जेईई में गड़बड़ी; परीक्षा केंद्र की जांच कर रही सीबीआई: इंफ्रास्ट्रक्चर देख परीक्षा केंद्र चुन लेता है एनटीए, यहीं से हेराफेरी का आसान रास्ता


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6 मिनट पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा

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दैनिक भास्कर की पड़ताल बताती है कि मौजूदा प्रक्रिया में ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों के चयन की प्रक्रिया ही सबसे बड़ा लूपहोल है।

जेईई यानी जॉइंट एंट्रेंस एक्जाम को देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा माना जाता है। मगर नकल की दृष्टि से फुलप्रूफ मानी जाने वाली परीक्षा में हेरफेर कर प्रवेश के घोटाले की फिलहाल सीबीआई जांच चल रही है। जांच एजेंसी ने कुछ लोगों को पकड़ा है। हेराफेरी कैसे हुई और कौन-कौन इसमें शामिल था, यह तो जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मगर दैनिक भास्कर की पड़ताल बताती है कि मौजूदा प्रक्रिया में ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों के चयन की प्रक्रिया ही सबसे बड़ा लूपहोल है। इसके जरिये गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है।

तकनीकी तौर पर तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अपने परीक्षा सॉफ्टवेयर को अभेद्य बनाने का पूरा जतन किया है। लेकिन परीक्षा केंद्र पर मिलीभगत के जरिये इस सॉफ्टवेयर में भी पिछले दरवाजे से सेंध लगाई जा सकती है। जैसा कि इस मामले में नजर आता है, जहां परीक्षा केंद्र पर बैठे परीक्षार्थी का कंप्यूटर रिमोट एक्सेस के जरिये दूर से कंट्रोल किया जा रहा था।

परीक्षा सॉफ्टवेयर डालते ही बाकी एक्सेस बंद होते हैं, मगर पहले से ट्रोजन वायरस डाल लग सकती है सेंध

एनटीए ने ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए जिस तरह का सॉफ्टवेयर विकसित किया है वह सामान्य परिस्थितियों में अभेद्य ही है। किसी भी सिस्टम को रिमोट एक्सेस पर लेने यानी दूर से कंट्रोल करने के लिए ‘एनीडेस्क’ और ‘टीम व्यूअर’ जैसे कई सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। मगर एनटीए का परीक्षा सॉफ्टवेयर इन सभी रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर को ब्लॉक कर देता है।

हैकर इस्तेमाल करते हैं ट्राेजन वायरस
साइबर सिक्योरिटी कंपनी साइबर रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (क्रॉ) के निदेशक मोहित यादव के मुताबिक, परीक्षा में सेंध के लिए हैकर्स ने ट्रोजन वायरस एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया होगा। यह वायरस सिस्टम में निष्क्रिय पड़ा रहता है। सही वक्त पर हैकर इसे सक्रिय करता है और यह हिडन बैकडोर, कंप्यूटर के सिक्योरिटी मैकेनिज्म को बायपास कर रिमोट एक्सेस दे देता है।

परीक्षा केंद्र कमजोर कड़ी क्यों
किसी भी सिस्टम में ट्रोजन वायरस एप्लीकेशन डालने के लिए जरूरी है कि जांच से पहले ही उसमें ट्रोजन वायरस एप्लीकेशन डाल दिया जाए। यह तभी संभव है जब परीक्षा केंद्र पर कोई न कोई हैकर से मिला हुआ हो। एनटीए की ऑफलाइन परीक्षाओं के लिए सामान्यत: सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है।

इन स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए ऐसे सेंटर की जरूरत होती है जहां सैकड़ों कंप्यूटर हों। अत: निजी संस्थान व कंपनियों में परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। एनटीए उन कंपनियों को रिक्वेस्ट भेजती है जहां पर्याप्त संसाधन हों। स्वीकृति मिलने के बाद एनटीए केंद्र का मुआयना और तकनीकी पड़ताल करती है। हालांकि केंद्र संचालक संस्थान की बारीकी से पड़ताल नहीं हो पाती।

एनटीए में भी हो सकती है सेंध
परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र के चार विकल्प फॉर्म में भरने होते हैं। ऐसे में जिस परीक्षार्थी को हेराफेरी करने वाले लाभ दिलाना चाहते हों उसे सही परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में एनटीए से जुड़े लोगों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सीबीआई को सोनीपत के केंद्र में घपला होने की भनक एक महीने पहले से थी, एजेंसी को कई परीक्षार्थियों ने इसकी गुप्त सूचना दी थी।

पहले दो सत्रों में बेहद मामूली अंक हासिल करने वाले कई छात्रों के तीसरे सत्र में अचानक 99 से भी अधिक पर्सेंटाइल आ गया और ऐसा तब हुआ जब पहले के दो सत्रों की परीक्षा उस छात्र ने अपने गृह प्रदेश में या करीबी केंद्र पर दी थी और तीसरे सत्र की परीक्षा अपने राज्य से बहुत दूर जाकर दी। एनटीए ने भी सीबीआई को जांच के दौरान ऐसे कई उदाहरण बताए जहां पहले दो सत्रों में छात्र का पर्सेंटाइल बेहद कम था और तीसरे सत्र में अचानक असाधारण सुधार आ गया।

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