नाली में अमृत मिशन: 8 टंकियां पिछले साल चालू होनी थीं पर दो ही शुरू, 2 लाख लोगों का पानी दो साल लेट


  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • 8 Tanks Were To Be Commissioned Last Year But Only Two Started, Water Of 2 Lakh People Delayed For Two Years

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

रायपुर2 घंटे पहलेलेखक: ठाकुरराम यादव

  • कॉपी लिंक

ऐसी मजबूरी : कचना में नाली में बाल्टी रखकर पानी भरते बच्चे। फोटो : भूपेश केशरवानी

राजधानी के लोगों के लिए पानी तथा कुछ और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने केंद्र ने 2015 में रायपुर को अमृत मिशन के दायरे में लिया और 2020 पूरा होने से पहले तक शहर में 8 टंकियां बनाकर इनके जरिए 2 लाख से ज्यादा लोगों (50 हजार से ज्यादा घर) तक नल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखकर काम शुरू किया गया।

केंद्र से 2016 मध्य तक अमृत मिशन के नाम से 157 करोड़ रुपए रिलीज हुए और काम शुरू हुआ, लेकिन अब तक एक चौथाई भी पूरा नहीं हो पाया है। शहर में 8 टंकियां बन तो गईं, लेकिन सिर्फ 3 ही चालू हो पाई हैं। इन टंकियों का घरों तक पहुंचाने के लिए आउटर के तकरीबन 20 वार्डों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर कई किमी मेन सड़कें और गलियां महीनों से खुदी पड़ी हैं।

पाइप लाइन घरों तक पहुंचाने की हड़बड़ी और टारगेट पूरा करने के लिए कई जगह इन्हें नालियों से गुजार दिया गया है। भास्कर ने आउटर ही नहीं, शहर के कुछ घने इलाकों में पाया कि घरों तक पानी भी नहीं पहुंचा और खुदाई के कारण महीनों से कई सड़कें और गलियां ही हादसों की वजह हो गई हैं।

राजधानी में अमृत मिशन न सिर्फ लेट चल रहा है, बल्कि इसकी वजह से चौथाई से ज्यादा शहर में भारी बदइंतजामी पसर गई है। आउटर और भीतरी वार्डों में इस मिशन की अब जाकर 8 टंकियां बनी हैं, जबकि 2020 के अंत तक इनसे वाटर सप्लाई शुरू हो जानी थी। इनकी टेस्टिंग और पाइपलाइन का काम चल रहा है। लोगों को 24 घंटे पानी पहुंचाने के लिए 1.25 लाख घरों में मीटर भी लगने हैं। इस मिशन के फंड यानी 157 करोड़ रुपए से शहर में नई टंकियां बनाकर घरों तक पानी पहुंचाने के साथ फिल्टर प्लांट का अपग्रेडेशन हो रहा है।

या तो गड्ढा छोड़ दिया या मिट्टी से पाट दिया, पानी गिरा तो फिर वैसे ही गड्ढे
राजधानी रायपुर को नदी का मीठा पानी पिलाने के लिए सरकारी एजेंसियों ने आउटर की पूरी सड़कें खोद डाली हैं। बड़े-बड़े गड्‌ढे और चलती गाड़ियों से उड़ी धूल ने वहां रहनेवालों का जीना दुश्वार कर दिया है। पाइपलाइनें बिछी हैं, लेकिन लोगों के घरों के सामने ले जाकर खुला छोड़ दिया गया है। जब नल खुलते हैं, पाइपलाइनों का पानी गड्ढों को और खराब कर रहा है। शहर में जहां-जहां पर अमृत मिशन की पाइपलाइन बिछी हैं, हर जगह यही स्थिति नजर आई।

इन वार्डों में चल रहा अमृत मिशन का काम
ठाकुर प्यारेलाल वार्ड, दीनदयाल उपाध्याय वार्ड, सुंदर नगर वार्ड, वामन राव लाखे वार्ड, खूबचंद बघेल वार्ड, पंडितइश्वरीचरण शुक्ल वार्ड, संत रविदास वार्ड, कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड, मोतीलाल नेहरू वार्ड, विद्याचरण शुक्ल वार्ड, कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड, बंजारी माता वार्ड, यदि यतन लाल, बाल गंगाधर तिलक वार्ड, दानवीर भामाशाह वार्ड, बाबू जगजीवन राम वार्ड, ठक्कर बापा वार्ड, वीर शिवाजी वार्ड, कन्हैया लाल बाजार वार्ड, पंडित ईश्वर चंद्र शुक्ल वार्ड, शहीद ब्रिगेडियर उस्मान वार्ड में अमृत मिशन का काम चल रहा है।

ठेकेदार का जिम्मा : प्रमोद दुबे, पूर्व महापौर
सवाल – अमृत मिशन 2020 तक पूरा होने था। अभी आधा ही है?
– बड़े प्रोजेक्ट में तकनीकी कारणों से काम थोड़ा-बहुत लेट होता है।
सवाल – क्या तकनीकी दिक्कतें थीं जिनसे प्रोजेक्ट लेट हुआ?
– पाइपलाइन बिछाने में कई विभागों की अनुमति मिलने में देरी हुई।
सवाल – पाइप बिछाकर सड़कें वैसे ही छोड़ दी गईं। कौन जिम्मेदार?
– ठेकेदार की जिम्मेदारी है। उसके शर्तों में शामिल है।

देरी की समीक्षा होगी : एजाज ढेबर, महापौर
सवाल – अमृत मिशन प्रोजेक्ट में देरी क्यों हो रही है?
– समीक्षा करेंगे कि आखिर कहां और क्यों देरी है।
सवाल – शहर तो इस साल भी टैंकरमुक्त नहीं होगा?
– शत-प्रतिशत तो नहीं, फिर भी, काफी जगह कर लेंगे।
सवाल – कब तक पूरा हो जाएगा प्रोजेक्ट?
-दूसरे शहरों के मुकाबले हम आगे हैं।
सवाल – आउटर के वार्डों में इस साल पानी मिल पाएगा?
– देवपुरी, कचना और आमासिवनी टंकियों का लोकार्पण हो चुका।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *