दीदी की दुर्गा भक्ति: मंच से ममता बनर्जी के चंडी पाठ के पीछे सिर्फ हिंदूवादी राजनीति या फिर तंत्रमंत्र का ‘खेला’?


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नई दिल्ली27 मिनट पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंदीग्राम में मंच से चंडी पाठ करने के बाद तकरीबन सभी विपक्षी दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। इस पक्ष-विपक्ष की राजनीति से इतर हटकर अगर हम चंडी पाठ के धार्मिक उद्देश्य की तरफ देखें तो इसे करने के पीछे ‘शत्रु पर विजय’ की मंशा होती है।

अब ये बताना मुश्किल है कि ममता को ये सलाह किसी ज्योतिष ने दी है या फिर उन्होंने सिर्फ हिंदूवादी छवि को पुख्ता करने के लिए यह पाठ किया। चंडी पाठ के महत्व पर दुर्गा सप्तशती और धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि ममता का पाठ सीधे तौर पर विजय प्रशस्त करने की तरफ इशारा करता है। सिर्फ इतना ही नहीं, ममता ने जिन श्लोकों को पढ़ा उनका भी विशेष महत्व माना जाता है।

ममता ने चंडी पाठ के दौरान जिन श्लोकों को पढ़ा, उनका भी विशेष महत्व माना जाता है।

राजनीतिक शत्रुओं पर ममता का ‘धार्मिक’ प्रहार
श्री दुर्गासप्तशती पर PhD करने वाली डॉ. चारू शर्मा कहती हैं कि चंडीपाठ करने के पीछे धार्मिक मंशा शत्रुओं का नाश करने की होती है। इस पाठ को संकटमोचक भी कहा जाता है। यानी जब कोई व्यक्ति किसी बडे़ संकट से घिर जाता है तो दुर्गासप्तशती के जानकार या फिर धर्म की समझ रखने वाले लोग इस पाठ को करने की सलाह देते हैं।

वे कहती हैं कि ममता ने पूरा चंडीपाठ नहीं किया है। ‘अर्गला’ यानी पाठविधि के अंतर्गत आने वाले दूसरे अध्याय के श्लोकों को पढ़ा है। ममता ने न केवल श्लोकों को पढ़ा है बल्कि इन्हें संपुट के साथ पढ़ा है। यह तब किया जाता है जब कोई किसी धार्मिक पूजा या पाठ को और शक्तिशाली बनाना चाहता है।

सियासी शत्रुओं पर विजय पाने की प्रार्थना
ममता इन दिनों भाजपा के राजनीतिक प्रहारों से लगातार जूझ रही हैं। तो क्या अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को परास्त करने के लिए भी इस पाठ को किया जा सकता है? डॉ. चारू कहती हैं कि आपका शत्रु कोई भी हो सकता है। नेता, कोई पार्टी या फिर कोई भी। आप उस पर विजय पाने के लिए यह पाठ कर सकते हैं।

वेदपाठी आचार्य हिमांशु उपमन्यु कहते हैं कि ममता ने दुर्गासप्तशती के अर्गलास्तोत्र को पूरा नहीं पढ़ा। उन्होंने पहला, तीसरा और सातवां श्लोक पढ़ा। दूसरे श्लोक ‘मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नम:। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि’ का अर्थ बताते हुए वे कहते हैं कि देवताओं को परेशान करने वाले मधु और कैटभ दो राक्षस थे, जिन्हें खत्म करने के लिए देवी दुर्गा को सभी देवताओं ने मिलकर बनाया था। इस श्लोक का संक्षेप में अर्थ है, मधु और कैटभ नाम के दो राक्षसों को मारने वाली, ब्रह्मा जी को वरदान देने वाली देवि तुम्हें नमस्कार। तुम मुझे जय दो। यश दो और मेरे शत्रुओं का नाश करो।

ये निश्चित तौर पर नहीं बताया जा सकता कि ममता के चंडीपाठ के पीछे मंशा धार्मिक थी या फिर राजनीतिक, लेकिन एक बात तो साफ है कि बंगाल पर निशाना साधे भाजपा को चंडीपाठ कर उन्होंने ये संकेत तो दे दिया है कि वो देवी दुर्गा की तरह अपने हर सियासी शत्रु का दमन करने की पूरी तैयारी कर रही हैं।

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