दुनिया का 17 वां सबसे बड़ा रेगिस्तान: इसका 85% राजस्थान और 15 % हिस्सा पाकिस्तान में, यहां का तापमान गर्मियों में 52 और सर्दियों में -3 डिग्री हो जाता है


बाड़मेर3 घंटे पहले

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सीमावर्ती इलाका होने के साथ ही बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंधित जगह है।

भारत-पाक की अंतरराष्ट्रीय तारबंदी के निकट थार के रेगिस्तानी रोहिड़ी के धोरे सुनहरी कलाकृति से घिरे हुए है। सोने के समान दमकते विशाल रेतीले धोरों(टीलों)में इतना आकर्षण है कि ये देखने वाले के जेहन में हमेशा के लिए बस जाते हैं। जैसलमेर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सम के धोरों से भी सुंदर जगह बाड़मेर जिले के मुनाबाव के पास स्थित रोहिड़ी के रेतीले धोरों की है, लेकिन यहां सीमावर्ती इलाका होने के साथ ही बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंधित जगह है।

इसी वजह से यहां का इलाका पर्यटन से नहीं जुड़ा है। गर्मियों के शुरू होने के साथ 50-60 किमी. की रफ्तार से चलने वाली आंधी में ये धोरे अजीब आवाज करते है। रेतीले धोरे अलग-अलग तरह की कलाकृति का रूप ले लेते है। खासियत ये हैं कि समुद्र की लहरों की तरह दिखाई देती है।

यहां तक फैला हैं थार का रेगिस्तान
थार का रेगिस्तान विश्व का 17 वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है। इसका क्षेत्रफल 77 हजार वर्ग मील है। इस रेगिस्तान का 85% भाग भारत के राजस्थान और 15% भाग पाकिस्तान में है। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, चुरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ तक फैला हुआ है। जबकि पाकिस्तान में सिंध प्रांत से पंजाब प्रांत तक है।

  • सबसे गर्म:गर्मियों में बालू रेत तेजी से गर्म होती हैं और रिकॉर्ड 52 डिग्री सेल्सियस तक पारा रिकार्ड किया गया है।
  • सबसे ठंडा: सर्दियों में यह रेत तेजी से ठंडी भी होती है और रात में पारा माइनस 3 डिग्री तक दर्ज किया गया है।

सर्दी में बर्फ और गर्मी में आग से ये धोरे आंधियों में बदल लेते हैं स्थान

थार का रेगिस्तान दो लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका अधिकांश भाग सीमावर्ती जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में फैला है। थार के रेगिस्तान का कुछ हिस्सा पाक में है। शेष भारत में है। इसे दुनिया का सबसे जीवन्त रेगिस्तान माना जाता है। ये रेतीले धोरे आंधियों में तेजी से हवा के साथ अपना स्थान भी बदलते रहते है। ये ही वजह है कि इन धोरों में से गुजरने वाले सड़क मार्ग हमेशा रेत से अटे रहते हैं। सुबह रेत हटाओ रात में रेत फिर से स्थान बदल लेती है। ये ही वजह है कि इन इलाकों में बहुत कम बारिश होती है, इसी वजह से दूर-दूर तक रेतीले टीलों में वनस्पति नहीं है।

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