पंजाबी मुंडा, अमेरिकी जवान: चंडीगढ़ के प्रिंस सिंह अब हैं अमेरिकी सेना का हिस्सा, युद्धाभ्यास में भारतीय जवानों को दी हिन्दी में हथियारों की ट्रेनिंग



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बीकानेर16 मिनट पहले

युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने आए अमेरिकी सेना के प्रतिनिधि प्रिंस सिंह।

बीकानेर के महाजन फिल्ड फायरिंग रेंज में हमारे पांव उस समय ठिठक गए, जब एक अमेरिकी सैनिक भारतीय जवानों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देते हुए हिन्दी में बोल रहा था। इक्का-दुक्का नहीं बल्कि आधी पंक्ति हिन्दी में ही बोल रहा था। हमारी नजर उसके चेस्ट पर लगी नेम प्लेट पर गई, जहां बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था SINGH कुछ देर तक उसे निहारने के बाद हम समझ गए कि यह अमेरिकी जवान भारतीय मूल का है और अर्से से अमेरिका में ही रह रहा होगा।

बातचीत का सिलसिला शुरू किया तो उसने अपना नाम प्रिंस बताया। यानी प्रिंस सिंह। करीब 6 फीट लंबे और गोरे रंग के इस जवान ने हिन्दी में ही बात शुरू की और हिन्दी में ही खत्म भी की। प्रिंस ने बताया कि उनका परिवार 1999 में अमेरिका चला गया था। वो मूल रूप से पंजाब के चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। माता-पिता सहित अधिकांश परिवार तो आज भी चंडीगढ़ में हैं, लेकिन प्रिंस का परिवार अमेरिका में ही रहता है। प्रिंस बताते हैं कि वे पहली बार भारत आए हैं, यहां बहुत अच्छा लग रहा है। खासकर भारतीय जवानों के साथ काम करने का अनुभव बहुत ही रोमांचक है।

प्रिंस बताते हैं कि उनकी पढ़ाई अमेरिका में हुई। इसी दौरान मन बनाया कि सेना में काम करना है, चूंकि अमेरिका में था, इसलिए वहां की सेना में शामिल हो गया। दोनों देशों में अंतर पूछने पर प्रिंस कहते हैं कि दोनों देश एक जैसे हैं, दोनों में अनेक तरह की सभ्यताएं पलती हैं।

दोनों देशों का साथ होना अच्छा है
प्रिंस कहते हैं कि भारत और अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ एक मंच पर आकर लड़ना चाहिए। अच्छी बात है कि भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर साथ हैं और बहुत शिद्दत के साथ दोनों काम कर रहे हैं। इस तरह के युद्धाभ्यास से दोनों देशों को लाभ होने वाला है।

आकर्षण का केंद्र
सोमवार को युद्धाभ्यास के पहले दिन अमेरिकी हथियारों की जानकारी देने के लिए पचास से अधिक जवान तैनात थे, लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ प्रिंस सिंह के पास ही थी। कारण सिर्फ इतना था कि वो हिन्दी में सारी जानकारी दे रहे। भारतीय जवानों के लिए उनको समझ पाना बहुत आसान था।

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