डिजिटल मीडिया पर मीटिंग: पारंपरिक मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लागू न हों नए प्रावधान, DNPA की केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री से मांग


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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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25 फरवरी को सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट के नए नियम जारी किए थे, इसमें सोशल मीडिया पर नकेल कसी गई है। – फाइल फोटो

  • डिजिटल मीडिया के सदस्यों की मांग पर सूचना मंत्री ने कहा कि सुझावों पर गौर करेंगे

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन, यानी DNPA ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से पारंपरिक समाचार समूहों के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स को नए प्रावधानों से बाहर रखने की मांग की है। DNPA के सदस्यों ने जावड़ेकर को बताया कि वे पहले से ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) के नियमों को मानते आ रहे हैं। ये मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई थी।

DNPA प्रतिनिधियों में दैनिक भास्कर, इंडिया टुडे, एनडीटीवी, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, लोकमत, अमर उजाला, दैनिक जागरण, इनाडू और मलयालम मनोरमा शामिल थे। केंद्रीय मंत्री से बातचीत में एसोसिएशन ने बताया कि इनके डिजिटल और पारंपरिक मीडिया के न्यूजरूम एक ही हैं। दोनों के संपादक खबर के पैमानों पर बात करके ही उन्हें छापते या दिखाते हैं।

बैठक में प्रकाश जावड़ेकर ने DNPA के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि वो उनके निवेदन पर विचार करेंगे। साथ ही कहा कि सभी डिजिटल मीडिया को कुछ आधारभूत नियमों का पालन करना होगा। जावड़ेकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद, आज डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन के साथ मीटिंग हुई। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने कहा कि मीटिंग अच्छी रही।

परंपरागत न्यूज से डिजिटल न्यूज को अलग रखा जाए
DNPA ने मंत्री से अपील की है कि शुद्ध डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को परंपरागत न्यूज पब्लिशर्स की तुलना में अलग तरीके से ट्रीट किया जाए। वे पहले से ही परंपरागत न्यूज प्लेटफॉर्म के नियमों का पालन कर रहे हैं। इस संदर्भ में जावड़ेकर ने कहा कि मौजूदा नियम में तीन स्तरीय रूल बनाए गए हैं, जो पहले से ही घोषित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार DNPA के सुझावों को देखेगी और मीडिया इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए इस तरह की सलाह की प्रक्रिया जारी रखेगी।

नए नियमों का स्वागत करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया ने कहा कि टीवी और प्रिंट मीडिया लंबे समय से केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम और प्रेस काउंसिल के तय नियमों का पालन कर रहे हैं। डिजिटल संस्करणों को प्रकाशित करने के लिए पब्लिशर पारंपरिक प्लेटफॉर्मों के मौजूदा मानदंडों का पालन करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया और टीवी चैनलों के डिजिटल संस्करण हैं। इनका कंटेंट काफी हद तक उनके पारंपरिक प्लेटफॉर्म जैसा ही होता है। हालांकि ऐसा कंटेंट भी होता है जो विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए होता है। इसके अलावा ऐसी भी कई इकाइयां हैं, जो सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हैं।

इस दौरान प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि डिजिटल मीडिया के नए नियम से सभी डिजिटल कंपनियों के लिए अच्छा और प्रतिस्पर्धी माहौल बनेगा। उन्होंने ये भी कहा कि नया नियम डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स पर जवाबदेही तय करेगा। इससे पत्रकारिता के कोड ऑफ एथिक्स सहित प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का भी पालन होगा। इसे केबल टेलीविजन नेटवर्क के तहत बनाया गया है।

मामला क्या है?
25 फरवरी को सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट के नए नियम जारी किए थे। इसमें सोशल मीडिया पर नकेल कसी गई है। न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मनोरंजन करने वाले OTT प्लेटफॉर्म्स को भी सेल्फ-रेगुलेशन में बांधा गया है। सरकार ने इसके लिए कोई नया कानून नहीं बनाया है। बल्कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट- 2000 के तहत नए नियम बनाए हैं। इसमें तीन तरह के प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम-कायदे बनाए गए हैं, जिनमें सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स और ओवर-द-टॉप या OTT प्लेटफॉर्म्स शुमार हैं।

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