पश्चिम बंगाल में विकास के दावे और हकीकत: टाइगर लैंड ‘सुंदरबन’ में कई नदियां, पर यहां पानी का संकट ही मुख्य मुद्दा; खेती छोड़ मछली पकड़ने लगे किसान


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7 मिनट पहलेलेखक: बंगाल के सुंदरबन से विशाल पाटडिया

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पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में स्थानीय लोगों के लिए पानी का मुद्दा सबसे बड़ा है। इस इलाके में कई नदियां होने के बावजूद यहां पानी का संकट है।

  • एक ट्यूबवेल पर एक से सवा लाख खर्च के बाद भी पानी की गारंटी नहीं

पश्चिम बंगाल का सुंदरबन अपने दलदलीय द्वीपों पर मौजूद टाइगरों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यहां के स्थानीय लोगों को टीएमसी के विकास के दावाें के बीच बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं। यहां पानी सबसे बड़ा मुद्दा है। इस इलाके में हुगली, मट्ला, विद्याधारी, गोसाबा जैसी नदियां होने के बावजूद यहां पानी का बड़ा संकट है।

स्थानीय नागरिक मानस सरदार कहते हैं पानी की समस्या का आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि एक ट्यूबवेल पर एक से सवा लाख खर्च करने के बाद भी पानी निकलने की गारंटी नहीं है। यहां के पानी में आर्सेनिक की बहुत अधिक मात्रा है। कोलकाता से 130 किमी दूर दक्षिण 24 परगना जिले में गोसाबा, बसंती, कन्निंग वेस्ट, कुल्टुली, सागर जैसी लगभग 10 विधानसभाएं आती हैं। हर जगह यह मुद्दा प्रभावी है। इस जिले के लिए परंपरागत बंगाली धोती पहने टाइगर को चुनाव आयोग ने शुभंकर बनाया है।

किसान धान की खेती छोड़ मछली पकड़ने लगे

स्थानीय एक्टिविस्ट विष्णुपाद प्रधान कहते हैं इस इलाके में सालों से बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। अब साल दर साल यहां वाटर लेवल नीचे जा रहा है। लिहाजा खेती की जमीन खारी होती जा रही है। यह एक बड़ा संकट बन गया है। सरकार भी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है। इस कारण किसान खेती छोड़ मछली मारने और केकड़ा पकड़ने की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। यहां यह भी मुख्य मुद्दा है।

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