नारदा रिश्वत केस: जज ने चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर हाई कोर्ट के रवैये पर सवाल उठाए, कहा- हम मजाक बनकर रह गए हैं


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कोलकाता2 मिनट पहले

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अपने मंत्रियों की गिरफ्तारी के विरोध में 17 मई को बंगाल की CM ममता बनर्जी CBI ऑफिस पहुंच गई थीं। मामले में सियासी दखल के बाद CBI ने मामले को ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट के एक जज ने नारदा रिश्वत केस को हैंडल करने के कोर्ट के तरीके पर आपत्ति जताई है। सीनियर जजों को लिखे पत्र में उन्होंने ‘अनुचित व्यवहार’ का आरोप लगाते हुए कोर्ट की तीखी आलोचना की है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा है कि हमें एक मजाक में बदल दिया गया है। इसने न्यायपालिका को हैरान कर दिया है।

जस्टिस सिन्हा ने आरोप लगाया कि नारदा मामले को बंगाल से बाहर ट्रांसफर करने के लिए CBI के ई-मेल को कलकत्ता हाई कोर्ट ने गलत तरीके से सिंगज जज के बजाय दो जजों की बेंच के सामने लिस्टेड कर दिया। हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और दूसरे जजों लिखे पत्र में सिन्हा ने लिखा कि हाई कोर्ट को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। हमारा आचरण हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक नहीं है।

CBI ने केस ट्रांसफर करने की याचिका लगाई थी
CBI ने बंगाल के दो मंत्रियों सहित 4 बड़े नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद 17 मई हाई कोर्ट को एक ई-मेल भेजा था। चीफ जस्टिस बिंदल की अध्यक्षता वाली बेंच ने उसी दिन CBI के अनुरोध पर सुनवाई की और तृणमूल नेताओं की जमानत पर रोक लगा दी।

CBI ने अपने ऑफिस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने और के गेट के बाहर जमा तृणमूल समर्थकों की भीड़ का हवाला देते हुए मामले को ट्रांसफर करने के लिए कहा था। यह भी आरोप लगाया गया था कि राज्य के कानून मंत्री भीड़ के साथ कोर्ट पहुंचे थे। यह दिखाता है कि राज्य सरकार माहौल खराब कर रही है और जांच करने वालों के लिए मुश्किल खड़ी कर रही है।

मामले को बड़ी बेंच को सौंपने पर भी आपत्ति
जस्टिस सिन्हा ने लिखा है कि CBI की केस ट्रांसफर की याचिका पर सिंगल जज को सुनवाई करनी चाहिए थी। इसे रिट पिटीशन की तरह नहीं माना जाना चाहिए था, क्योंकि यह संविधान से जुड़ा कानून का कोई बड़ा सवाल नहीं था।

उन्होंने ने बेंच को मामले को एक बड़ी बेंच को सौंपने पर भी आपत्ति जताई, जब जजों ने आरोपी तृणमूल नेताओं को जमानत देने पर असहमति जताई और कहा कि इसके बजाय तीसरे न्यायाधीश की राय ली जानी चाहिए थी।

एकमत नहीं थे जज, इसलिए बड़ी बेंच का गठन
21 मई को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट के जज इस मामले में एकमत नहीं दिखे थे। इस वजह से कोर्ट ने गिरफ्तार नेताओं को घर में ही नजरबंद करने का आदेश दिया था। कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली बेंच में CBI की स्पेशल कोर्ट की ओर से तृणमूल सरकार में मंत्री सुब्रत मुखर्जी, फिरहाद हकीम, विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी को दी गई जमानत पर रोक लगाने को लेकर मतभेद था। इस बेंच में जस्टिस अरिजित बनर्जी भी हैं, जिन्होंने जमानत देने का समर्थन किया था।

नारदा स्टिंग के बाद CBI जांच शुरू हुई
2016 में बंगाल में असेंबली इलेक्शन से पहले नारदा न्यूज पोर्टल ने जुड़े टेप जारी किए गए थे। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद दावा किया गया कि टेप 2014 में रिकॉर्ड किए गए हैं। टेप के हवाले से तृणमूल के मंत्री, सांसद और विधायकों पर डमी कंपनियों से कैश लेने के आरोप लगाए गए थे। कलकत्ता हाई कोर्ट में ये मामला पहुंचा था। हाई कोर्ट ने 2017 में इसकी CBI जांच के आदेश दिए थे।

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