पंजाब में कांग्रेस ने खेला बड़ा दांव: बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्टू को बनाया लोकसभा में विपक्ष का नेता, कैप्टन के बाद दूसरे सिख ‘फेस ऑफ द पार्टी’ बने


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लुधियाना/दिल्ली2 मिनट पहले

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रवनीत बिट्‌टू ने पंजाब यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।

  • पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से कैप्टन के बाद दूसरी पंक्ति का नेता बनने को लेकर खींचतान चल रही थी

कांग्रेस ने पंजाब में बड़ा दांव खेलते हुए कए तीर से दो शिकार कर दिए हैं। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते रवनीत बिट्‌टू को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। रवनीत अब लोकसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे। मनीष ितवारी जैसे अनुभवी नेता को दरकिनार करते हुए रवनीत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी ने एक और सिख चेहरे को आगे कर दिया है। वहीं लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के साथ ही रवनीत, कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद सेकेंड सिख ‘फेस ऑफ द पार्टी’ बन गए हैं।

बता दें कि पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से कैप्टन के बाद दूसरी पंक्ति का नेता बनने को लेकर खींचतान चल रही थी। इस दौड़ में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ समेत कई दिग्गज थे, लेकिन पार्टी ने रवनीत बिट्‌टू को यह मौका दिया है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस हाईकमान पंजाब में सिख चेहरे को ही प्रमुखता देना चाहती है। वहीं रवनीत को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाकर पार्टी ने कैप्टन को भी संदेश दिया है कि वे दूसरे नेता के रूप में सिख चेहरे को ही आगे करेंगे।

वहीं बिट्टू को भले ही कांग्रेस ने तब तक के लिए विपक्ष के नेता का चार्ज दिया हो, जब तक अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल के चुनाव में व्यस्त हैं, लेकिन इस बीच पंजाब में काफी कुछ बदल जाएगा। क्योंकि कैप्टन और बिट्‌टू के संबंध अच्छे नहीं हैं। कैप्टन और राहुल के संबंध भी मधुर नहीं हैं। इसकी वजह ये है कि राहुल गांधी, नवजोत सिद्धू को फ्रंटलाइन में लाना चाहते हैं, लेकिन कैप्टन की सिद्धू से नहीं बनती। दूसरी तरफ, पंजाब में कैप्टन का राजनीतिक कद काफी ऊंचा हैं तो उन्हें भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।

उदाहरणस्वरूप राहुल गांधी ने जब पंजाब प्रदेश की कमान प्रताप सिंह बाजवा को सौंप दी थी तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर कर दिया था और फिर कैप्टन के करीबी सुनील जाखड़ प्रदेश प्रधान बने थे। उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव होंं या 2019 का लोकसभा चुनाव, कैप्टन ने राहुल गांधी के फैसला बदलने को सही साबित किया। 2017 में कांग्रेस ने पंजाब में 77 सीटें जीतीं तो लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को 8 सीटें मिली थीं। कृषि बिलों ने कैप्टन का कद और ऊंचा कर दिया है।

इन सभी के बीच बिट्टू को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाकर कांग्रेस हाईकमान ने न सिर्फ कैप्टन को संदेश दिया है, बल्कि मनीष तिवारी को भी संकेत दिया है कि उनके बिना भी पार्टी चल सकती है। मनीष तिवारी वर्तमान में आनंदपुर साहिब से सांसद हैंं और रवनीत बिट्‌टू लुधियाना से सांसद हैं।

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