द इक्नॉमिस्ट से विशेष अनुबंध के तहत: भारत में संक्रमण उतार पर, लेकिन वैक्सीनेशन धीमा; इस वर्ष 35% लोगों को वैक्सीन लग पाएगी


  • Hindi News
  • National
  • Infection Down In India, But Vaccination Slow; 35% Of People Will Get The Vaccine This Year

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

स्थानीय लॉकडाउन, जनता में बीमारी की दहशत से स्थिति सुधरी।

भारत में कोरोना वायरस की घातक तेज लहर जिस तेजी से उभरी थी, उतनी ही तेजी से उतार पर है। देश के बहुत बड़े हिस्से खासकर गांवों में टेस्टिंग न होने के कारण प्रभावित लोगों की सरकारी संख्या वास्तविक संख्या से बहुत कम है। इसलिए महामारीविद मानते हैं कि कोविड-19 से मौतों के मामले में भारत अमेरिका और ब्राजील से बहुत आगे है। फिर भी, गलत ही सही सरकारी आंकड़े अब उम्मीद जगाते हैं।

देश के कुछ भागों में जहां गिनती विश्वसनीय है, वहां गिरावट का साफ ट्रेंड दिख रहा है। इधर वायरस पर नियंत्रण के प्रमुख साधन वैक्सीनेशन की धीमी गति से जनता निराश है। शुरुआती तेजी के बाद वैक्सीन अभियान लड़खड़ा गया है। अनुमान है, इस रफ्तार से साल के अंत तक 35% लोगों को ही वैक्सीन लग पाएगी।

राष्ट्रीय पॉजिटिविटी दर 24% से घटकर 10 % से कम है। प्रमुख शहरों में ऑक्सीजन के लिए मची भागदौड़ खत्म हो चुकी है। एक ओर बीमारी की दहशत कम हो रही है, वहीं संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। दूसरी लहर की शुरुआत पश्चिमी हिस्से से हुई थी और पूर्व में इसकी बढ़त जारी है। चेन्नई में संक्रमण पीक पर पहुंच रहा है। दिल्ली के एक बड़े अस्पताल के सर्जन अंबरीश सात्विक कहते हैं, हम आशावादी नहीं हो सकते हैं। संक्रमण शहरों से गांवों की ओर बढ़ रहा है। लिहाजा, यह कुछ समय चलेगा।

दूसरी लहर ने घातक प्रभाव छोड़ा है। अगर सरकार का बहुप्रचारित वैक्सीन अभियान सफल रहता तो त्रासदी की भयावहता से हताश जनता के जख्मों पर मरहम लग सकता था। इसकी बजाय अभियान बुरी तरह नाकाम रहा है। संक्रमण में उछाल के बीच वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की संख्या कम रही। सरकार पर्याप्त वैक्सीन हासिल करने और सही तरीके से योजना बनाने में विफल रही है। इस वजह से वैक्सीनेशन 35 लाख प्रतिदिन से घटकर 15 लाख पर आ गया।

पहली डोज लगवाने वाले लाखों लोगों को दूसरी डोज का इंतजार है। लगभग 89% भारतीयों को एक भी डोज नहीं लगी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि इस साल के अंत तक 35% से कम वयस्कों को एक डोज लग पाएगी। सरकार ने अधिक वैक्सीन हासिल करने के अपने निश्चय को स्वयं गलत ठहराया है। फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना जैसी विदेशी वैक्सीनों को अब तक हरी झंडी नहीं मिली है।

वैक्सीनेशन के कारण शहरों में मौजूदा लहर का प्रकोप कम हुआ होगा। लेकिन, वायरस की प्राकृतिक प्रवृत्ति के अलावा संक्रमण कम होने का मुख्य कारण सख्त स्थानीय लॉकडाउन है। भारत की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए मोदी सरकार ने इन उपायों को जितना संभव हो सका टालने का प्रयास किया है। फिर भी, कड़े कर्फ्यू, और पुलिस की सख्ती ने अधिकतर जानें बचाई हैं।

भास्कर की खबरों का जिक्र

इकोनॉमिस्ट ने दैनिक भास्कर में गंगा नदी के किनारों पर मिले शवों के संबंध में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्टिंग का जिक्र किया है। मैग्जीन ने लिखा है, भारत में गंगा के घनी आबादी वाले पठारों में जहां डॉक्टर और प्रभावित लोगों की संख्या के आंकड़े दुर्लभ हैं, वहां घटनाक्रम के संबंध में मिले सबूत भयानक स्थिति की गवाही देते हैं।

हर गांव में मौतें हुई हैं और यह सिलसिला आगे बढ़ता जा रहा है। लोग भावनात्मक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। भास्कर के रिपोर्टरों ने गंगा नदी के 1100 किमी में फैले क्षेत्र में दो हजार से अधिक शवों के आनन-फानन में अंतिम संस्कार का ब्योरा दिया है।

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *