डेथ ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा: नीम-हकीम और झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज मौत का कारण, नहीं कराते जांच; सर्दी-खांसी की दवा देकर भेज देते हैं घर


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रायपुर4 घंटे पहले

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राज्य स्तरीय डेथ ऑडिट कमेटी प्रत्येक शुक्रवार से शुक्रवार तक के सप्ताह में कोरोना की वजह से हुई मौंतों की समीक्षा करती है। इसके आधार पर मौत की वजहों और पैटर्न को समझने में मदद मिलती है।

  • स्वास्थ्य विभाग ने पड़ताल कर बनाई रिपोर्ट, लापरवाही से जा रही मरीजों की जान
  • समय पर बेहतर इलाज न मिलना मौत का सबसे बड़ा कारण

कोरोना काल में नीम-हकीमों और झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। खास कर कोरोना के संदिग्धों या पॉजिटिव मरीजों को इससे ज्यादा नुकसान हो रहा है। समय पर बेहतर इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हो जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की साप्ताहिक डेथ ऑडिट रिपोर्ट में इस तरह की लापरवाही की कई कहानियां सामने आई हैं…

डॉक्टर ने नहीं कराया कोरोना टेस्ट, तीन फरवरी को मौत

रिपोर्ट में बताया गया कि कोरबा जिले की महिला को 29 जनवरी को कोरोना के सामान्य लक्षण नजर आए थे। उन्होंने एक निजी चिकित्सक के यहां 2 फरवरी को इलाज कराया। डॉक्टर ने उन्हें सर्दी-खांसी की सामान्य दवा देकर घर भेज दिया, लेकिन कोरोना जांच कराने को नहीं कहा। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने उन्हें दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, उनकी खराब होती तबीयत को डॉक्टर नहीं संभाल पाए और 3 फरवरी को महिला की मौत हो गई।

झोलाछाप डॉक्टर से कराया इलाज, फिर रायपुर के अस्पताल में मौत

इसी तरह का एक दूसरा मामला बलौदाबाजार जिले में भी सामने आया। यहां एक 50 वर्ष के व्यक्ति ने 1 जनवरी से कफ और बुखार की शिकायत होने पर गैर मान्यता प्राप्त (झोलाछाप) डॉक्टर से इलाज कराया। हालत नहीं सुधरी तो 10 दिन बाद वह तिल्दा के निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। यहां जांच कराने पर उसकी रिपोर्ट कोरोना पाॅजिटिव आई तो डॉक्टरों ने उसे रायपुर रेफर कर दिया। समय रहते सही इलाज नहीं मिलने के कारण 27 जनवरी को उनकी मौत हो गई।

सर्दी, खांसी और बुखार होने पर भी लोग नहीं करा रहे कोरोना जांच

अधिकारियों ने बताया, राज्य में कोविड-19 से हुई मृत्यु के आंकड़ों का विश्लेषण करने से यह बात सामने आई है कि कई लोग तबीयत खराब होने पर स्थानीय गैर मान्यता प्राप्त अप्रशिक्षित लोगों ने इलाज कराते हैं। साथ ही कई लोग ऐसे भी है जो सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत होने के बाद भी कोरोना की जांच नहीं कराते हैं। इससे स्थितियां बिगड़ रही हैं।

तुरंज इलाज शुरू हुआ तो रिकवरी की संभावना 95 प्रतिशत

राज्य स्तरीय ऑडिट समिति के सदस्य डाॅ. ओपी सुंदरानी ने कहा, सर्दी, खांसी, बुखार आदि लक्षण आने पर लोगों को तुरंत कोरोना जांच करानी चाहिए। पाॅजिटिव आने पर तुरंत इलाज शुरू हो जाता है तो ठीक होने की संभावना 95 प्रतिशत से अधिक होती है।

डॉक्टर ओपी ने बताया कि जांच कराने के बाद रिपोर्ट आने तक खुद को आइसोलेट करना चाहिए। इससे परिवार में संक्रमण का खतरा कम हो हो जाता है। उन्होंने कहा, रिपोर्ट आते तक व्यक्ति खुद ही अपना ऑक्सीजन स्तर नापता रहे। इसके 95 प्रतिशत से कम आने पर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

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