दुनिया भर में ऐसा दूसरा मामला: पीरियड के दौरान खून के आंसू रोती थी 25 साल की महिला, पीजीआई ने तीन महीने में किया ठीक


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चंडीगढ़2 घंटे पहलेलेखक: ननु जोगिंदर सिंह

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पीरियड के दौरान महिला की यह हालत हो जाती थी।

  • महिला को दोनों आंखों से आता था खून, इलाज के बाद अब बिल्कुल स्वस्थ

पीरियड के दौरान उतरे हुए चेहरे और दर्द के कारण तकलीफ में परिवार के मर्दों से यह छिपाना मुश्किल हो जाता है कि यह खास दिन चल रहे हैं। 25 साल की महिला के लिए तो जिंदगी और भी ज्यादा मुश्किल थी, क्योंकि इन 5 दिनों में उनकी आंखों से लाल आंसू आते थे।

माहवारी के दौरान आंख से खून के आंसू आने का यह दुनियाभर का दूसरा मामला पीजीआई में करीब 5 साल पहले आया था। चंडीगढ़ की एक महिला को पीरियड्स के दौरान खून के आंसू आने से संबंधित रिसर्च का यह मामला इसी माह में ब्रिटिश मेडिकल जनरल में प्रकाशित हुआ है। डॉ. आशीष भल्ला, डॉ. सुधीर ताले, डॉ सौमित्रो घोष और डॉ. नेहा हांडा ने महिला का इलाज किया।

40 साल के करियर में पहला ऐसा केस आया
अपने करीब 40 साल के करियर में मेरे सामने ये पहला केस आया था। ये होता है और इससे पहले भी हो चुका है। लेकिन ये एक रेयर केस था।
प्रो. आशीष भल्ला, पीजीआई

कारण – एबरेंट टिश्यू शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो जाते हैं
इन दिनों देहरादून एम्स में काम कर रहे डॉ. सुधीर ताले ने बताया कि उनके पास मरीज आई तो उन्होंने इसको डायग्नोज करने की कोशिश थी। क्योंकि महिला को ये लाल आंसू सिर्फ माहवारी के दौरान ही आते थे, इसलिए इस दिशा में ही काम करना शुरू किया।

स्टडी किया तो पता लगा कि इस तरह का एक मामला पहले भी दुनिया में रिपोर्ट हो चुका है। लाल आंसू आने का कारण रहता है कि जब किशोरी के विकास के समय ‘एबरेंट टिश्यू’ युटरेंट बॉडी से इधर-उधर विकसित हो जाते हैं। इसे ‘ऑक्युलर एंड्रोमिट्रियसिस’ का नाम दिया गया है।

इस बीमारी में नाक, कान से भी आ सकता है खून
2016 में पीजीआई में जिस समय यह महिला आई, उस समय उसकी उम्र करीब 25 साल थी। पेपर में प्रकाशित केस में भी उन्होंने स्पष्ट किया है कि महिला जब उनके पास आई थी तो उसे एक बार पहले नाक से खून आने की समस्या आई थी, लेकिन उस समय उसने पीजीआई में डॉक्टर्स से संपर्क नहीं किया। बाद में जब आंखों से भी लाल आंसू आने लगे तो पीजीआई में संपर्क किया।

महिला को कोई चोट नहीं थी। जांच की गई तो आई ट्रॉमा या न्यूक्लियर समस्या भी सामने नहीं आई। महिला की लगभग सभी जांच कर ली गईं। उसके परिवार में इस तरह की कोई हिस्ट्री नहीं थी और वह अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश भी थी। उसे कोई भी दिक्कत नहीं थी।

आई साइट भी ठीक थी। सभी जांच करने के बाद डॉक्टर्स ने स्टडी करते समय पाया कि महिला को ‘ऑक्युलर विकारियस मेंसुचरेशन’ की समस्या हो सकती है। इसमें एबरेंट टिश्यू शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो जाते हैं और जब भी माहवारी में सामान्य ब्लीडिंग में समस्या होती है तो बाकी हिस्सों में विकसित इन टिश्यू के जरिए ब्लीडिंग हो सकती है। ये नाक, कान व स्किन आदि से भी हो सकती है।

इलाज के बाद अब महिला को दवाई की भी जरूरत नहीं
करीब तीन महीने के हार्मोनल ट्रीटमेंट के बाद महिला ठीक हो गई थी। डॉक्टर्स ने गर्भ निरोधक के लिए इस्तेमाल होने वाले हार्मोन की गोलियां दी। तीन महीने के फॉलोअप के बाद महिला ने बताया कि आंखों से दोबारा खून के आंसू नहीं आए।

इसके बाद दवाई लेने की भी जरूरत नहीं हुई। बता दें कि हेमोक्लेरिया के नाम से भी जाने वाले ‘ब्लडी टियर्स’ काफी रेयर हैं और कई बार मेलानोमा या ट्यूमर के कारण भी बन जाते हैं। आंख में इंजरी के कारण भी ऐसी स्थिति बन सकती है, लेकिन उक्त मरीज के मामले में इसका ताल्लुक माहवारी था।

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