020 में ऐसी 250 घटनाएं दर्ज की गई, यानी पत्थरबाजी 85% तक घट गई। अधिकारियों का कहना है कि 2021 में ऐसी घटनाओं की संख्या 100 से भी कम रहने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि इस सफलता की वजह अनुच्छेद-370 का निरस्त्रीकरण और अलगाववादियों पर सख्ती है। अनुच्छेद-370 हटने के बाद सरकार ने अलगाववादी नेताओं को जेल में डाला और उनके बैंक खातों को सीज किया। साथ ही बड़े पैमाने पर उनकी संपत्तियों की भी कुर्की की, यह सख्ती जारी है। 2019 में लगभग 70 और 2020 में छह अलगाववादियों को गिरफ्तार किया गया। 2019 के बाद से अलगाववादियों से आवासीय गार्ड, व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड और वाहन सुरक्षा कवर भी लिया गया है।

इसका असर यह हुआ है कि बीते दो साल में शायद ही किसी अलगाववादी समूह ने बंद का आह्वान किया। ये समूह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के बाद निष्क्रिय हो गए हैं। बता दें, कश्मीर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद पत्थरबाजी और अलगाववादियों के बंद के आह्वान ने जोर पकड़ा था। 2016 में पत्थरबाजी की रिकॉर्ड 2,653 घटनाएं दर्ज हुई थीं। शोधकर्ता जाहिद भट के अनुसार आतंकवाद और पथराव ने सिर्फ कश्मीर में भारी तबाही मचाई। 5 अगस्त को जो हुआ उस पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यह अच्छी बात है कि युवाओं ने महसूस किया है कि पथराव कोई समाधान नहीं है। घाटी में फुटबॉल प्रेमी मोहम्मद शाहिद कहते हैं कि कश्मीरियों ने अनुच्छेद-370 हटने के बाद परिपक्वता दिखाई है। युवा जानते हैं कि आतंक का रास्ता किसी समस्या का समाधान नहीं है। युवा खेलों पर ध्यान दे रहे हैं, जो उन्हें ड्रग्स से दूर रहने में मदद करता है।

फंडिंग रोकने को प्रतिबंधित और संदिग्ध धार्मिक संगठनों पर नजर
केंद्र ने कश्मीर के सबसे प्रभावशाली सामाजिक-धार्मिक संगठन जमात-ए-इस्लामी पर भी अपना शिकंजा कसा है, टेरर फंडिंग के आरोप में सैकड़ों जमात सदस्यों को हिरासत में लिया गया। कुछ अभी जेल में हैं। प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कम से कम 29 कार्यकर्ताओं को 2019 में और आठ को 2020 में हिरासत में लिया गया था। इससे अशांति फैलने वालों की कमर टूटी है। आगे भी सरकार अशांति फैलाने वालों पर कोई ढील देने के मूड में नहीं है।

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