पहली बार 70 हजार बच्चों के 95% से ज्यादा अंक: सीबीएसई 12वीं में 2019 में 17, 693 छात्रों के ही 95% से ज्यादा अंक थे, यानी- उच्च शिक्षा की दौड़ इस बार ज्यादा मुश्किल


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  • In CBSE 12th, In 2019, Only 17,693 Students Had More Than 95% Marks, That Is, The Race For Higher Education Is More Difficult This Time.

नई दिल्लीएक घंटा पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा

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परीक्षा न सही, पास होने की खुशी तो पूरी है।

  • इस बार बिन परीक्षा 99.37% बच्चे पास, 2020 से 11% व 2019 से 16% ज्यादा उत्तीर्ण
  • सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत निजी से बेहतर, केंद्रीय विद्यालय व सेंट्रल तिब्बतन स्कूल के 100% बच्चे पास

सीबीएसई ने शुक्रवार को 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। कोरोना के चलते बिना परीक्षा दिए ही 13 लाख से ज्यादा छात्रों में से 99.37% छात्र पास हो गए। 2020 की तुलना में यह 10.59% ज्यादा है जब कोविड महामारी के चलते परीक्षाएं बीच में रद्द कर दी गई थीं। उससे पहले प्री-कोविड साल यानी 2019 (जब सामान्य रूप से परीक्षाएं आयोजित हुई थीं) की तुलना में ये नतीजे 16% अधिक हैं।

यह अब तक का सर्वाधिक पास प्रतिशत वाला रिजल्ट है। नतीजे से असंतुष्ट बच्चों को बाद में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। 11.51% (1,50,152) छात्रों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए हैं जबकि कुल 5.37% छात्रों (70,004) ने 95% से अधिक अंक हासिल किए हैं।

2020 में 90% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या 1,57,934 यानी 13.24% थी जबकि 95% अंक पाने वाले छात्र 38,686 यानी 3.24% थे। 2019 में 90% से ज्यादा अंक लाने वाले बच्चे 94,299 थे। 17,693 छात्र ही 95% से अधिक अंक लाए थे। इस बार 99.67% लड़कियां और 99.13% लड़के पास हुए।

केंद्रीय विद्यालय व सेंट्रल तिब्बतन स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन के शत-प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। नवोदय विद्यालयों के 99.94%, सरकारी स्कूलों के 99.72%, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 99.48% और प्राइवेट स्कूलों के 99.22% छात्र पास हुए।

65 हजार छात्रों के नतीजे रुके, 5 अगस्त को आएंगे: 1060 स्कूलों का डेटा न मिलने से 65,184 छात्रों के नतीजे रुके। बोर्ड ने कहा है, 5 अगस्त को ये नतीजे आएंगे।

10वीं के नतीजे अगले हफ्ते: बोर्ड ने कहा है कि 10वीं के नतीजे अगले हफ्ते जारी करने का प्रयास किया जा रहा है।

भास्कर एनालिसिस : बिहार बोर्ड में एक भी छात्र को 95%+ अंक नहीं, राजस्थान में 80 हजार से ज्यादा को…इसका असर दाखिलों में दिखेगा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्यों ने इस वर्ष 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी थी। नतीजे का फॉर्मूला भी ज्यादातर राज्यों ने सीबीएसई की तर्ज पर ही रखा था। इसमें 10वीं व 11वीं के नतीजों को 30-30% और 12वीं के इंटरनेल असेसमेंट व प्रैक्टिकल को 40% का वेटेज दिया गया था। सीबीएसई ने 11.51% छात्रों को 90%+ अंक दिए। मगर कई राज्य इसमें पिछड़ गए।

95%+ अंक का गणित

  • सीबीएसई ने 2020 में 38,686 को 95%+ अंक दिए। इस बार यह संख्या करीब दोगुनी हो गई।
  • राजस्थान बोर्ड ने करीब 10% यानी 80 हजार से ज्यादा को 95%+ दिए।
  • बिहार बोर्ड में किसी को 95%+ अंक नहीं। सिर्फ 22 छात्रों को 93%+ अंक।

प्रतियोगी परीक्षाओं में दिक्कत नहीं, डीयू के कॉलेजों की दौड़ मुश्किल
शिक्षाविद् डॉ. अशोक पांडेय ने कहा कि छात्रों के पास प्रतिशत के बढ़ने का नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन डीयू के कॉलेजों में दाखिला और टफ हो जाएगा। पिछले वर्ष ही यहां इकोनॉमिक्स व इंग्लिश में कटऑफ 99% तक गई थी। इस साल तो डीयू में कुल 69,554 सीटें हैं।
इससे ज्यादा तो सिर्फ सीबीएसई में 95%+अंक लाने वाले छात्र हैं। यदि साइंस के ज्यादातर बच्चे नीट या जेईई का रुख करें तो भी दो तिहाई बच्चे डीयू जैसे संस्थानों में दाखिला चाहेंगे। ऐसे में 95% से ज्यादा लाने वाले भी सभी बच्चों को दाखिला मिलना मुश्किल है। 90%+ वालों के लिए दिक्कत ज्यादा होगी। बिहार-झारखंड के बच्चे इस दौड़ में पिछड़ जाएंगे।

2094 बच्चे इस बार भी फेल
सीबीएसई ने 12वीं के 13,04,561 छात्रों का नतीजा घोषित किया जिनमें से 12,96,318 छात्र पास हुए। 6149 छात्र (0.47%) कंपार्टमेंट श्रेणी में हैं, यानी ये बच्चे 5 मुख्य विषयों में से एक में फेल हैं। 2094 छात्र ऐसे हैं जो एक से ज्यादा विषय में फेल होने से इस श्रेणी से भी बाहर हैं।

  • पुणे 10वें स्थान से 8वें पर आया। भोपाल 9वें पर बरकरार है। गुवाहाटी 13वें से 10वें पर आया। अजमेर, नोएडा 11वें व 12वें स्थान पर बने हैं। पटना 16वें से 13वें स्थान पर आया।

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