जिले को अब 10 हजार डाेज को-वैक्सीन की मिली: यहां अच्छा करने की जरूरत; अब तक 430 डोज वेस्ट कर चुके


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रोहतक14 घंटे पहले

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  • टीकाकरण के लक्ष्य से हम 65.69% पीछे, सोमवार को 3500 में से 1809 ने लगवाए टीके, 110 डोज खराब हुईं

कोरोना से जुड़ी एक अच्छी और एक बुरी खबर है। अच्छी यह कि हेल्थ केयर और फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए पहली बार को-वैक्सीन की 10 हजार डोज मिली हैं। बुरी यह कि महामारी से एक दिन में तीन मौतें हुई हैं। एक पॉजिटिव केस भी मिला है। उधर, को-वैक्सीन की खेप मिलना अच्छा है, लेकिन 16 जनवरी से अबतक हम कोविशील्ड की 7% यानी 430 डोज वेस्ट कर चुके हैं।

टीकाकरण के लक्ष्य से भी हम 65.69% पीछे हैं। इसलिए अब टीके लगवाने के लिए वर्कर्स को आगे आना होगा। यूएचएस के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने सभी विभागाध्यक्षों से वैक्सीन नहीं लगवाने वालों की मंगलवार दोपहर तक डिटेल भी मांगी है। सोमवार को मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव चलाकर 3500 हेल्थ केयर व फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगानी थी। शाम 5 बजे तक 27 सेंटरों पर 1809 ने ही डोज लगवाई। जिला टास्क फोर्स के अधिकारी ने बताया कि एक दिन में 110 के करीब डोज बर्बाद हुईं।

भास्कर अपील: आगे आकर वैक्सीन जरूर लगवाएं क्योंकि आप उन खुशकिस्मतों में से हैं जिनको डोज लगवाने के लिए सबसे पहले चुना गया है

2 हजार कोविशील्ड भी मिलीं, आज सभी सेंटरों पर पहुंचेगी

सोमवार दोपहर जिले में को-वैक्सीन की 10 हजार और कोविशील्ड की दो हजार डोज सिविल सर्जन कार्यालय स्थित क्षेत्रीय वैक्सीन भंडार केंद्र में पहुंच गई। डीआईओ डॉ. अनिलजीत तेहरान ने बताया कि मंगलवार सुबह पीजीआई सहित अन्य सेंटरों पर को-वैक्सीन की डोज पहुंचा दी जाएगी।

हर वायल में 5 एमएल दवा, 0.5-0.5 की एक खुराक

को-वैक्सीन की मल्टी डोज की सप्लाई हुई है। एक वायल के अंदर 5 एमएल दवा होती है।

एक वायल से 0.5-0.5 एमएल के हिसाब से एक बार में 10 लोगों को लगाना होता है।

एक साथ 10 लोग रहने पर वॉयल का पूरा इस्तेमाल हो जाता है। 10 से कम रहने पर वायल में बची हुई वैक्सीन बर्बाद हो जाती है।

वायल खुलने के 4 घंटे के बाद इसका इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए बची हुई डोज बर्बाद हो जाते हैं।

साइड इफेक्ट के डर से आगे आने से कतरा रहे कईं वर्कर

कई लोग सूचीबद्ध होने और फोन पर मैसेज मिल जाने के बाद भी वैक्सीनेशन सेंटर तक नहीं आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह साइड इफेक्ट का डर है। तय लोगों के समय पर बूथ पर नहीं आने से खुली हुई वायल में बची खुराक किसी काम की नहीं रहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरुआत में ही अपील कर चुके हैं, कि वैक्सीन की एक भी बूंद बर्बाद न हो। लिहाजा हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी है ताकि दवा ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम आ सके। हालांकि विशेषज्ञ कह चुके हैं यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।

2 लोग आने पर खुलती है वायल

उदाहरण के तौर पर 2 लोग आने पर भी 10 डोज की वायल खोलनी पड़ रही है। आगे के 8 लोग चार घंटे के भीतर आ जाएं तो 8 डोज का इस्तेमाल हो जाता है। लेकिन दोपहर से शाम के समय के बीच लोगों की संख्या 10 के अनुपात में नहीं रह पाती है, ऐसे में बची वैक्सीन बर्बाद हो जा रही है।

जानिए… दोनों वैक्सीन में क्या अंतर है

कोविशील्ड

वैक्सीन एडिनो वायरस निष्क्रिय करके विकसित की गई है।

सेंट्रल ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने 18 साल या उससे अधिक उम्र वाले लोगों के लिए आपात स्थिति में सीमित प्रयोग के साथ लगाने की अनुमति दी।

कोविशील्ड वैक्सीन के एक वायल में 10 लोगों को टीका लगाया जा सकता है।

स्टडी में पाया गया छह और 12 हफ्ते के बीच में दोबारा डोज लगवाने पर एंटी बॉडी ज्यादा मात्रा में विकसित हो सकती है।

को-वैक्सीन

इसे काेविड 19 को निष्क्रिय करके तैयार किया गया है।

इसे 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को दिया जाएगा। टोल लाइक रिसेप्टर बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ाने में हेल्प करते हैं।

एक वायल से 20 लोगों को टीका लगाया जाएगा।

सेंट्रल ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने को-वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। सरकार ने जिन लोगों को वैक्सीनेशन के प्रायोरिटी ग्रुप्स में रखा है, उन्हें वैक्सीन लगाई जा रही है।

जैसा कि काे-वैक्सीन ट्रायल कमेटी के को-इंवेस्टीगेटर डॉ. रमेश वर्मा ने बताया।

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