डरना जरूरी है: स्वाइन फ्लू में 100 साल में 4 म्यूटेशन पर काेविड 15 माह में ही 3 बार बदला, चौथी बार बदला तो थर्ड वेव ज्यादा घातक होगी


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जयपुरएक घंटा पहलेलेखक: इमरान खान

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दो महीने पहले अस्पतालों में इस भीड़ को देखकर ही पर सतर्क हो जाइए। कोरोना कई गुना तेजी से फैलता है..इसलिए जरूरी हो तभी निकलें।

  • पहली लहर में पीक 8 माह, दूसरी 2 माह में सिमटी, अब डेल्टा+, लैम्बडा वैरिएंट का खतरा

लगातार दो महीने तक कहर बरपाने वाले कोरोना की दूसरी लहर अब धीरे-धीरे शांत पड़ती जा रही है। हालांकि केसों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना गया नहीं है, बस थोड़ा सा शांत पड़ गया है। जो गलतियां हमने पहली लहर के बाद की थीं, उसे अब दोहराना नहीं है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता या फिर वैक्सीनेशन निश्चित आबादी का नहीं हो जाता तब तक सख्ती बरतनी होगी। क्योंकि कोरोना का वायरस लगातार रूप बदल रहा है।

प्रदेश का सबसे बड़ा कोविड अस्पताल आरयूएचएस खाली है। सिर्फ 115 मरीज भर्ती हैं। खाली अस्पताल सुकून देता है...कोरोना शांत है।

प्रदेश का सबसे बड़ा कोविड अस्पताल आरयूएचएस खाली है। सिर्फ 115 मरीज भर्ती हैं। खाली अस्पताल सुकून देता है…कोरोना शांत है।

आंकड़ों की पड़ताल में आया कि पिछले साल पहली लहर में पीक आने में 8 महीने लगे थे, वहीं दूसरी लहर दाे महीने में ही सिमट गई। दूसरी लहर में काेविड-19 वायरस ज्यादा आक्रमक रहा, इसलिए पहली लहर के मुकाबले संक्रमण तेजी से फैला और माैतें भी कई गुना ज्यादा हुईं। दूसरी लहर अब शांत जरूर हाे चुकी है लेकिन विशेषज्ञाें ने तीसरी लहर की चेतावनी जारी कर दी है।

एसएमएस अस्पताल में काेविड ट्रीटमेंट प्राेटाेकाॅल के सदस्य डाॅ. रमन शर्मा का कहना है कि वायरस तेजी से अपना रूप बदलकर ज्यादा आक्रमक हुआ है। किसी भी इन्फ्लुएंजा वायरस में इतना तेज म्यूटेशन कभी नहीं देखा गया। 1918 से स्वाइन फ्लू वायरस में 4 बार मेजर म्यूटेशन हुए हैं और आखिरी म्यूटेशन 2004 में हुआ था।

काेविड-19 में एक साल में तीन से चार बार म्यूटेशन हाे चुका है। गाैर करने लायक बात यह है माइनर म्यूटेशन हाे रहा है लेकिन यह बिहेव मेजर म्यूटेशन की तरह कर रहा है, इसलिए तेजी से एक के बाद एक लहर आ रही है।

अब तक दाे वैरिएंट ने मचाई तबाही

एंटीबाॅडी डवलप हाेती है ताे वायरस स्प्रेड हाेता हुआ स्ट्रक्चर में बदलाव कर लेता है

असल में जब भी वायरस अपना स्ट्रक्चर यानि रूप बदलता है ताे वैज्ञानिक इसे नया वैरिएंट मानकर एक नया नाम दे देते हैं। यानि जैसे ही इंसानी शरीर में किसी वैरिएंट में लड़ने के लिए एंटीबाॅडी डवलप हाेती है ताे वायरस आक्रामक हाेने के लिए स्प्रेड हाेता हुआ स्ट्रक्चर में बदलाव कर लेता है।

गौरतलब है कि शनिवार को ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने चेताया था कि अगर लोगों ने मास्क, डिस्टेंसिंग और सतर्कता के अन्य उपाय छोड़े तो अगले 6 से 8 हफ्ते में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। ऐसे में साफ है कि वायरस के बदलते रूप और हमारी लापरवाही इसे और बढ़ा सकते हैं।

  • अल्फा : पहली लहर में कोरोना वायरस के इसी वैरिएंट ने देश-दुनिया को बेहाल किया था। विशेषज्ञाें का कहना है कि यह कहना मुश्किल है कि यह मेन वैरिएंट ही था। हालांकि इसमें संक्रमण फैलाव दूसरी लहर के मुकाबले काफी कम था और मौतें भी कम रहीं।
  • डेल्टा वैरिएंट : दूसरी लहर में इसी वैरिएंट तबाही मचाई। वायरस के मेन प्राेटीन में स्पाइक चेंज हुए। ये वायरस में माइनर चेंज थे लेकिन बिहेव मेजर म्यूटेशन जैसा था। यह ज्यादा आक्रमक वैरिएंट था तभी ताे दूसरी लहर में इस महामारी के लक्षण बदल गए।
  • डेल्टा प्लस व लैम्बडा : देश के कई राज्याें में नए वैरिएंट डेल्टा प्लस के मरीज मिलना शुरू हाे गए हैं। ऐल्फा और डेल्टा वैरिएंट की तरह इस बार फिर से इसके स्पाइक में म्यूटेशन हुआ है।
रविवार को जलमहल पर भीड़ जुटी रही।...न तो चेहरों पर मॉस्क था ना ही सोशल डिस्टेंसिंग। यह तस्वीर आने वाले आफत की आहट है।

रविवार को जलमहल पर भीड़ जुटी रही।…न तो चेहरों पर मॉस्क था ना ही सोशल डिस्टेंसिंग। यह तस्वीर आने वाले आफत की आहट है।

पहली और दूसरी लहर

पहली लहर : मार्च 2020 पीक नवंबर- 2020 संक्रमित- 61493 कुल माैतें-522 1 दिन में केस-30 नवंबर-745

दूसरी लहर : अप्रैल-2021
पीक – मई पहले हफ्ते में
कुल संक्रमित-125285
कुल माैतें-1442
1 दिन में केस- 4902
संक्रमण दर-16.09%

जयपुर के 21 क्षेत्रों में मिले 30 नए संक्रमित और एक की मौत

कोरोना का ग्राफ लगातार घट-बढ़ रहा है। दो दिन पहले 25 केस आए थे तो शनिवार को 55। अब रविवार को 21 इलाकों में 30 नए कोरोना संक्रमित आए और एक की मौत हो गई।सबसे अधिक बस्सी में 4, झोटवाड़ा और अजमेर रोड पर तीन-तीन मिले आए हैं।

रविवार को विभिन्न अस्पतालों से 115 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। अब तक जयपुर में 1 लाख 86 हजार 976 पॉजिटिव में से 1965 की मौत हो चुकी है। रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या 1 लाख 84 हजार 376 तक पहुंच चुका है।और एक्टिव मरीजों की संख्या का ग्राफ घटकर 635 ही रह गया है।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि लॉकडउन के बाद जैसे-जैसे छूट मिल रही है, वैसे-वैसे लोगों की लापरवाही भी बढ़ रही है। वीकेंड में जलमहल और अन्य स्थानों पर भीड़ आम देखी जा रही है। बसों में भी सरकार ने 50 फीसदी की छूट दे रखी है, लेकिन सवारियां दोगुनी भरी जा रही हैं। साथ ही कोरोना गाइड लाइन की पालना भी नहीं हो रही है।

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