जानिए नीतीश कुमार के नए मंत्रियों को: सबसे कम उम्र में केंद्रीय मंत्री बनने वाले शाहनवाज अब बिहार में मंत्री, पटना के नितिन पहली बार मंत्रिमंडल में


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पटनाएक घंटा पहले

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शाहनवाज हुसैन।

नीतीश मंत्रिमंडल का मंगलवार को विस्तार किया गया। 17 नए मंत्री बनाए गए। इनमें भारत में सबसे कम उम्र के केंद्रीय मंत्री बनने वाले शाहनवाज हुसैन भी हैं तो पटना के बांकीपुर से लगातार चौथी बार विधायक बने नितिन नवीन भी शामिल हैं। गोपालगंज से सांसद रह चुके जनक राम भी मंत्री बनाए गए हैं, तो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई नीरज कुमार सिंह बब्लू भी नीतीश कैबिनेट की शोभा बढ़ाएंगे। मंत्रिमंडल के इस विस्तार में जदयू की लेसी सिंह एकमात्र महिला सदस्य हैं।

शाहनवाज हुसैन (भाजपा)
शाहनवाज हुसैन ने काफी कम उम्र में राजनीति का पहला पायदान हासिल कर लिया था। 1997 में एक कार्यक्रम के दौरान शाहनवाज हुसैन का भाषण सुनकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि यह लड़का बहुत अच्छा बोलता है, अगर पार्लियामेंट में भेजा जाए तो बड़े-बड़ों की छुट्टी कर देगा। शाहनवाज भारत के सबसे कम उम्र के केंद्रीय मंत्री बने। 2003 से 2004 तक उन्होंने कैबिनेट मिनिस्टर के रूप में कपड़ा मंत्रालय संभाला। 2004 के आम चुनाव में हार के बाद शाहनवाज 2006 में उपचुनाव में भागलपुर सीट से जीते। 2009 में भागलपुर से शाहनवाज को दोबारा जीत मिली। लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पूरे देश में मोदी की लहर थी, शाहनवाज को हार का सामना करना पड़ा। तब से लेकर अब तक वे अपनी राजनीति को मजबूत करने में लगे रहे। हालांकि भाजपा इस दौरान उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाकर उनसे संगठन का काम लेती रही। उन्होंने इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई की है और 5-5 मंत्रालय संभालने का अनुभव है। 1999 में उन्हें फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज, यूथ अफेयर और खेल जैसे मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। 2001 में उन्हें कोयला मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। सितंबर 2001 में नागरिक उड्डयन पोर्टफोलियो के साथ कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

नीरज कुमार सिंह बब्लू (भाजपा)
सुपौल के छातापुर से BJP विधायक नीरज कुमार सिंह बब्लू लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं। तीन बार उन्होंने छातापुर सीट से जीत दर्ज की थी। बब्लू पहली बार 2005 में राघोपुर सीट से विधायक चुने गए थे। फिर 2010, 2015 और 2020 में सुपौल के छातापुर से ये जीते। नीरज पहले JDU में थे लेकिन नीतीश कुमार से अनबन होने के बाद BJP में शामिल हो गए। 2010 में वह छातापुर सीट से JDU की टिकट पर ही चुनाव लड़े थे। नीरज कुमार सिंह का जन्म 2 फरवरी 1969 को पूर्णिया के मल्लडीहा में हुआ था। इन्होंने B.Sc. की है। राजनीति में साल 1988 में इन्होंने एंट्री ली। ये मॉरीशस, सिंगापुर, बैंकॉक, मकाऊ और टर्की जैसे देशों की यात्रा भी कर चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने राजद प्रत्याशी जहूर आलम को 20635 मतों से मात देकर जीत दर्ज की थी। इस सीट पर मुस्लिम, ब्राह्मण और यादव मतदाताओं की संख्या एक तिहाई है। बब्लू दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई हैं।

नीरज कुमार सिंह बब्लू।

नीरज कुमार सिंह बब्लू।

नितिन नवीन (भाजपा)
पिछले विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने पटना के VVIP सीट बांकीपुर से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के नेता और शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को 39 हजार 36 वोटों से हराया था। चुनाव में नितिन नवीन को 83068 वोट मिले थे। नितिन भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। नितिन पार्टी के युवा चेहरा हैं और सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। वे BJP नेता स्व. नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं। पटना लोकसभा क्षेत्र की बांकीपुर विधानसभा सीट गठबंधन में BJP के खाते में आती रही है। बांकीपुर इलाके में वैश्य और कायस्थ समाज का बोलबाला है। नितिन नवीन भी कायस्थ जाति से आते हैं। ऐसे में उनका अपनी जाति के वोटरों में दबदबा है।

नितिन नवीन।

नितिन नवीन।

आलोक रंजन झा (भाजपा)
सहरसा विधानसभा सीट से भाजपा के आलोक रंजन झा (103538 वोट) ने महागठबंधन की प्रत्याशी लवली आनंद (83859 वोट) को 19679 मतों से हराया था। इस सीट से वह लगातार दूसरी बार विधायक बने। यादव मतदाता बहुल इस सीट पर जातीय समीकरण के अलावा शहरी क्षेत्र का भी काफी प्रभाव है। 2010 में परिसीमन के बाद जहां इस सीट पर भाजपा के आलोक रंजन विजयी रहे, वहीं 2015 में इस सीट पर राजद के अरुण कुमार विजयी हुए थे। सहरसा विधानसभा सीट पर सबसे अधिक छह बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता रमेश झा सबसे अधिक पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि चार बार वे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते, जबकि एक बार पीएसपी के उम्मीदवार के रूप में विजयी रहे।

आलोक रंजन झा।

आलोक रंजन झा।

सुभाष सिंह (भाजपा)
गोपालगंज सीट से वर्तमान विधायक सुभाष सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में लालू प्रसाद के साले और BSP कैंडिडेट साधु यादव को मात दी थी। 2015 में BJP के टिकट पर सुभाष सिंह ने RJD के रियाजुल हक को हराया था। उन्होंने 2010 और अक्टूबर 2005 के चुनाव में भी रियाजुल हक को मात दी थी। फरवरी 2005 में BSP के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे रियाजुल हक ने सुभाष सिंह को हराया था।

सुभाष सिंह।

सुभाष सिंह।

प्रमोद कुमार (भाजपा)
नेपाल की सीमा से सटे बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की मोतिहारी विधानसभा सीट से BJP विधायक प्रमोद कुमार लगातार 5वीं बार विधायक बने हैं। 2017 में वह कैबिनेट में पर्यटन विभाग के मंत्री बनाए गए थे। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने RJD प्रत्याशी ओमप्रकाश चौधरी को 14,645 वोटों से हराया था। इस सीट से BJP लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की थी। इस सीट पर RJD के उम्‍मीदवार को आखिरी बार 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी। 2005-20 से लगातार इस सीट से जीतते आए हैं। जनता के लिए आसानी से सुलभ हो जाने के कारण इनकी काफी लोकप्रियता है। प्रमोद कुमार पीपराकोठी प्रखंड के सूर्यपुर के निवासी हैं। बचपन से वे जनसंघ के स्वयंसेवक रहे। आपातकाल के दौरान वे 1975-76 में मोतिहारी कारा में रहे। वर्ष 1976-81 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रमुख व जिला में विभिन्न पदों पर रहे। वे पार्टी के जिला संगठन में विभिन्न पदों पर रहे। जिला भाजपा के महामंत्री व जिला अध्यक्ष भी बने। पहली बार उन्होंने वर्ष 2000 में चुनाव लड़ा था, जिसमें वे चुनाव हार गये थे। उसके बाद वर्ष 2005 में पहली बार चुनाव जीत कर आए। वर्ष 2005 में दो बार फरवरी व नवंबर माह में चुनाव हुआ था। दोनों बार वे चुनाव जीते। इसके बाद वर्ष 2010 व वर्ष 2015 में चुनाव जीत कर आए।

प्रमोद कुमार।

प्रमोद कुमार।

सम्राट चौधरी (भाजपा)
MLC सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के तारापुर प्रखंड के लखनपुर गांव में हुआ था। भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश पूर्व उपाध्यक्ष हैं। सम्राट चौधरी बिहार सरकार में 1999 में कृषि मंत्री और 2014 में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री रह चुके हैं। राजनीतिज्ञ परिवार से सम्बन्ध रखने वाले सम्राट के पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। वहीं, मां पार्वती देवी तारापुर से विधायक रह चुकी हैं। विद्यालय जीवन के बाद सम्राट ने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से PFC की पढ़ाई की। सम्राट ने 2007 में ममता चौधरी से विवाह किया। इनकी दो सन्तान हैं– प्रणय प्रियम चौधरी और चारू प्रिया। सम्राट चौधरी 1990 में सक्रिय राजनीति में शामिल हुए और 19 मई 1999 को उन्होंने बिहार सरकार में कृषि मंत्री के पद की शपथ ली। उन्होंने वर्ष 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। 2010 में उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाया गया था। 2 जून 2014 को बिहार सरकार में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली और कार्यभार संभाला था। 2018 में भारतीय जनता पार्टी में उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया गया। वर्तमान में सम्राट चौधरी भाजपा से विधान परिषद के सदस्य हैं।

सम्राट चौधरी।

सम्राट चौधरी।

जनक राम (भाजपा)
जनक राम गोपालगंज से सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव BJP के टिकट पर जीता था। वह वाणिज्य पर बनी संसद की स्थायी समिति के सदस्य थे। वह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जनक राम बसपा से भाजपा में शामिल हुए थे। तब जनक राम ने रिकॉर्ड 2लाख 74 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। जनक राम भाजपा में दलित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और पार्टी के स्टार प्रचारक भी रहे हैं।

जनक राम।

जनक राम।

नारायण प्रसाद (भाजपा)
पश्चिम चंपारण के नौतन विधानसभा सीट से नारायण प्रसाद लगातार दूसरी बार विधायक बने थे। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने कांग्रेस के शेख मोहम्मद कामरान को 25896 वोटों से हराया था। 2015 के विधानसभा चुनाव में पहली बार BJP ने यहां से जीत हासिल की थी। उसके पहले यहां से JDU के प्रत्याशी जीतते रहे। कभी कांग्रेस का गढ़ रही नौतन विधानसभा सीट पर 1990 के पहले तक किसी और पार्टी का नाम शायद ही आता है। लेकिन जनता दल के उदय के साथ ही नौतन से कांग्रेस का साथ छूटता चला गया।

नारायण प्रसाद।

नारायण प्रसाद।

लेसी सिंह (जदयू)
पूर्णिया के धमदाहा से विधायक लेसी सिंह के लिए प्रचार करने गए नीतीश कुमार ने ‘अंत भला तो सब भला’ कहकर चुनाव जीता था। उन्होंने RJD के दिलीप कुमार यादव को 33,594 मतों के अंतर से हराया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लेसी सिंह के पक्ष में प्रचार करते हुए आखिरी चुनाव होने की घोषणा की थी। पूर्णिया जिले की धमदाहा विधानसभा सीट जातिगत समीकरण के मामले में खास है। सोशल इंजीनियरिंग का इस सीट पर खासा प्रभाव माना जाता है। यह क्षेत्र मुस्लिम और यादव बहुल्य है। इसलिए इसे MY फैक्टर वाली सीट कहा जाता है। यानी कि मुस्लिम और यादव जिसके पक्ष में होंगे उसकी जीत पक्की मानी जाती है।

लेसी सिंह।

लेसी सिंह।

श्रवण कुमार (जदयू)
CM नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा सीट से लगातार 7वीं बार विधायक बनने वाले श्रवण कुमार नीतीश सरकार में ग्रामीण विकास कार्य मंत्री रह चुके हैं। वे न केवल मुख्यमंत्री के सजातीय (कुर्मी) हैं बल्कि उनके खासमखास भी हैं। 1995 से लगातार नालंदा विधानसभा सीट से जीतते आ रहे हैं। 61 वर्षीय श्रवण कुमार मूलतः समाज सेवा से जुड़े रहे हैं। जब लालू यादव से अलग होकर नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने साल 1994 में समता पार्टी का गठन किया था, तब से श्रवण कुमार नीतीश के खास सिपाही रहे हैं। श्रवण कुमार ने इंटर तक ही पढ़ाई की है। छात्र जीवन में ही उन्होंने जेपी मूवमेंट के जरिए राजनीति में कदम रखा और पहली बार समता पार्टी के टिकट पर 1995 में नालंदा सीट से विधायक चुने गए। 1995 में समता पार्टी के मात्र सात उम्मीदवार जीते थे, उनमें से एक श्रवण कुमार भी थे।

श्रवण कुमार।

श्रवण कुमार।

सुनील कुमार (जदयू)
सुनील कुमार भोरे विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आए हैं। ये पूर्व DG रहे हैं। गोपालगंज जिले की भोरे सीट बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में काफी चर्चे में रही थी। वजह थी वहां के सीटिंग विधायक अनिल कुमार के अपने छोटे भाई के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेना। उन्होंने सुनील कुमार के JDU से मैदान में होने के कारण चुनाव नहीं लड़ा था।

सुनील कुमार।

सुनील कुमार।

संजय झा (जदयू)
पूर्व मंत्री संजय झा मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड के अररिया संग्राम गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने JNU दिल्ली से इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। ये वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर दरभंगा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे, लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा। JDU में आने पर यह राज्य योजना पर्षद के सदस्य भी बने थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं। विधान पार्षद रहते हुए इन्होंने जल संसाधन मंत्रालय की कमान संभाली थी।

संजय झा।

संजय झा।

जमां खां (जदयू)
कैमूर के चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से बसपा की टिकट पर जमां खां पहली बार जीते। इसके बाद उन्होंने पार्टी बदली और JDU में शामिल हो गए। अब वह सीधे मंत्री बन गए। पार्टी बदलने का इनाम भी उन्हें जल्द ही मिला। क्षेत्र के तमाम बड़े चेहरों को दरकिनार कर अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। पैतृक गांव चैनपुर में शुभकामनाएं देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

जमां खां।

जमां खां।

सुमित सिंह (जदयू)
जमुई के चकाई विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी सुमित सिंह पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र हैं। 39 साल के उम्र में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए RJD की पूर्व विधायक सावित्री देवी को हराया था। निर्दलीय विधानसभा का चुनाव जीतने वाले सुमित सिंह ने जदयू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। इनके दादा कृष्णानंद सिंह भी दो बार चकाई से चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 1967 और 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से जीत हासिल की थी। उनके भाई अभय भी विधायक रह चुके हैं। 2010 में उन्होंने पारिवारिक विवाद में पत्नी और बेटी को मारकर खुदकुशी कर ली थी।

चकाई विधायक सुमित सिंह।

चकाई विधायक सुमित सिंह।

मदन सहनी (जदयू)
मदन सहनी बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने दरभंगा के बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। वे दरभंगा के बहादुरपुर के खराजपुर गांव के रहने वाले हैं। पहली बार वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर विधायक बने थे।

मदन सहनी।

मदन सहनी।

जयंत राज (जदयू)
जयंत राज अमरपुर विधानसभा क्षेत्र से JDU विधायक हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में वे मात्र 8 लाख खर्च कर विधायक बने थे। बांका के RJD उम्मीदवार डॉ. इकबाल अंसारी ने सबसे अधिक 18 लाख रुपए से अधिक खर्च किए थे, लेकिन वह हार गए थे। युवा चेहरा होने के कारण जयंत राज को विधानसभा चुनाव में सफलता मिली थी।

जयंत राज।

जयंत राज।

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