धन्यवाद प्रस्ताव: देश में अब नई विचारधारा ‘फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी’ व नई जमात ‘आंदोलनजीवी’


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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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पीएम का धन्यवाद प्रस्ताव

  • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ की चर्चा के दौरान बोले पीएम
  • भरोसा दिया: एमएसपी था, है और रहेगा, कृषि उपज मंडियां भी आधुनिक बनाएंगे
  • आश्वासन दिया: देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ता राशन उपलब्ध होता रहेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किसान आंदोलन को संकेतों-संकेतों में आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, ‘देश में इन दिनों एक नई जमात पैदा हुई है, ‘आंदोलनजीवी’। ये आंदोलनों पर ही जीवित है। हमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा।… इसी तरह एक नई विचारधारा मैदान में आई है, ‘फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी’। इससे भी देश को बचाने की जरूरत है।’

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम लोग कुछ शब्दों से बड़े परिचित हैं। जैसे- श्रमजीवी, बुद्धिजीवी। पर मैं देख रहा हूं, पिछले कुछ समय से एक नई जमात पैदा हो गई है। वह है, ‘आंदोलनजीवी’। ये जमात आप देखोगे, वकीलों का आंदोलन है, वहां नजर आएगी। स्टूडेंट का आंदोलन है, वहां दिख जाएगी। मजदूरों का आंदोलन है, वहां पाई जाएगी। ये पूरी टोली है, जो दरअसल आंदोलनजीवी है। ये परजीवी है। ये आंदोलन के बिना जी नहीं सकती।’

प्रधानमंत्री ने एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) को भी नए तरीके से परिभाषित किया। उन्होंने इन दिनों एक नया एफडीआई, ‘फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी’ मैदान में आया है।… उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया, ‘एमएसपी था, है, रहेगा। हमारी सरकार मंडियों को मजबूत कर रही है। उन्हें आधुनिक बना रही है।’ आश्वासन भी दिया, ‘जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन िमल रहा है, वह मिलता रहेगा।’

गालियां मेरे खाते में जाने दें, श्रेय आप ले जाएं पर सुधार होने दें

मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक बयान भी पढ़ा। इसमें उन्होंने ‘किसानों को बड़े मार्केट में उपज बेचने की इजाजत देने’ की वकालत की थी। इसके साथ उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार का भी नाम लिया। कहा कि शरद पवार ने भी अब तक कृषि कानूनों का विरोध नहीं किया है।

फिर बोले, ‘आप लोगों (विपक्ष) ने जो कहा, हमने कर दिया। हालांकि आज विपक्ष यूटर्न मार रहा है क्योंकि राजनीति हावी है। लेकिन हम आगे भी सुधार करते रहेंगे। क्योंकि अब देर की तो हम किसानों को अंधेरे में धकेल देंगे। इसलिए सुधार होने दें। आप इनका श्रेय ले जाएं। गालियां मेरे खाते में जाने दें। पर सुधार होने दें।’

राजनीति या राष्ट्रनीति में किसी एक को चुनना होगा

प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से कहा, ‘मेहरबानी कर देश में भ्रम न फैलाएं। हमें तय करना होगा कि हम समस्या का हिस्सा बनना चाहते हैं कि समाधान का। समस्या का हिस्सा बनने पर राजनीति तो चल जाएगी, लेकिन समाधान का माध्यम बनते हैं तो राष्ट्रनीति को चार चांद लगेंगे। राजनीति और राष्ट्रनीति में से हमें किसी एक को चुनना होगा।’

किसान घर जाएं, बातचीत जारी रहेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की सीमाओं पर बीते 75 दिनों से केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘बुजुर्ग आंदोलन में बैठे हैं। उन्हें घर जाना चाहिए। आंदोलन खत्म करें। किसानों के साथ लगातार बात की जा रही है। चर्चा आगे भी चलती रहेगी।’

सिख भाइयों के दिमाग में गलत चीजें भरने में लगे

मोदी ने कहा ‘कुछ लोग सिख भाइयों के दिमाग में गलत चीजें भरने में लगे हैं। लेकिन ये देश हर सिख पर गर्व करता है।… मैंने पंजाब की रोटी खाई है। सिख गुरुओं की परंपरा को हम मानते हैं। उनके लिए जो भाषा बोली जाती है, उससे देश का भला नहीं होगा।’ कुछ लोग हैं, जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। इससे देश को बहुत नुकसान हुआ है। इससे देश को बचाना होगा।’
विपक्ष पर चुटीले तंज भी, ‘नाराज फूफी’ और ‘जी-23’

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए उसके मजे भी लिए। उन्होंने कहा, ‘मजा ये है जो लोग पॉलिटिकल बयानबाजी करते हैं उछल-उछल के, उनकी सरकारों ने भी अपने-अपने राज्‍यों में थोड़ा-बहुत (कृषि सुधार) तो किया ही है। किसी ने (केंद्र के कृषि) कानूनों की मंशा पर सवाल नहीं उठाए हैं। शिकायत ये है कि तरीका ठीक नहीं था…जल्‍दी कर दिया…ये रहता है।

वो तो परिवार में शादी होती है तो फूफी नाराज होकर कहती है.. मुझे कहां बुलाया.. वो तो रहता है… इतना बड़ा परिवार है तो वो तो रहता ही है।’इसी तरह उन्होंने कांग्रेस की रीति, नीति और पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के मसले पर 23 कांग्रेसी नेताओं द्वारा नेतृत्व को पत्र लिखने के मसले का भी चुटीले अंदाज में जिक्र किया।

बीते दिनों यह पत्र लिखने वालों में राज्यसभा के नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद भी थे। मोदी ने उनकी आड़ लेते हुए कहा, ‘गुलाम नबी जी ने कई मसलों पर सरकार की प्रशंसा की है। लेकिन मुझे डर है कि उनकी पार्टी इसे जी-23 के संबंध में न ले ले।’

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