दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे ने निकाला जीयो, जीने दो का रास्ता: जानवरों की जिंदगी प्रभावित न हो इसलिए 1200 करोड़ खर्च कर मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के नीचे बनेगी 3.87 किमी की टनल


  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • The Lives Of Animals Who Have Gone From Peace, Therefore, Will Spend 3.87 Km Tunnel Under Mukundra Tiger Reserve After Spending 1200 Crores

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जयपुर2 घंटे पहलेलेखक: डीडी वैष्णव

  • कॉपी लिंक

एक्सप्रेस-वे पर कूदने वाले बंदर और हिरण जैसे जीवों को रोकने के लिए मोटी स्टील के तारों की बाड़ बनेगी। फोटो इमेजिंग- सुरोजीत देबनाथ

  • देश में पहली बार अभयारण्य को सुरक्षित रखते हुए प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने का ऐसा उदाहरण

देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे के लिए सबसे बड़ी चुनौती रास्ते में पड़ने वाले जंगल हैं, लेकिन इसका समाधान निकाल लिया गया है। जीवों की सुरक्षा को देखते हुए पहली बार सड़क का एनिमल कॉरिडोर बनाया जाएगा।

इसमें सबसे खास है कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की 8 लेन की 18.25 मीटर चौड़ी एवं 3.87 किमी लंबी टनल। खास इसलिए कि जंगली जीवों की जिंदगी में खलल न पड़े इसके लिए टनल पर रिकॉर्ड 1200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

इस लंबाई की सामान्य टनल से तीन गुना। यह एक दर्रे में बनेगी और साउंडप्रूफ, लाइटप्रूफ, पॉल्यूशनप्रूफ होगी। वन विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन एमएल मीणा का कहना है कि केंद्रीय वन मंत्रालय ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। वर्क ऑर्डर होना बाकी है। वन्य जीवों के रहवास पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए खास डिजाइन भी तैयार की जा चुकी है।

घाट की गूणी टनल, जयपुर। लंबाई 2.8 किमी और खर्च 150 करोड़।

घाट की गूणी टनल, जयपुर। लंबाई 2.8 किमी और खर्च 150 करोड़।

जंगल के आधा किमी पहले और आधा किमी बाद तक जाएगी टनल
टनल के दोनों मुहाने सेंचुरी की सीमा के 500-500 मीटर दूर खुलेंगे। यह हिस्सा शेड से कवर होगा जो 10.5 मीटर ऊंचा व 9 मीटर चौड़ा स्टील केनोपी ब्रिज जैसा होगा। इसकी छत भी ऐसी होगी कि इसके ऊपर जानवर भी आसानी से चल सकें।

सांप, मेंढक, बिच्छू जैसेे जीवों के लिए टनल के नीचे रास्ता
टनल से पहले और बाद 2 अंडरपास व 2 पाइप लगेंगे, ताकि सांप, मेंढक, बिच्छू जैसे जमीन व पानी के पास रहने वाले जीवों व छोटे जानवरों का रास्ता बाधित न हो। दोनों तरफ व डिवाइडर पर ट्री ब्रिज बनेंगे, जो पक्षियों को सड़क पर आने से रोकेंगे।

कूदने वाले बंदर, हिरण जैसे जीवों को रोकेगी स्टील फेंसिंग
एक्सप्रेस-वे पर कूदने वाले बंदर और हिरण जैसे जीवों को रोकने के लिए मोटी स्टील के तारों की बाड़ बनेगी। इसकी ऊंचाई 80 सेमी से ज्यादा और जमीन के नीचे 20 सेमी होगी। सड़क के दोनों ओर 1 मीटर से ज्यादा ऊंची स्टील की रेलिंग भी लगेगी।

बूंदी टनल, कोटा। लंबाई 1.77 किमी और खर्च 120 करोड़।

बूंदी टनल, कोटा। लंबाई 1.77 किमी और खर्च 120 करोड़।

आवाज रोकेंगे मिट्‌टी के ढेर, रोशनी के लिए एंटी ग्लेयर बैरियर
आवाज व रोशनी रोकने के लिए 3 से 5 मीटर ऊंचे मिट्टी के बर्म (पटरियां), सीसी पैनल, पत्थरों को जिग जैग रखा जाएगा। रोशनी रोकने को एंटी ग्लेयर बेरियर्स पर ऐसा पेंट होगा जो प्रकाश रोकता है। 60 मीटर में ऊंचे-घने पेड़ लगेंगे।

वायु प्रदूषण रोकने को विशेष स्क्रीन, 60 किमी ग्रीन बेल्ट होगी
वाहनों का धुआं रोकने को स्क्रीन विकसित की जाएंगी। जंगल में एक्सप्रेस-वे के करीब 60 किमी दायरे में लोकल प्रजातियों के बीज डालकर ग्रीन बेल्ट स्थापित की जाएगी। वाहनों के कंपन के प्रभाव को कम करने के लिए अलग से उपाय होंगे।

चिड़वा टनल, उदयपुर। लंबाई 0.8 किमी और खर्च 100 करोड़ ।

चिड़वा टनल, उदयपुर। लंबाई 0.8 किमी और खर्च 100 करोड़ ।

यहां प्रमुख वन्यजीव
टाइगर, पैंथर, भालू, सियार, लाेमड़ी, वुल्फ, बिज्जू, कबर बिज्जू, चीतल, सांभर, काला हिरण, नीलगाय, राेजड़ा, चिंकारा, जंगली सुअर, सेही, सारस, गिद्ध, माेर, घड़ियाल, अजगर लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर आदि हैं।

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *