तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ अपील: गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई, कहा- पीड़िता के सबूतों को नजरअंदाज किया गया


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मुंबई23 मिनट पहले

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तेजपाल के साथ काम करने वाली महिला कर्मचारी ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को रेप के आरोपों से बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। सरकार ने कोर्ट से अपील की है कि मामले की फिर से सुनवाई की जाए। याचिका में सरकार ने सेशन कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता को लगने वाले आघात और उसके कैरेक्टर पर सवाल उठाने को लेकर अदालत की समझ में कमी का तर्क दिया है।

सरकार का कहना है कि बचाव पक्ष के वकील की ओर से पेश किए गए सबूतों को निचली अदालत ने न केवल सच माना, बल्कि पीड़िता के सबूतों और प्रोसिक्यूटर के गवाहों को भी नजरअंदाज कर दिया। सरकार ने दावा किया कि अदालत ने इस मामले में सबसे अहम फैक्ट (माफी वाला ई-मेल) को भी पूरी तरह अनदेखा कर दिया। इसमें आरोपी का दोष साफ तौर पर जाहिर होता है।

21 मई को सेशन कोर्ट ने बरी किया था
सेशन जज क्षमा जोशी ने 21 मई को तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। उन पर नवंबर 2013 में एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में महिला सहकर्मी के सैक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप था। हाईकोर्ट की गोवा पीठ के सामने दायर अपील में इस सप्ताह संशोधन करके निचली अदालत के फैसले के पहलुओं और तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ दलीलों को शामिल किया गया है।

कोर्ट से कुछ तथ्य हटाने की अपील
गोवा सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। प्रोसिक्यूटर ने हाई कोर्ट में दाखिल अपील में निचली अदालत के फैसले के उन हिस्सों को हटाने की गुजारिश की है, जो न केवल अभियोजन पक्ष बल्कि पीड़िता पर भी दोषारोपण करते हैं। अभियोजन ने कहा कि इस तथ्य और दूसरे पहलुओं से साफ होता है कि मामले की कानून के अनुसार फिर से जांच होनी चाहिए।

बंद कमरे में हुई सुनवाई
ये केस गोवा के मापुसा के सेशन कोर्ट में चल रहा था। एडिशनल जज क्षमा जोशी ने साढ़े 7 साल पुराने इस केस में पिछले महीने फैसला सुरक्षित रखा था। तेजपाल के कहने पर केस की सुनवाई बंद कमरे में की गई। इस मामले में गोवा पुलिस का पक्ष स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर फ्रांसिस्को तवोरा ने रखा। वहीं वकील राजीव गोम्ज और आमिर खान ने कोर्ट में तेजपाल की पैरवी की।

पहले 3 बार टला था फैसला
तेजपाल के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में कोर्ट 27 अप्रैल को फैसला सुनाने वाली थी। जज क्षमा जोशी ने इसे 12 मई तक टाल दिया था। फिर 12 मई को हुई सुनवाई में फैसले के लिए 19 मई की तारीख दी गई। इसके बाद फिर इसे 2 दिन के लिए टालते हुए 21 मई को फैसला सुनाने के लिए कहा। कोर्ट के इसके पीछे कोरोना महामारी के कारण स्टाफ की कमी का हवाला दिया था।

2013 में हुई थी गिरफ्तारी
रेप का आरोप लगने के बाद 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अपील भी की थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था। मई 2014 में तेजपाल को जमानत मिल गई थी।

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